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फर्जी डिग्री की गलत रिपोर्ट पर शिक्षकों की नौकरी लेने की तैयारी
आजमगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 12 Dec 2017 11:44 PM IST
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डिग्री
- फोटो : File Photo
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आजमगढ़। आगरा विवि से वर्ष 2004-05 में जारी फर्जी डिग्री मामले में एडी बेसिक के गलत आदेश पर निर्दोष शिक्षकों की नौकरी लेने की कवायद शुरू कर दी गई है। जनपद के 12 शिक्षकों को मंगलवार को बर्खास्तगी के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है। वहीं, एडी बेसिक कार्यालय से चार दिन पहले हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कार्रवाई रोकने की बात कही गई थी, जबकि वो आदेश आजमगढ़ से कतई जुड़ा नहीं था। फिलहाल गलत जांच रिपोर्ट जारी करने वाले एडी बेसिक अपने ही जाल में उलझते जा रहे हैं।
हाईकोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी ने जांच के बाद आगरा विवि से 2004-05 में जारी बीएड की डिग्रियों में 3517 को फर्जी और 1053 को टैंपर्ड घोषित किया गया था। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से इसकी सूची सभी एडी बेसिक को भेज अपने जिलों में इन डिग्री पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों पर विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। एडी बेसिक योगेंद्र कुमार की ओर से 10 नवंबर को सचिव और सभी बीएसए को भेजी जांच रिपोर्ट में मंडल के 29 शिक्षकों को फर्जी डिग्रियों की 3517 की सूची में बताते हुए सभी की सेवा समाप्ति और विविध कार्रवाई करने के आदेश दिए थे।
15 नवंबर को कार्रवाई के बारे में सभी बीएसए को रिमाइंडर भी भेजी गया था। इस दौरान शिक्षक भर्ती की जांच कर रहे अपर सांख्यिकी अधिकारी सुनील सिंह ने भी इसकी जांच की तो 29 में से चार शिक्षक ही फर्जी डिग्रियों की 3517 की सूची में मिले। अमर उजाला ने मामले को प्रमुखता के साथ उठाया था। फर्जी डिग्री के नाम पर फंसाए जा रहे शिक्षकों ने भी एडी बेसिक के आदेश के खिलाफ में मोर्चा खोल दिया था। जिलाधिकारी से लेकर कमिश्नर तक मामले की गुहार लगाई गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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इस बीच विभाग की ओर से भी लगातार शिक्षकों को जांच रिपोर्ट संशोधित होने की बात कह कर भ्रमित किया जाता रहा। चार दिन पहले एडी बेसिक योगेंद्र कुमार सिंह की ओर से बताया गया था कि हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है। इससे फंसे शिक्षकों को कुछ राहत मिली थी। लेकिन उनकी ये राहत भी मंगलवार को छू हो गई, बीएसए की ओर से आजमगढ़ के 13 शिक्षकों की सेवा समाप्ति और एफआईआर दर्ज कराने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया।
सभी शिक्षकों से नोटिस में कहा गया है कि एडी बेसिक की जांच में वो 3517 फर्जी डिग्रियों की सूची में मिले हैं। सबको कहा गया है कि एडी बेसिक की जांच रिपोर्ट के अनुसार क्यों न आपकी सेवा समाप्त करते हुए आपके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए। सभी शिक्षकों से एक सप्ताह के अंदर अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है। इससे शिक्षकों की सांसे अटकी हुई हैं। प्रशासनिक अधिकारियों से कोई सहायता न मिलते देख शिक्षकों ने कोर्ट जाने की तैयारी कर ली है।
बार-बार बयान बदल कर किया जा रहा भ्रमित
