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Azamgarh News: मो. सुफियान तैयार करते थे पवित्र काबा का गिलाफ

Sat, 29 Nov 2025 12:51 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 29 Nov 2025 12:51 AM IST
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Mohammad Sufyan used to prepare the cover of the Holy Kaaba
08 : काबा का गिलाफ का टुकड़ा दिखाते हुए वसीमुद्दीन।
आजमगढ़। मुबारकपुर के मोहल्ला सरैंय्यां निवासी मोहम्मद सुफियान पुत्र हाजी सुबहान का हुनर उस दौर में इतना प्रसिद्ध था कि सऊदी अरब की तत्कालीन सरकार ने पवित्र काबा मक्का का गिलाफ तैयार करने की जिम्मेदारी उन्हीं को सौंपी थी। काबा का गिलाफ (किस्वा) तैयार करने वाले विश्वस्तरीय कारीगरों में मुबारकपुर के इस परिवार का नाम सम्मान से लिया जाता रहा है।
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रेशम नगरी के नाम से मशहूर मुबारकपुर कस्बा देश ही नहीं विदेश में भी अपनी पहचान रखता है। यहां बुनकर अपनी कारीगरी के हुनर से कपड़ों पर जो डिजाइन उकेरते हैं उसे हर कोई पसंद करता है। ऐसे ही एक हुनरमंद थे मो. सुफियान, उनके हाथों से बने कपड़ों पर किए गए डिजाइन को तत्कालीन सऊदी अरब की सरकार ने पसंद किया था। इसके बाद उन्हें मुसलमानों के पवित्र धार्मिक स्थल काबा में ओढ़ाए जाने वाले गिलाफ को तैयार करने की जिम्मेदारी मिली थी।
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मो. सुफियान के चचेरे भाई वसीमुद्दीन 80 वर्ष ने बताया कि वह आजादी मिलने के तीन दिन बाद बुधवार को पैदा हुए। जब वह समझदार हो तो किसी कारोबार के सिलसिले में गुजरात गए थे। वहां से वह लाहौर पाकिस्तान चले गए और पाकिस्तान में रहने लगे।
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सबसे बेहतरीन नक्शा माे. सुफियान का था

गिलाफ के लिए विभिन्न स्थानों से डिजाइन तैयार कर मंगाई गई। कारीगरों ने अपनी-अपनी डिजाइन सऊदी अरब सरकार को भेजी थी। पूरे विश्व में सबसे बेहतरीन डिजाइन का नक्शा मुबारकपुर के मोहल्ला सरैया निवासी मोहम्मद सुफियान का था। इसके बाद सऊदी अरब सरकार ने मोहम्मद सुफियान को काबा मक्का का गिलाफ तैयार करने के लिए नियुक्त किया।

उनके हाथ का तैयार काबा मक्का का गिलाफ का एक छोटा सा टुकड़ा हमारे पास भी है। उसे हमने हिफाजत से संभाल कर रखे हैं। धीरे-धीरे मो. सुफियान ने पिता हाजी सुबहान और अन्य भाइयों अब्दुल गनी, अब्दुल मुत्तलिब व अब्दुल हक को भी अपने पास सऊदी अरब बुला लिया। मोहम्मद सुफियान की एक बहन थी। उसका नाम बशीरन था। इन लोगों का 1977 तक मुबारकपुर आना-जाना रहा। अब उनके बारे में इस समय कोई जानकारी नहीं है। - वसीमुद्दीन, मो. सुफियान के चचेरे भाई।
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