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ऑपरेशन कायाकल्प: कॉन्वेंट स्कूल को मात दे रहा प्राथमिक विद्यालय, AC रूम में लैपटॉप से पढ़ रहे बच्चे; जानें खास

Thu, 24 Jul 2025 12:07 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 24 Jul 2025 12:07 AM IST
सार

Azamgarh News: इस विद्यालय की कक्षाओं में प्रोजेक्टर लगाया गया है। वाई फाई से लैस डिजिटल लाइब्रेरी बनाई गई है, जहां पर विद्यालय के बच्चे और गांव के युवक आकर कर अध्ययन कर रहे हैं।

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Operation Kayakalp Primary school is beating convent school children are studying on laptops in AC
प्राथमिक विद्यालय बासूपार में बदल गई व्यवस्था। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Operation Kayakalp: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देशों के तहत 'ऑपरेशन कायाकल्प' योजना ने उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर और तकदीर बदलनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में आजमगढ़ जिले के सगड़ी तहसील स्थित प्राथमिक विद्यालय बासूपार का कायाकल्प इतना भव्य और प्रभावशाली हुआ है कि यह जिलेभर में चर्चा का विषय बन गया है।

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अजमतगढ ब्लाक का बासूपार बनकट विद्यालय अत्याधिक सुविधाओं से लैस है। ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि मनीष मिश्र एवं प्रधान प्रतिनिधि वहाब खान और विद्यालय के प्रधानाध्यापक धनंजय मिश्र के प्रयास से पूरे विद्यालय को आकर्षक ढंग से सजाया गया है, कमरे में एसी की व्यवस्था की गई है, बच्चों को बैठने के लिए डेस्क और ब्रेंच की व्यवस्था है। 
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हर क्लास रूम सीसी कैमरा लगाया गया है। ताकि बच्चों की निगरानी की जा सके कि बच्चे किस तरह से पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं बच्चों के अभिभावकों के मोबाइल से सीसीटीवी कैमरा को लिंक किया गया है। ताकि अभिभावक यह जान सकें कि हमारा बच्चा क्लास में पढ़ रहा है कि नहीं। वहीं रसोई घर को आधुनिक बनाया गया है। बच्चों के खाने के लिए ड्राइंग टेबल लगाया गया, जहां बच्चे बैठकर की भोजन करते हैं। 

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Operation Kayakalp Primary school is beating convent school children are studying on laptops in AC
प्राथमिक विद्यालय बासूपार का हुआ कायाकल्प। - फोटो : अमर उजाला

विद्यालय परिसर में बच्चों को झूलने के लिए झूला लगाया गया है। जिसका बच्चे आनंद उठा रहे हैं। कमरे में टाइल्स और एसीपी लगाई गई है। विद्यालय परिसर में इंटरलाकिंग की गई है। दीवारों पर महापुरुषों के चित्र बनाए गए हैं। ज्ञान से संबंधित स्लोगन लिखा गया है। बच्चों को पानी पीने के लिए आरओ लगाया गया। विद्यालय का आकर्षण ढंग से सजाया गया है।

करीब 25 लाख रुपये की लागत से बना यह हाईटेक विद्यालय अब किसी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं दिखता। पहले जहां इस स्कूल में 55 बच्चे थे, अब उनकी संख्या 90 से अधिक हो गई है। स्कूल की सुंदरता, सुविधाएं और स्मार्ट व्यवस्थाएं बच्चों के साथ अभिभावकों को भी खूब लुभा रही हैं।

करीब 25 लाख रुपये की लागत से बना यह हाईटेक विद्यालय अब किसी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं दिखता। पहले जहां इस स्कूल में 55 बच्चे थे, अब उनकी संख्या 90 से अधिक हो गई है। स्कूल की सुंदरता, सुविधाएं और स्मार्ट व्यवस्थाएं बच्चों के साथ अभिभावकों को भी खूब लुभा रही हैं।

खेल-कूद और व्यावहारिक शिक्षा पर भी फोकस
विद्यालय में बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को ध्यान में रखते हुए खेलकूद की विशेष व्यवस्था की गई है। वैज्ञानिक प्रयोग और प्रायोगिक शिक्षा के माध्यम से छात्र अब ज्ञान को केवल पढ़कर नहीं, बल्कि करके भी सीख रहे हैं।

Operation Kayakalp Primary school is beating convent school children are studying on laptops in AC
खेलकूद की नई मशीने पाकर खिल उठे बच्चे। - फोटो : अमर उजाला

प्रकृति के साथ संतुलन भी मिसाल
स्कूल निर्माण के दौरान किसी भी पेड़ को नहीं काटा गया, बल्कि परिसर में अधिक से अधिक पौधारोपण किया गया। इससे छात्रों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव भी विकसित होगा।

ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अब्दुल वहाब खान ने बताया कि मैं भी प्राथमिक विद्यालय से पढ़ा हूं, जब मैं प्रधान बना तो मेरे मन में जिज्ञासा हुई, कि बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ रहे हैं। जिसके लिए मैंने ग्राम निधि से बच्चों को बैठने के लिए डेस्क ब्रेंच बनवाया,  एसी लगवाया। हर कमरे का टाइलीकरण कराया गया है, डिजिटल लाइब्रेरी बनाई गई है जो वाई फाई से युक्त है,हर कैमरे में सीसी कैमरा लगाया है। बच्चों को झूलने के लिए झूला लगाया गया है। बच्चों को खाने के लिए ड्राइंग टेबल बनाया गया है।

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक धनंजय मिश्रा ने बताया कि मेरे मन में हमेशा जिज्ञासा रहती थी कि इस विद्यालय को कैसे सजाया जाए और सुसज्जित किया जाए ताकि एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। जिसका नतीजा है कि आज यह विद्यालय मॉडल के रूप में विकसित किया गया, विद्यालय सारी सुविधाओं से लैस है।

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