आजमगढ़। सहायक निदेश बेसिक कार्यालय से फंसे शिक्षकों को लगातार भ्रमित करने वाला बयान दिया गया। कार्यालय भी इस बात से परिचित है कि वो गलत आदेश कर फंस चुका है। उसे बचने का रास्ता नहीं सूझ रहा है। इस स्थिति में मीडिया और शिकायत को पहुंचने वाले शिक्षकों को कभी हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई रोकने तो कभी संशोधित सूची जारी करने की बात कही जा रही है। शिक्षक फतेह बहादुर और समर ने बताया कि जांच रिपोर्ट को तैयार करने वाले बाबू की ओर से 12 नवंबर के बाद संशोधित जांच रिपोर्ट मिलने की बात कही गई थी। इससे परेशान शिक्षक मारे-मारे फिर रहे हैं।
शिक्षकों की ओर से कमिश्नर से भी मामले की शिकायत की गई, लेकिन वहां से उन्हें कारण बताओ नोटिस में अपना पक्ष रखने को कहा गया। जिस कारण बताओ नोटिस में उन्हें फर्जी डिग्रियों की सूची में शामिल दिखा कर ये पूछा जा रहा है कि क्यों न आपकी सेवा समाप्त कर एफआईआर दर्ज कराई जाए, उसमें हम क्या लिखें की आपकी जांच रिपोर्ट गलत है। हम 3517 फर्जी डिग्रियों की सूची में शामिल नहीं हैं।
छह जिले में, शेष स्थानांतरित
आजमगढ़। बीएसए कार्यालय की ओर से जिन शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया है, उसमें नम्रता यादव, रामबृक्ष यादव, फतेज बहादुर यादव, राजेश प्रसाद, दीपक कुमार गुप्ता, शिव कुमार भारती जिले में कार्यरत हैं। इसके अलावा रितेष कुमार फिरोजाबाद, अजय कुमार फिरोजाबाद, राम कुमार बुलंदशहर, महेश कुमार बुलंदशहर, जगदेव सिंह इटावा, नीलम यादव देवरिया स्थानांतरित हो चुकी हैं। इनको नोटिस जारी करने के लिए वहां के बीएसए को लिखा गया है। एक संदिग्ध शिक्षिका मोनिका सिंह को भी नोटिस जारी की गई है।
एडी बेसिक की जांच रिपोर्ट के आधार पर जनपद से संबंधित शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया है। एक सप्ताह के भीतर उनसे जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. वीके शर्मा, प्रभारी बीएसए
हाईकोर्ट से मामले पर कार्रवाई किसी जिले के शिक्षकों स्टे मिलने की जानकारी मिली थी। यहां के शिक्षकों के भी कोर्ट जाने की बात पता चली थी। फिलहाल जांच रिपोर्ट पर बीएसए के स्तर से कार्रवाई होनी है। कार्रवाई पर मेरी ओर से कोई रोक नहीं लगाई गई है।
योगेंद्र कुमार, एडी बेसिक
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हाईकोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी ने जांच के बाद आगरा विवि से 2004-05 में जारी बीएड की डिग्रियों में 3517 को फर्जी और 1053 को टैंपर्ड घोषित किया गया था। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से इसकी सूची सभी एडी बेसिक को भेज अपने जिलों में इन डिग्री पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों पर विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। एडी बेसिक योगेंद्र कुमार की ओर से 10 नवंबर को सचिव और सभी बीएसए को भेजी जांच रिपोर्ट में मंडल के 29 शिक्षकों को फर्जी डिग्रियों की 3517 की सूची में बताते हुए सभी की सेवा समाप्ति और विविध कार्रवाई करने के आदेश दिए थे।
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15 नवंबर को कार्रवाई के बारे में सभी बीएसए को रिमाइंडर भी भेजी गया था। इस दौरान शिक्षक भर्ती की जांच कर रहे अपर सांख्यिकी अधिकारी सुनील सिंह ने भी इसकी जांच की तो 29 में से चार शिक्षक ही फर्जी डिग्रियों की 3517 की सूची में मिले। अमर उजाला ने मामले को प्रमुखता के साथ उठाया था। फर्जी डिग्री के नाम पर फंसाए जा रहे शिक्षकों ने भी एडी बेसिक के आदेश के खिलाफ में मोर्चा खोल दिया था। जिलाधिकारी से लेकर कमिश्नर तक