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गीत चतुर्वेदी को कृष्ण प्रताप कथा सम्मान
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Sun, 28 Feb 2016 11:53 PM IST
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जोकहरा स्थित श्रीरामानंद सरस्वती पुस्तकालय में आयोजित सम्मान समारोह मेें पिंक स्लिप डैडी के कथाकार और लेखक गीत चतुर्वेदी को साहित्यकार और आलोचक भारत भारद्वाज ने कृष्ण प्रताप कथा सम्मान 2015 से सम्मानित किया।
गीत चतुर्वेदी ने कहा कि दुनिया के सारे लेखक जब मरते है तो वह एक किताब बन जाते हैं। पुस्तकालय की डायरेक्टर हिना देसाई ने आभार प्रकट किया। अध्यक्षता भारत भारद्वाज और संचालन प्रो. संतोष भदौरिया ने किया। मौके पर विभूति नारायण राय, नरेंद्र पुंडरिक, डा. नीरज खरे, डा. प्रभाकर सिंह आदि मौजूद थे।
जोकहरा स्थित श्री रामानंद सरस्वती पुस्तकालय में रविवार को आयोजित हिंदी कहानी सौ साल पुरानी विषय पर संगोष्ठी में साहित्यकार और आलोचक भारत भारद्वाज ने कहा कि ब्रजभाषा में जो हिंदी कविता लिखी जा रही थी, भारतेंदु युग के बाद उसका स्वरूप खड़ी बोली में हो गया।
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कहानी का आरंभ सरस्वती पत्रिका के जून 1915 के अंक में प्रकाशित चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी 'उसने कहा था से माना जाता है। पूर्व डीजीपी व साहित्यकार विभूति नारायण राय ने कहा कि 'उसने कहा था की तुलना विश्व की समृद्धतम भाषाओं के कथा साहित्य से की जा सकती है। गोष्ठी को प्रवीण शेखर, डा. संजय श्रीवास्तव, डा. नीरज खरे, डा. प्रभाकर सिंह, जयप्रकाश धुमकेतु आदि ने संबोधित किया।
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गीत चतुर्वेदी ने कहा कि दुनिया के सारे लेखक जब मरते है तो वह एक किताब बन जाते हैं। पुस्तकालय की डायरेक्टर हिना देसाई ने आभार प्रकट किया। अध्यक्षता भारत भारद्वाज और संचालन प्रो. संतोष भदौरिया ने किया। मौके पर विभूति नारायण राय, नरेंद्र पुंडरिक, डा. नीरज खरे, डा. प्रभाकर सिंह आदि मौजूद थे।
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जोकहरा स्थित श्री रामानंद सरस्वती पुस्तकालय में रविवार को आयोजित हिंदी कहानी सौ साल पुरानी विषय पर संगोष्ठी में साहित्यकार और आलोचक भारत भारद्वाज ने कहा कि ब्रजभाषा में जो हिंदी कविता लिखी जा रही थी, भारतेंदु युग के बाद उसका स्वरूप खड़ी बोली में हो गया।
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कहानी का आरंभ सरस्वती पत्रिका के जून 1915 के अंक में प्रकाशित चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी 'उसने कहा था से माना जाता है। पूर्व डीजीपी व साहित्यकार विभूति नारायण राय ने कहा कि 'उसने कहा था की तुलना विश्व की समृद्धतम भाषाओं के कथा साहित्य से की जा सकती है। गोष्ठी को प्रवीण शेखर, डा. संजय श्रीवास्तव, डा. नीरज खरे, डा. प्रभाकर सिंह, जयप्रकाश धुमकेतु आदि ने संबोधित किया।