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दुष्कर्म पीड़िता के घर पहुंचीं राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. सुचिता

Mon, 05 Oct 2020 10:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2020 10:57 PM IST
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Member of State Child Rights Protection Commission Dr. Suchita reached the house of the rape victim
जीयनपुर में पीड़िता के घर पहुंची सुचिता चतुर्वेदी। - फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़/सगड़ी। जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र में पांच दिन पहले नौ वर्षीय बालिका के साथ हुए दुष्कर्म मामले में परिजनों का हाल लेने के लिए राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. सुचिता चतुर्वेदी सोमवार को पीड़िता के घर पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने बताया कि पीड़िता को रानी लक्ष्मीबाई कोष से मदद दी जा रही है। साथ ही मामले की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग मुख्यमंत्री से की जाएगी।
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डॉ. सुचिता चतुर्वेदी ने पीड़िता की बहन से हाल जाना। इस दौरान ये पता चलने पर की पीड़िता का अभी बैंक में खाता नहीं है कहा कि जैसे ही खाता खुलता है उसके खाते में एक लाख रुपये रानी लक्ष्मी बाई सम्मान कोष से दिए जाएंगे। इसके बाद 15 दिन के अंदर दो लाख रुपये की मदद कराई जाएगी। अपराधियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट से सुनवाई कर जल्द से जल्द सजा देने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के अपराध क्षमा योग्य नहीं है। उनके साथ एसपी ग्रामीण सिद्धार्थ, सीओ सगड़ी अजय कुमार यादव, कोतवाल नंदकुमार तिवारी मौजूद थे।
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वहीं, कलक्ट्रेट में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने हाथरस प्रकरण पर कहा कि हाथरस केस की अभी जांच चल रही है, इसलिए बोलना सही नहीं है। बलरामपुर मामले में भी दोषी गिरफ्तार है। ये कहना मुश्किल है कि पुलिस-प्रशासन से कोई चूक हुई है। बाल अपराध रोकने के लिए सरकार अपनी ओर से प्रयास कर रही है। योजनाओं को जमीनी स्तर पर न उतारने में अधिकारियों का दोष है। बढ़ते बाल अपराध को रोकने के लिए संबंधित विभागों के साथ ही परिजनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्हें अपने बच्चों को लेकर सतर्क और संवेदनशील रहना चाहिए। उन्होंने श्रम विभाग की ओर से पिछले दिनों मुक्त कराए गए बालश्रमिकों के बारे में कहा कि उनके परिवारों को कौशल विकास योजना से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही बालश्रम विद्या योजना, अटल आवासीय विद्यालय योजना आदि के माध्यम से उन्हें शिक्षा से जोड़ा जाएगा।
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