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ओडीएफ प्लस गांव स्वच्छता के साथ बढ़ाएंगे ग्राम पंचायत की आमदनी
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आजमगढ़। जिले की ग्राम पंचायतों के ओडीएफ होने के बाद पंचायत राज विभाग ने ओडीएफ प्लस की तरफ कदम आगे बढ़ा दिए हैं। इससे जहां गांवों की स्वच्छता बेहतर होगी तो वहीं ग्राम पंचायतों की आमदनी भी शुरू हो जाएगी। इसके तहत गांवों में कूड़ा निस्तारण का इंतजाम होगा, जहां जैविक एवं प्लास्टिक कूड़े को अलग-अलग किया जाएगा। इसमें जैविक कूड़े से खाद बनाई जाएगी, जबकि प्लास्टिक और अन्य पदार्थों को बेच दिया जाएगा। इससे मिलने वाले रुपये भी गांव के विकास पर खर्च होंगे।
ग्राम पंचायतें किस प्रकार ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन के जरिए अपनी आय बढ़ा सकती हैं, इसका मूलमंत्र उन्हें समझाया जा सके इसके लिए सरकार की ओर से ओडीएफ प्लस अभियान को स्वच्छ भारत मिशन से जोड़ा गया है। अब तक स्वच्छ भारत मिशन से केवल ओडीएफ गांव अर्थात खुले में शौच से मुक्त गांव ही घोषित थे, लेकिन अब गांव की गंदगी को गांव में निस्तारित करने का फार्मूला ओडीएफ प्लस गांव के जरिए दिया है। इसके तहत हर घर के गंदे पानी का सही निस्तारण, गीले व सूखे कचरे के जरिए जैविक खाद बनाना, हर घर शौचालय का शत-प्रतिशत उपयोग, गांव में गोवर्धन योजना लागू कर पशुओं के गोबर के उत्पाद बनाना जैसे कार्य कराए जाएंगे। इस दौरान गांव को प्लास्टिक मुक्त बनाया जाएगा। जिले की बात की जाए तो जिले में 1858 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से अभी 89 गांवों का चयन किया गया ह। ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। कुछ चल भी रहा है।
ओडीएफ प्लस गांव बनाने के लिए यह काम करने होंगे
- सिंगल यूज प्लास्टिक को एकत्र करना व उसको अलग करना।
- सामुदायिक भवनों में साफ-सफाई एवं पुताई का काम श्रमदान के जरिए करना व कराना।
- श्रमदान कर गांव की खाली जमीनों पर पौधरोपण करना और कराना।
- गंदगी मुक्त भारत के प्रचार प्रसार के लिए ऑनलाइन निबंध प्रतियोगिताएं।
- ओडीएफ प्लस गांवों की अवधारणा ग्रामीणों के मन मस्तिष्क में डालना।
जिला पंचायत राज अधिकारी लालजी दुबे ने बताया कि जिले को ओडीएफ घोषित कराने के बाद अब ओडीएफ प्लस बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके तहत हर गांव में सामुदायिक शौचालय और हर गांव में कूड़ा निस्तारण का इंतजाम होगा। इससे ग्राम पंचायतों की आय भी शुरू हो जाएगी, जिसे गांव के विकास पर ही खर्च किया जा सकेगा।
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ग्राम पंचायतें किस प्रकार ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन के जरिए अपनी आय बढ़ा सकती हैं, इसका मूलमंत्र उन्हें समझाया जा सके इसके लिए सरकार की ओर से ओडीएफ प्लस अभियान को स्वच्छ भारत मिशन से जोड़ा गया है। अब तक स्वच्छ भारत मिशन से केवल ओडीएफ गांव अर्थात खुले में शौच से मुक्त गांव ही घोषित थे, लेकिन अब गांव की गंदगी को गांव में निस्तारित करने का फार्मूला ओडीएफ प्लस गांव के जरिए दिया है। इसके तहत हर घर के गंदे पानी का सही निस्तारण, गीले व सूखे कचरे के जरिए जैविक खाद बनाना, हर घर शौचालय का शत-प्रतिशत उपयोग, गांव में गोवर्धन योजना लागू कर पशुओं के गोबर के उत्पाद बनाना जैसे कार्य कराए जाएंगे। इस दौरान गांव को प्लास्टिक मुक्त बनाया जाएगा। जिले की बात की जाए तो जिले में 1858 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से अभी 89 गांवों का चयन किया गया ह। ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। कुछ चल भी रहा है।
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ओडीएफ प्लस गांव बनाने के लिए यह काम करने होंगे
- सिंगल यूज प्लास्टिक को एकत्र करना व उसको अलग करना।
- सामुदायिक भवनों में साफ-सफाई एवं पुताई का काम श्रमदान के जरिए करना व कराना।
- श्रमदान कर गांव की खाली जमीनों पर पौधरोपण करना और कराना।
- गंदगी मुक्त भारत के प्रचार प्रसार के लिए ऑनलाइन निबंध प्रतियोगिताएं।
- ओडीएफ प्लस गांवों की अवधारणा ग्रामीणों के मन मस्तिष्क में डालना।
जिला पंचायत राज अधिकारी लालजी दुबे ने बताया कि जिले को ओडीएफ घोषित कराने के बाद अब ओडीएफ प्लस बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके तहत हर गांव में सामुदायिक शौचालय और हर गांव में कूड़ा निस्तारण का इंतजाम होगा। इससे ग्राम पंचायतों की आय भी शुरू हो जाएगी, जिसे गांव के विकास पर ही खर्च किया जा सकेगा।
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