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कृषि यंत्र अनुदान के नाम पर लाखों का घोटाला

Mon, 21 Aug 2017 11:18 PM IST
आजमगढ़/ ब्यूरो, अमर उजाला
आजमगढ़/ ब्यूरो, अमर उजाला Updated Mon, 21 Aug 2017 11:18 PM IST
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Millions of scams in the name of agricultural equipment grants
500 rupees note
आजमगढ़। किसानों की सहुलियत और खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार हर वर्ष करोड़ों रुपये का बजट जारी करती है, लेकिन इसका किसानों को कितना फायदा होता है इसका कोई हिसाब नहीं लिया जाता। इसी का परिणाम है कि जिले में कृषि यंत्र अनुदान के नाम पर अन्नदाताओं के लिए जारी बजट का लाखों रुपये कृषि विभाग के अधिकारियों ने डकार लिए। वर्ष 2011 से 2014 तक लगातार यह खेल चलता रहा। फर्जीवाड़ा पकड़ में आने पर विधान परिषद सदस्य ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने शिकायत की। उनकी शिकायत पर मामले की जांच हुई,
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बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। लेकिन रिश्वत लेकर अधिकारियों ने मामले को दबा दिया। आज भी यह फाइल विकास भवन और कलेक्ट्रेट के बीच धूल फांक रही है।  
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जांच रिपोर्ट के मुताबिक कृषि यंत्रों में रोटावेटर के लिए 30 हजार रुपये और डीजल पंपसेट के लिए दस हजार रुपये का अनुदान दिया जाना था।

वर्ष 2011-12 में डीजल पंपसेट के लिए 1678 और रोटावेटर के लिए 418 किसान, वर्ष 2012-13 में डीजल पंपसेट के लिए 1850 और रोटावेटर के लिए 824 किसान, वर्ष 2013-14 में डीजल पंपसेट के लिए 1390 और रोटावेटर के लिए 845 किसानों का चयन किया गया था। योजना के तहत एक कृषक परिवार के एक ही सदस्य को लाभ मिलना था। लेकिन शासन की मंशा पर पानी फेरते हुए कृषि अधिकारियों ने लाभार्थियों के चयन में मनमानी किया।
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जांच रिपोर्ट के अनुसार इस योजना का लाभ देने के लिए विभाग की तरफ से किसान, उनके सगे भाई, पुत्र, पत्नी और मां का चयन कर उन्हें सौंप दिया। ऐसे में जिस एक किसान को लाभ मिला वह तो अपना यंत्र लेकर चला गया। शेष उसके नाते, रिश्तेदारों के यंत्र का पैसा विभागीय लोग आपस में बांट लिया। इस प्रकार इस योजना के तहत लाखो रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया है। इसके अलावा यंत्र खरीदने में भी फर्जीवाड़ा हुआ है। रोटावेटर खरीदने वाले 13 बिल और डीजल पंपसेट खरीदने की 42 बिलों का विभाग के पास कोई हिसाब नहीं है। इसके अलावा 52 से अधिक कृषकों का एक ही खाता है।  

विधान परिषद सदस्य ध्रुव कुमार त्रिपाठी के सदन में मामला उठाए जाने पर तात्कालीन डीएम ने हमें जांच सौंपी थी। जांच पूरी कर हमने कार्रवाई के लिए अपनी रिपोर्ट सौंप दी। आगे क्या हुआ हमें कोई जानकारी नहीं है।  
- सुनील सिंह, अपर सांख्यिकीय अधिकारी, आजमगढ़


यह मामला हमारे कार्यकाल से बहुत पहले का है, जबकि मैं वर्ष 2016 में जिले में तैनात हूं। अब संज्ञान में आया है। कल इसकी फाइल तलब कर जानकारी लूंगा और जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध कार्रवाई और सरकारी धन की रिकवरी कराने का प्रयास करूंगा।  

- डा. आरके मौर्य, उपनिदेशक कृषि


काफी पुराना मामला होने की वजह से मेरे संज्ञान में नहीं है। इस मामले से जुड़ी सभी फाइलों और जांच रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। किसी को बक्शा नहीं जाएगा।
 - अभिषेक सिंह द्वितीय, मुख्य विकास अधिकारी
 
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