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परिषदीय स्कूलों में समन्वयकों के पद खत्म, अब तैनात होंगे एआरपी
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आजमगढ़। परिषदीय विद्यालयों की निगरानी की कमान अब एनपीआरसी व बीआरसी समन्वयक के स्थान पर एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) की होगी। जिले में तैनात समन्वयकों को हटा दिया गया है और उनके स्थान पर एआरपी की तैनाती होगी। सीडीओ के नेतृत्व में बनी टीम एआरपी के चयन के लिए परीक्षा कराएगी। बेसिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार द्वारा जारी शासनादेश के बाद विभाग इनकी तैनाती में जुट गया है।
परिषदीय स्कूलों पर नजर रखने के लिए अब तक न्याय पंचायत स्तर पर समन्वयक व बीआरसी पर सह समन्वयकों की तैनाती थी। इन पदों पर शिक्षक ही तैनात होते थे। शासन ने अब समन्वयकों के स्थान पर एकेडमिक रिसोर्स पर्सन की तैनाती का निर्णय लिया है। एआरपी की तैनाती के लिए शासन ने कोई नया पद सृजित नहीं किया है बल्कि वर्तमान में कार्यरत समन्वयकों के स्वीकृत पदों में से ही इसे समाहित किया है। हर ब्लॉक पर छह एआरपी की तैनाती की जाएगी। इनमें एक एआरपी समाजशास्त्र, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान, सैन्य विज्ञान, सांख्यिकी और कृषि से किया जायेगा तो वहीं एक-एक एआरपी हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान विषय से होंगे। जिले में वर्तमान में 409 समन्वयकों के पद सृजित हैं, जिसके सापेक्ष 394 समन्वयक तैनात थे। बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय ने शासनादेश के अनुरूप इन्हें हटा दिया है। अब ये समन्वयक अपने तैनाती स्थलों के विद्यालयों पर पठन-पाठन का कार्य करेंगे।
लिखित परीक्षा और साक्षात्कार से होगा चयन
एआरपी के चयन के लिए मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तर पर समिति गठित की जाएगी। इसमें डायट प्राचार्य, बीएसए, जिला समन्वयक प्रशिक्षण व वरिष्ठ खंड शिक्षा अधिकारी सदस्य होंगे। समिति एआरपी चयन के लिए आवेदन आमंत्रित करने के साथ ही विषयवार लिखित परीक्षा कराएगी। प्रश्न पत्र तैयार कराने और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की व्यवस्था भी करेगी। विषयवार माइक्रो टीचिंग प्रदर्शन के लिए मूल्यांकन समिति गठित की जाएगी। लिखित परीक्षा 60 अंक की होगी। माइक्रो टीचिंग शिक्षण प्रदर्शन के 30 अंक व साक्षात्कार के 10 अंक होंगे। लिखित परीक्षा में 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले ही साक्षात्कार के लिए पात्र होंगे। साक्षात्कार में 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने की अर्हता होगी। चयनित एआरपी की मेरिट तैयार की जायेगी, इसके पश्चात काउंसिलिंग के माध्यम से मेरिट या वरिष्ठता के आधार पर उन्हें तैनात किया जायेगा।
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एक से तीन वर्ष होगा कार्यकाल
एआरपी का कार्यकाल एक साल का होगा। हर साल उनकी योग्यता के आधार पर जिलास्तरीय चयन समिति की संस्तुति पर उनका नवीनीकरण किया जायेगा। कोई भी एआरपी अधिकतम तीन वर्ष तक ही इस पद पर रह सकेगा। एआरपी को स्कूलों का पर्यवेक्षण करने के लिए हर माह ढाई हजार रुपये का वाहन भत्ता दिया जायेगा। एआरपी का वार्षिक मूल्यांकन बीएसए व डायट प्राचार्य द्वारा गठित समिति करेगी।
यह होगी एआरपी की जिम्मेदारी
एआरपी को हर माह की 28 तारीख को अगले महीने की कार्ययोजना और भ्रमण कार्यक्रम जिला समन्वयक के माध्यम से बीएसए व डायट प्राचार्य को प्रस्तुत करना होगा। एआरपी को हर माह कम से कम 30 स्कूलों व कस्तूरबा के दो स्कूलों का प्रेरणा एप के माध्यम से ऑनलाइन सुपर विजन करना होगा। एआरपी लर्निंग आउटकम पर आधारित बच्चों के अधिगम स्तर का आंकलन डेटा भी फीड कराएंगे। इन्हें विद्यालयवार व छात्रवार उपलब्धि रिपोर्ट भी देनी होगी। इसके साथ ही विद्यालय निरीक्षण के दौरान संवेदनशील मुद्दों लैंगिक समता-समानता, जीवन कौशल, शिक्षा, पर्यावरण संवेदना, सड़क सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, आत्मरक्षा और बाल अधिकार पर इन्हें विचार विमर्श करना होगा। इसके साथ ही जिले में शैक्षिक गुणवत्ता में बढ़ोतरी, शैक्षिक वातावरण के निर्माण के लिए कार्यशाला, प्रशिक्षण, सेमिनार, प्रतियोगिता व रैलियों का आयोजन करेंगे।
