मेजवां। इमाम हजरत अली की ताजपोशी के पर्व ईद-ए-गदीर को फूलपुर क्षेत्र तथा आसपास के शिया बहुल गांवों में रविवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर हजरत अली के अनुयायियों ने विभिन्न स्थानों पर महफिल-ए-मिलाद का आयोजन किया। महफिलों का सिलसिला देर रात तक चलता रहा और पूरे क्षेत्र में खुशी एवं जश्न का माहौल बना रहा। ईद-ए-गदीर के अवसर पर चमावा, मेजवां, कंदरी, नाहरपुर, मख्खपुर, बिजहर, खपड़ा गांव, बेलहरी इमाम अली समेत कई गांवों में विशेष महफिलों का आयोजन किया गया। कार्यक्रमों में स्थानीय शायरों ने हजरत अली की शान में कलाम और कसीदे पेश किए, जिन्हें उपस्थित लोगों ने सराहा। कार्यक्रमों के समापन पर आयोजकों ने लोगों में मिष्ठान वितरित किया गया तथा बच्चों को खाद्य सामग्री के पैकेट दिए गए। शायर कैफी आजमी के पैतृक गांव मेजवां स्थित इमामबाड़े में महिलाओं ने विशेष महफिल आयोजित की, जिसमें कसीदे पेश किए गए। इस दौरान ‘नारे हैदरी’ की गूंज से इमामबाड़ा गूंज उठा। बेलहरी इमाम अली गांव में मस्जिदों और इमामबाड़ों को आकर्षक झालरों से सजाया गया था। इस अवसर पर मौलाना फरमान हैदर ने ईद-ए-गदीर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पैगंबर मुहम्मद साहब ने अपने अंतिम हज से लौटते समय मक्का और मदीना के बीच स्थित गदीर-ए-खुम नामक स्थान पर हजरत अली का हाथ थामकर उन्हें अपना उत्तराधिकारी (खलीफा) और पहला इमाम घोषित किया था। संवाद