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अब पुलिस ने आईजीएल को बताया पाक-साफ
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Sat, 11 Nov 2017 11:47 PM IST
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बरामद की अंग्रेजी शराब लेकिन अदालत में पेश की देसी
- फोटो : Demo Pic
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आजमगढ़। तरवां थाना क्षेत्र के रासेपुर बाजार निवासी पूर्व प्रधान राजनाथ सिंह के घर से 11 अगस्त को छापेमारी कर पुलिस ने एक करोड़ से अधिक के रेक्टीफाइड एल्कोहल के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया था।
साथ ही दावा किया था कि एल्कोहल गोरखपुर की आईजीएल डिस्टलरी से सप्लाई की गई है। इसी के आधार पर पुलिस ने कंपनी के जीएम आदि के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लेकिन तीन महीने बाद पुलिस का दावा फुस्स हो गया है । जांच-पड़ताल में पुलिस ने पाया है कि एल्कोहल सप्लाई में कंपनी के लोगों का कोई हाथ नहीं है।
ऐसे में कंपनी वालों पर दर्ज मुकदमे को समाप्त करने की कार्रवाई की जा रही है। वहीं, पुलिस के इस दावे ने जिले में तरह-तरह के चर्चाओं को जन्म दिया है।
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तरवां थाना क्षेत्र के रासेपुर बाजार निवासी रिटायर शिक्षक और पूर्व प्रधान राजनाथ सिंह के घर में छिपाकर 53 ड्रमों से भरा रेक्टीफाइड एल्कोहल रखा हुआ था। मुखबिर की सूचना पर एसओ तरवां और मेंहनगर ने संयुक्त रूप से छापेमारी कर इस रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए अवैध शराब के कारोबार में जहानागंज थाना क्षेत्र के करउत गांव निवासी दीपक सिंह, प्रतापपुर गांव निवासी रामचंद्र और मेंहनगर थाने के बीरपुर गांव निवासी विनय सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया।
ड्रमों पर मौजूद सैंपल के आधार पर पुलिस ने दावा किया कि यह पूरा माल गोरखपुर में स्थित आईजीएल डिस्टलरी से सप्लाई हुआ है। इसी के आधार पर तरवां थाने के तात्कालीन प्रभारी निरीक्षक प्रवीण यादव ने तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसमें इंडियन ग्लाइको डिस्टलरी गोरखपुर के जीएम पीएम पांडेय, सहायक आबकारी आयुक्त ओपी चौरसिया, आबकारी निरीक्षक भूपेंद्र सिंह, गिरिजेश सिंह, सरिता सिंह और सिपाही अजय सिंह उर्फ बबलू को आरोपी बनाया गया था।
जांच पड़ताल शुरू होने के तीन महीने बाद पुलिस का दावा फुस्स हो गया। जांच में पता चला कि ड्रम पर भले ही कंपनी का स्टीकर लगा है, लेकिन माल की सप्लाई यहां से नहीं की गई है। कहा जा रहा है कि जिस समय कंपनी से कोई भी सामान बाहर निकलता है।
उसकी कई जगहों पर इंट्री की जाती है, लेकिन इस एल्कोहल के बाहर निकलने की कोई लिखापढ़ी नहीं है। कंपनी का तर्क है किसी अन्य कंपनी को यहां से ड्रम में भरकर एल्कोहल की सप्लाई हुई है। वहीं ड्रम पकड़ा गया है। ऐसे में तरवां थाने में कंपनी और आबकारी विभाग के अधिकारियों के ऊपर दर्ज मुकदमा बेबुनियाद है। पुलिस की इस रिपोर्ट के बाद जिले में चर्चाओं का माहौल गरम है।
