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Azamgarh News: साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन
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04 हिंदी पखवाड़ा पर मारवाड़ी धर्मशाला में हिंदी-उर्दू साहित्य मंच की साहित्यिक गोष्ठी। श्रोत-आय
आजमगढ़। हिंदी पखवाड़ा के अवसर पर नगर के मारवाड़ी धर्मशाला में हिंदी-उर्दू साहित्य मंच की ओर से सोमवार की शाम साहित्यिक गोष्ठी हुई।
अध्यक्षता राष्ट्रीय कवि ईश्वर चंद्र त्रिपाठी ने की। उन्होेंने अपनी रचना - पतझड़ का दर्द क्या है, बहारों को क्या पता, कीचड़ में किसके पांव सितारों को क्या पता... सुनाई। संस्था के अध्यक्ष शायर ताज आजमी ने - हिंदी है मेरी जान तो हिंदुस्तान है... प्रस्तुत किया। संचालन संस्था के मुख्य संरक्षक संजय कुमार पांडेय सरस ने किया। उन्होंने अपना मुक्तक प्यार का आशियां जल न जाए, कहीं बढ़ रही दूरियों को मिटा दीजिए... सुनाया। वहीं, विजेंद्र श्रीवास्तव करुण ने - फूल गए काम कठी बरसात ने ... पेश किया। घनश्याम यादव और जेपी सिंह ने भी काव्यपाठ किया।
मुख्य विकास अधिकारी परीक्षित खटाना ने गोष्ठी की शुरूआत करते हुए कहा कि हिंदी हमारे देश का गौरव है। इसे जन-जन से जोड़ना हम सभी का दायित्व है। विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष विजय यादव ने साहित्यिक कार्यक्रमों को सहयोग देने का आश्वासन दिया। कवि सुभाष चंद्र तिवारी कुंदन ने कहा कि संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया था, लेकिन आज भी यह पूरे देश की सरकारी कामकाज की भाषा नहीं बन पाई है। उन्होंने जिले के साहित्यकार आचार्य चंद्रबली पांडेय के योगदान को याद करते हुए हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
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अध्यक्षता राष्ट्रीय कवि ईश्वर चंद्र त्रिपाठी ने की। उन्होेंने अपनी रचना - पतझड़ का दर्द क्या है, बहारों को क्या पता, कीचड़ में किसके पांव सितारों को क्या पता... सुनाई। संस्था के अध्यक्ष शायर ताज आजमी ने - हिंदी है मेरी जान तो हिंदुस्तान है... प्रस्तुत किया। संचालन संस्था के मुख्य संरक्षक संजय कुमार पांडेय सरस ने किया। उन्होंने अपना मुक्तक प्यार का आशियां जल न जाए, कहीं बढ़ रही दूरियों को मिटा दीजिए... सुनाया। वहीं, विजेंद्र श्रीवास्तव करुण ने - फूल गए काम कठी बरसात ने ... पेश किया। घनश्याम यादव और जेपी सिंह ने भी काव्यपाठ किया।
मुख्य विकास अधिकारी परीक्षित खटाना ने गोष्ठी की शुरूआत करते हुए कहा कि हिंदी हमारे देश का गौरव है। इसे जन-जन से जोड़ना हम सभी का दायित्व है। विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष विजय यादव ने साहित्यिक कार्यक्रमों को सहयोग देने का आश्वासन दिया। कवि सुभाष चंद्र तिवारी कुंदन ने कहा कि संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया था, लेकिन आज भी यह पूरे देश की सरकारी कामकाज की भाषा नहीं बन पाई है। उन्होंने जिले के साहित्यकार आचार्य चंद्रबली पांडेय के योगदान को याद करते हुए हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
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