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Azamgarh News: हरिऔध जी की प्रतिमा की सफाई कर दी श्रद्धांजलि

Tue, 17 Mar 2026 01:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 17 Mar 2026 01:27 AM IST
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Paid tribute by cleaning the statue of Hariaudh ji
हरिऔध जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते लोग
निजामाबाद। नगर पंचायत क्षेत्र के बाईपास तिराहे पर स्थित महान हिंदी साहित्यकार अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘ हरिऔध ’ की प्रतिमा पर सोमवार को उनकी पुण्यतिथि श्रद्धा व सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर क्षेत्र के पत्रकारों और संभ्रांत नागरिकों ने प्रतिमा की साफ-सफाई कर माल्यार्पण करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किया। वक्ताओं ने कहा कि महाकवि हरिऔध की रचनाएं हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। उनकी सैकड़ों कविताएं कक्षा एक से लेकर एमए तक के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाती हैं और उनकी साहित्यिक कृतियों के कारण उन्हें देश-विदेश में पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि निजामाबाद, जो महाकवि हरिऔध की जन्मस्थली है, वहां केवल उनकी एक प्रतिमा स्थापित है और वह भी उपेक्षा का शिकार हो रही है। लोगों ने जिला प्रशासन से निजामाबाद में महाकवि हरिऔध के नाम पर संग्रहालय और लाइब्रेरी स्थापित कराने की मांग उठाई। साथ ही निर्णय लिया कि महाकवि की समस्त काव्य रचनाओं को संकलित कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष व विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक को ज्ञापन सौंपा जाएगा। संवाद
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हिंदी खड़ी बोली के प्रमुख प्रवर्तक थे ‘हरिऔध’-रानी की सराय। हिंदी खड़ी बोली के जनक एवं कवि सम्राट अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की पुण्यतिथि सोमवार को श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर हरिऔध जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनकी साहित्यिक कृतियों पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि कवि सम्राट अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ हिंदी खड़ी बोली के प्रमुख प्रवर्तक थे। उन्होंने अपने संघर्ष, संकल्प और साहित्य साधना के बल पर हिंदी साहित्य में विशिष्ट पहचान बनाई। कहा कि हरिऔध जी ने खड़ी बोली के माध्यम से पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक के लोगों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया। वक्ताओं ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि निजामाबाद स्थित हरिऔध जी की जन्मस्थली आज खंडहर में तब्दील हो चुकी है और नगर में स्थापित उनकी प्रतिमा भी उपेक्षा का शिकार है। मांग की कि हरिऔध जी की जन्मस्थली पर एक भव्य स्मारक का निर्माण कराया जाए तथा नगर में एक बड़ा पुस्तकालय स्थापित किया जाए। इस अवसर पर राष्ट्रीय पहलवान अमरजीत यादव, अरविंद यादव, हंसराज चंद्रदेव, डॉ. आदित्य सिंह, रामप्रवेश, मिथिलेश, मनोज पांडेय, चंद्रशेखर, संतोष, जियालाल आदि उपस्थित रहे।
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