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24 घंटे के सफर में भूख व प्यास से तड़पे लोग, किराया भी वसूला

Fri, 08 May 2020 10:06 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2020 10:06 PM IST
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People suffering from hunger and thirst in 24-hour journey, also charged fare
सूरत से आई ट्रेन से आजमगढ़ रेलवे स्टेशन पर पहुंचे यात्री। - फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। सूरत से 24 घंटे का समय तय कर पहुंची श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार यात्रियों का काफी बुरा हाल रहा। पूरे रास्ते इन्हें न तो कुछ खाने को ही दिया गया न ही पीने के पानी की ही कोई व्यवस्था की गई। वहीं इन यात्रियों से सूरत से आजमगढ़ का पूरा किराया भी वसूला गया।
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केंद्र सरकार श्रमिकों को उनके घर पहुंचाने के लिए स्पेशल श्रमिक ट्रेन चलवाया है। सरकार व रेलवे का दावा है कि यात्रियों से कोई किराया नहीं लिया जा रहा है। लेकिन शुक्रवार को गुजरात के सूरत से जिले में पहुंची ट्रेन में सवार यात्रियों के लिए सरकार का दवा पूरी तरह से हवा-हवाई ही साबित हुआ है। इसमें सवार हुए यात्रियों से सूरत स्टेशन पर ही टिकट देने के साथ ही 745 रुपये लिए गए तो वहीं रास्ते में इन श्रमिकों के भोजन व पानी का कोई इंतजाम नहीं किया गया था। ट्रेन बृहस्पतिवार को शाम साढ़े पांच बजे सूरत से चली थी और शुक्रवार की शाम साढ़े चार बजे आजमगढ़ पहुंची। स्टेशन पर पहुंचे यात्री भूख व प्यास से तड़प रहे थे। जिला प्रशासन ने इन्हें तत्काल लंच पैकेट व पानी मुहैया कराया।
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गुजरात सरकार ने हमारे साथ काफी बुरा व्यवहार किया। 22 मार्च को लॉक डाउन लगने के बाद से ही काम धंधा बंद हो गया। 40 दिनों से हम किसी तरह वहां जीवन यापन कर रहे थे। सरकार ने न तो आर्थिक मदद ही मुहैया करायी न ही राशन आदि ही दिया गया। वहीं ट्रेन में भोजन तो दूर पीने के लिए पानी तक नहीं मुहैया कराया गया था।
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राम विनय निषाद, चांदपट्टी, रौनापार।
सूरत स्टेशन पर हम सुबह से ही भुखे प्यासे पहुंच गए थे। शाम साढ़े पांच बजे ट्रेन चला लेकिन कहीं भी भोजन-पानी नहीं उपलब्ध कराया गया। सबसे बड़ी बात तो यह है कि गुजरात सरकार ने हमसे सूरत से आजमगढ़ का पूरा भाड़ा 745 रुपये टिकट के रूप में वसूल किया। बड़ों के साथ ही बच्चें तो भुख से पूरे रास्ते बिलबिलाते रहे।
गुड्डी, बड़हलगंज, गोरखपुर।
सरकार भले ही यह दावा कर रही हो कि श्रमिक स्पेशल ट्रेन में यात्रियों से पैसा नहीं लिया जाएगा लेकिन हमसे तो पूरा 745 रुपये भाड़ा सूरत स्टेशन पर ही वसूल कर लिया गया। रास्ते में भोजन पानी देने का दावा भी किया गया था लेकिन पूरे रास्ते कहीं भी न तो पानी दिया गया न ही भोजन ही उपलब्ध कराया गया। बड़ा मुश्किल भरा सफर रहा।

शशि, बद्दोपुर, शहर कोतवाली।
क्या बताएं कितनी परेशानी झेल कर हम अपने घर पहुंचे है। ट्रेन से उतरने के बाद तो जैसे बहुत राहत मिली है। हमें मालूम होता कि इस ट्रेन में किराया देने के बाद भी इतनी परेशानी होगी तो हम नहीं चढ़े होते। भूख-प्यास से बच्चें बिलबिला गए है। खान तो दूर पीने के पानी की भी कोई व्यवस्था ट्रेन में अथवा स्टेशन पर नहीं की गई थी।
दीनानाथ, आझौली, मुबारकपुर।

सूरत से आई ट्रेन से आजमगढ़ रेलवे स्टेशन पर पहुंचे मजदूर।

सूरत से आई ट्रेन से आजमगढ़ रेलवे स्टेशन पर पहुंचे मजदूर।- फोटो : AZAMGARH

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