मामले की गुहार लगाई गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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इस बीच विभाग की ओर से भी लगातार शिक्षकों को जांच रिपोर्ट संशोधित होने की बात कह कर भ्रमित किया जाता रहा। चार दिन पहले एडी बेसिक योगेंद्र कुमार सिंह की ओर से बताया गया था कि हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है। इससे फंसे शिक्षकों को कुछ राहत मिली थी। लेकिन उनकी ये राहत भी मंगलवार को छू हो गई, बीएसए की ओर से आजमगढ़ के 13 शिक्षकों की सेवा समाप्ति और एफआईआर दर्ज कराने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया।
सभी शिक्षकों से नोटिस में कहा गया है कि एडी बेसिक की जांच में वो 3517 फर्जी डिग्रियों की सूची में मिले हैं। सबको कहा गया है कि एडी बेसिक की जांच रिपोर्ट के अनुसार क्यों न आपकी सेवा समाप्त करते हुए आपके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए। सभी शिक्षकों से एक सप्ताह के अंदर अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है। इससे शिक्षकों की सांसे अटकी हुई हैं। प्रशासनिक अधिकारियों से कोई सहायता न मिलते देख शिक्षकों ने कोर्ट जाने की तैयारी कर ली है।
बार-बार बयान बदल कर किया जा रहा भ्रमित
आजमगढ़। सहायक निदेश बेसिक कार्यालय से फंसे शिक्षकों को लगातार भ्रमित करने वाला बयान दिया गया। कार्यालय भी इस बात से परिचित है कि वो गलत आदेश कर फंस चुका है। उसे बचने का रास्ता नहीं सूझ रहा है। इस स्थिति में मीडिया और शिकायत को पहुंचने वाले शिक्षकों को कभी हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई रोकने तो कभी संशोधित सूची जारी करने की बात कही जा रही है। शिक्षक फतेह बहादुर और समर ने बताया कि जांच रिपोर्ट को तैयार करने वाले बाबू की ओर से 12 नवंबर के बाद संशोधित जांच रिपोर्ट मिलने की बात कही गई थी। इससे परेशान शिक्षक मारे-मारे फिर रहे हैं।
शिक्षकों की ओर से कमिश्नर से भी मामले की शिकायत की गई, लेकिन वहां से उन्हें कारण बताओ नोटिस में अपना पक्ष रखने को कहा गया। जिस कारण बताओ नोटिस में उन्हें फर्जी डिग्रियों की सूची में शामिल दिखा कर ये पूछा जा रहा है कि क्यों न आपकी सेवा समाप्त कर एफआईआर दर्ज कराई जाए, उसमें हम क्या लिखें की आपकी जांच रिपोर्ट गलत है। हम 3517 फर्जी डिग्रियों की सूची में शामिल नहीं हैं।
छह जिले में, शेष स्थानांतरित
आजमगढ़। बीएसए कार्यालय की ओर से जिन शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया है, उसमें नम्रता यादव, रामबृक्ष यादव, फतेज बहादुर यादव, राजेश प्रसाद, दीपक कुमार गुप्ता, शिव कुमार भारती जिले में कार्यरत हैं। इसके अलावा रितेष कुमार फिरोजाबाद, अजय कुमार फिरोजाबाद, राम कुमार बुलंदशहर, महेश कुमार बुलंदशहर, जगदेव सिंह इटावा, नीलम यादव देवरिया स्थानांतरित हो चुकी हैं। इनको नोटिस जारी करने के लिए वहां के बीएसए को लिखा गया है। एक संदिग्ध शिक्षिका मोनिका सिंह को भी नोटिस जारी की गई है।
एडी बेसिक की जांच रिपोर्ट के आधार पर जनपद से संबंधित शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया है। एक सप्ताह के भीतर उनसे जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. वीके शर्मा, प्रभारी बीएसए
हाईकोर्ट से मामले पर कार्रवाई किसी जिले के शिक्षकों स्टे मिलने की जानकारी मिली थी। यहां के शिक्षकों के भी कोर्ट जाने की बात पता चली थी। फिलहाल जांच रिपोर्ट पर बीएसए के स्तर से कार्रवाई होनी है। कार्रवाई पर मेरी ओर से कोई रोक नहीं लगाई गई है।
योगेंद्र कुमार, एडी बेसिक