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परिषदीय स्कूलों पर नजर रखने के लिए अब तक न्याय पंचायत स्तर पर समन्वयक व बीआरसी पर सह समन्वयकों की तैनाती थी। इन पदों पर शिक्षक ही तैनात होते थे। शासन ने अब समन्वयकों के स्थान पर एकेडमिक रिसोर्स पर्सन की तैनाती का निर्णय लिया है। एआरपी की तैनाती के लिए शासन ने कोई नया पद सृजित नहीं किया है बल्कि वर्तमान में कार्यरत समन्वयकों के स्वीकृत पदों में से ही इसे समाहित किया है। हर ब्लॉक पर छह एआरपी की तैनाती की जाएगी। इनमें एक एआरपी समाजशास्त्र, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान, सैन्य विज्ञान, सांख्यिकी और कृषि से किया जायेगा तो वहीं एक-एक एआरपी हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान विषय से होंगे। जिले में वर्तमान में 409 समन्वयकों के पद सृजित हैं, जिसके सापेक्ष 394 समन्वयक तैनात थे। बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय ने शासनादेश के अनुरूप इन्हें हटा दिया है। अब ये समन्वयक अपने तैनाती स्थलों के विद्यालयों पर पठन-पाठन का कार्य करेंगे।
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लिखित परीक्षा और साक्षात्कार से होगा चयन
एआरपी के चयन के लिए मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तर पर समिति गठित की जाएगी। इसमें डायट प्राचार्य, बीएसए, जिला समन्वयक प्रशिक्षण व वरिष्ठ खंड शिक्षा अधिकारी सदस्य होंगे। समिति एआरपी चयन के लिए आवेदन आमंत्रित करने के साथ ही विषयवार लिखित परीक्षा कराएगी। प्रश्न पत्र तैयार कराने और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की व्यवस्था भी करेगी। विषयवार माइक्रो टीचिंग प्रदर्शन के लिए मूल्यांकन समिति गठित की जाएगी। लिखित परीक्षा 60 अंक की होगी। माइक्रो टीचिंग शिक्षण प्रदर्शन के 30 अंक व साक्षात्कार के 10 अंक होंगे। लिखित परीक्षा में 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले ही साक्षात्कार के लिए पात्र होंगे। साक्षात्कार में 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने की अर्हता होगी। चयनित एआरपी की मेरिट तैयार की जायेगी, इसके पश्चात काउंसिलिंग के माध्यम से मेरिट या वरिष्ठता के आधार पर उन्हें तैनात किया जायेगा।
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एक से तीन वर्ष होगा कार्यकाल
एआरपी का कार्यकाल एक साल का होगा। हर साल उनकी योग्यता के आधार पर जिलास्तरीय चयन समिति की संस्तुति पर उनका नवीनीकरण किया जायेगा। कोई भी एआरपी अधिकतम तीन वर्ष तक ही इस पद पर रह सकेगा। एआरपी को स्कूलों का पर्यवेक्षण करने के लिए हर माह ढाई हजार रुपये का वाहन भत्ता दिया जायेगा। एआरपी का वार्षिक मूल्यांकन बीएसए व डायट प्राचार्य द्वारा गठित समिति करेगी।
यह होगी एआरपी की जिम्मेदारी
एआरपी को हर माह की 28 तारीख को अगले महीने की कार्ययोजना और भ्रमण कार्यक्रम जिला समन्वयक के माध्यम से बीएसए व डायट प्राचार्य को प्रस्तुत करना होगा। एआरपी को हर माह कम से कम 30 स्कूलों व कस्तूरबा के दो स्कूलों का प्रेरणा एप के माध्यम से ऑनलाइन सुपर विजन करना होगा। एआरपी लर्निंग आउटकम पर आधारित बच्चों के अधिगम स्तर का आंकलन डेटा भी फीड कराएंगे। इन्हें विद्यालयवार व छात्रवार उपलब्धि रिपोर्ट भी देनी होगी। इसके साथ ही विद्यालय निरीक्षण के दौरान संवेदनशील मुद्दों लैंगिक समता-समानता, जीवन कौशल, शिक्षा, पर्यावरण संवेदना, सड़क सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, आत्मरक्षा और बाल अधिकार पर इन्हें विचार विमर्श करना होगा। इसके साथ ही जिले में शैक्षिक गुणवत्ता में बढ़ोतरी, शैक्षिक वातावरण के निर्माण के लिए कार्यशाला, प्रशिक्षण, सेमिनार, प्रतियोगिता व रैलियों का आयोजन करेंगे।