{"_id":"618d58bac9d42e42646cb6b2","slug":"millions-of-women-also-offered-arghya-to-the-rising-sun-azamgarh-news-vns622057996","type":"story","status":"publish","title_hn":"लाखों महिलाओं ने उगते सूर्य को भी दिया अर्घ्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लाखों महिलाओं ने उगते सूर्य को भी दिया अर्घ्य
विज्ञापन
छठ पर्व के अंतिम दिन बृहस्पतिवार को पुत्र के दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में नदियों, सरोवरों, नहरों के तट पर भोर में व्रती महिलाओं ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। इसी के साथ व्रतियों ने तीन दिनी षष्ठी व्रत का पारण भी किया।
बुधवार को अस्ताचलगामी सूर्य के बाद बृहस्पतिवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए चार बजे भोर से ही महिलाएं गाजे-बाजे के साथ घाटों पर पहुंचना शुरू कर दीं थीं। छठ मैय्या के गीतों से पूरा शहर गूंज रहा था। घाटों पर पूरी रात भक्ति गीत गूंजते रहे। तमसा नदी के घाटों से लेकर नगर की सड़कों पर भी श्रद्धालुओं का रेला लगा रहा। हर मुहल्लों सेे व्रती महिलाएं छठ मैय्या के गीत गातीं आस्था में डूबी नजदीक के घाटों की ओर चली जा रही थीं। आगे-आगे पुरुष गन्ना और डलिया में पूजन सामग्री लिए चल रहे थे। परिवार के सदस्यों में बूढ़े और बच्चे भी शामिल थे। लगभग चार बजे तमसा के गौरीशंकर, कदम घाट, भोला घाट, पचपेड़वा घाट, सिधारी, नरौली, हरवंशपुर शाहीपुल, राजघाट पर तिल रखने भर के लिए जगह नहीं बची थी। कमर भर पानी में व्रती महिलाएं अपनी-अपनी वेदियों के सामने टकटकी लगाए भगवान भाष्कर के उदय होने का इंतजार कर रही थीं। इसी दौरान जब भगवान सूर्य उदय हुए तो अर्घ्य देने के लिए लाखों हाथ एक साथ आग बढ़े। मंत्रोच्चार के बीच व्रतियों ने सूर्य देव को अर्घ्य दिया। इस दौरान हर तरफ सूर्य देव के जयकारे लगने लगे। सूर्य का पूजन-अर्चन कर महिलाओं ने पूजा वेदी पर दीप जलाया और प्रसाद भी चढ़ाया। अर्घ्य देने के लिए इस कदर होड़ मची थी कि घाटों पर जगह नहीं मिल पा रही थी। व्रती महिलाओं के साथ गईं महिलाएं और पुुरुष भी अर्घ्य देने में पीछे नहीं रहे।
डाला छठ के तीन दिवसीय पर्व पर 36 घंटे का निराजल व्रत रही महिलाओं ने मंगलवार की भोर में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया। गाजे-बाजे के साथ नदियों, सरोवरों के घाट पर पहुंची और वापसी भी गाजे-बाजे के साथ हुई। इस दौरान घाटों पर पूजा पंडालों में प्रसाद के लिए होड़ मची रही। घाटों से घर वापसी आई व्रती महिलाओं ने व्रत का पारन करने के बाद घर-घर छह मां के प्रसाद का वितरण किया। पास-पड़ोस ही नहीं नात-रिश्तेदारों और परदेश में रहने वाले लोगों के यहां भी मां का प्रसाद भिजवाया।
विज्ञापन
रात के अंधेरे में घाटों की ओर से जाने वाली महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन भी काफी मुस्तैद नजर आया। जगह-जगह पुलिस के जवान अपनी ड्यूटी का निर्वहन कर रहे थे। अधिकारी भी घाटों पर चक्रमण करते नजर आए। एसपी अनुराग आर्य द्वारा सादे वेष में भी पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी। नदी में गोताखोर भी किसी दुर्घटना को लेकर तत्पर नजर आए।
विज्ञापन
बुधवार को अस्ताचलगामी सूर्य के बाद बृहस्पतिवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए चार बजे भोर से ही महिलाएं गाजे-बाजे के साथ घाटों पर पहुंचना शुरू कर दीं थीं। छठ मैय्या के गीतों से पूरा शहर गूंज रहा था। घाटों पर पूरी रात भक्ति गीत गूंजते रहे। तमसा नदी के घाटों से लेकर नगर की सड़कों पर भी श्रद्धालुओं का रेला लगा रहा। हर मुहल्लों सेे व्रती महिलाएं छठ मैय्या के गीत गातीं आस्था में डूबी नजदीक के घाटों की ओर चली जा रही थीं। आगे-आगे पुरुष गन्ना और डलिया में पूजन सामग्री लिए चल रहे थे। परिवार के सदस्यों में बूढ़े और बच्चे भी शामिल थे। लगभग चार बजे तमसा के गौरीशंकर, कदम घाट, भोला घाट, पचपेड़वा घाट, सिधारी, नरौली, हरवंशपुर शाहीपुल, राजघाट पर तिल रखने भर के लिए जगह नहीं बची थी। कमर भर पानी में व्रती महिलाएं अपनी-अपनी वेदियों के सामने टकटकी लगाए भगवान भाष्कर के उदय होने का इंतजार कर रही थीं। इसी दौरान जब भगवान सूर्य उदय हुए तो अर्घ्य देने के लिए लाखों हाथ एक साथ आग बढ़े। मंत्रोच्चार के बीच व्रतियों ने सूर्य देव को अर्घ्य दिया। इस दौरान हर तरफ सूर्य देव के जयकारे लगने लगे। सूर्य का पूजन-अर्चन कर महिलाओं ने पूजा वेदी पर दीप जलाया और प्रसाद भी चढ़ाया। अर्घ्य देने के लिए इस कदर होड़ मची थी कि घाटों पर जगह नहीं मिल पा रही थी। व्रती महिलाओं के साथ गईं महिलाएं और पुुरुष भी अर्घ्य देने में पीछे नहीं रहे।
विज्ञापन
डाला छठ के तीन दिवसीय पर्व पर 36 घंटे का निराजल व्रत रही महिलाओं ने मंगलवार की भोर में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया। गाजे-बाजे के साथ नदियों, सरोवरों के घाट पर पहुंची और वापसी भी गाजे-बाजे के साथ हुई। इस दौरान घाटों पर पूजा पंडालों में प्रसाद के लिए होड़ मची रही। घाटों से घर वापसी आई व्रती महिलाओं ने व्रत का पारन करने के बाद घर-घर छह मां के प्रसाद का वितरण किया। पास-पड़ोस ही नहीं नात-रिश्तेदारों और परदेश में रहने वाले लोगों के यहां भी मां का प्रसाद भिजवाया।
विज्ञापन
रात के अंधेरे में घाटों की ओर से जाने वाली महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन भी काफी मुस्तैद नजर आया। जगह-जगह पुलिस के जवान अपनी ड्यूटी का निर्वहन कर रहे थे। अधिकारी भी घाटों पर चक्रमण करते नजर आए। एसपी अनुराग आर्य द्वारा सादे वेष में भी पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी। नदी में गोताखोर भी किसी दुर्घटना को लेकर तत्पर नजर आए।