जिस ड्रम में रेक्टीफाइड एल्कोहल भरकर रखा हुआ था। उस पर गोरखपुर के डिस्टलरी का स्टीकर जरूर लगा था। लेकिन माल की सप्लाई वहां से नहीं की गई थी। जांच पड़ताल के दौरान यह तथ्य उजागर हुए हैं। ऐसे में इस बात की जांच की जा रही कि स्टीकर लगा यह ड्रम यहां कैसे पहुंचा। - सुभाष चंद्र गंगवार, एसपी सिटी
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साथ ही दावा किया था कि एल्कोहल गोरखपुर की आईजीएल डिस्टलरी से सप्लाई की गई है। इसी के आधार पर पुलिस ने कंपनी के जीएम आदि के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लेकिन तीन महीने बाद पुलिस का दावा फुस्स हो गया है । जांच-पड़ताल में पुलिस ने पाया है कि एल्कोहल सप्लाई में कंपनी के लोगों का कोई हाथ नहीं है।
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ऐसे में कंपनी वालों पर दर्ज मुकदमे को समाप्त करने की कार्रवाई की जा रही है। वहीं, पुलिस के इस दावे ने जिले में तरह-तरह के चर्चाओं को जन्म दिया है।
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तरवां थाना क्षेत्र के रासेपुर बाजार निवासी रिटायर शिक्षक और पूर्व प्रधान राजनाथ सिंह के घर में छिपाकर 53 ड्रमों से भरा रेक्टीफाइड एल्कोहल रखा हुआ था। मुखबिर की सूचना पर एसओ तरवां और मेंहनगर ने संयुक्त रूप से छापेमारी कर इस रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए अवैध शराब के कारोबार में जहानागंज थाना क्षेत्र के करउत गांव निवासी दीपक सिंह, प्रतापपुर गांव निवासी रामचंद्र और मेंहनगर थाने के बीरपुर गांव निवासी विनय सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया।
ड्रमों पर मौजूद सैंपल के आधार पर पुलिस ने दावा किया कि यह पूरा माल गोरखपुर में स्थित आईजीएल डिस्टलरी से सप्लाई हुआ है। इसी के आधार पर तरवां थाने के तात्कालीन प्रभारी निरीक्षक प्रवीण यादव ने तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसमें इंडियन ग्लाइको डिस्टलरी गोरखपुर के जीएम पीएम पांडेय, सहायक आबकारी आयुक्त ओपी चौरसिया, आबकारी निरीक्षक भूपेंद्र सिंह, गिरिजेश सिंह, सरिता सिंह और सिपाही अजय सिंह उर्फ बबलू को आरोपी बनाया गया था।
जांच पड़ताल शुरू होने के तीन महीने बाद पुलिस का दावा फुस्स हो गया। जांच में पता चला कि ड्रम पर भले ही कंपनी का स्टीकर लगा है, लेकिन माल की सप्लाई यहां से नहीं की गई है। कहा जा रहा है कि जिस समय कंपनी से कोई भी सामान बाहर निकलता है।
उसकी कई जगहों पर इंट्री की जाती है, लेकिन इस एल्कोहल के बाहर निकलने की कोई लिखापढ़ी नहीं है। कंपनी का तर्क है किसी अन्य कंपनी को यहां से ड्रम में भरकर एल्कोहल की सप्लाई हुई है। वहीं ड्रम पकड़ा गया है। ऐसे में तरवां थाने में कंपनी और आबकारी विभाग के अधिकारियों के ऊपर दर्ज मुकदमा बेबुनियाद है। पुलिस की इस रिपोर्ट के बाद जिले में चर्चाओं का माहौल गरम है।
जिस ड्रम में रेक्टीफाइड एल्कोहल भरकर रखा हुआ था। उस पर गोरखपुर के डिस्टलरी का स्टीकर जरूर लगा था। लेकिन माल की सप्लाई वहां से नहीं की गई थी। जांच पड़ताल के दौरान यह तथ्य उजागर हुए हैं। ऐसे में इस बात की जांच की जा रही कि स्टीकर लगा यह ड्रम यहां कैसे पहुंचा। - सुभाष चंद्र गंगवार, एसपी सिटी