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खंडहर में तब्दील जन्मस्थली पर बने पुस्तकालय

Mon, 13 Sep 2021 10:50 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 13 Sep 2021 10:50 PM IST
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Libraries built on the birthplace turned into ruins
खंडहर में तब्दील हुआ हरिऔध जी का पैतृक आवास। - फोटो : AZAMGARH
निजामाबाद/जहानागंज। जनपद की मिट्टी में कुछ ऐसी बात है कि तमाम झंझावातों के बाद भी हमारी हस्ती नहीं मिटती। इस मिट्टी ने कई ऐसे साहित्यकारों को जन्म दिया, जिन्होंने अपनी रचनाओं से जहां हिंदी को मजबूत किया वहीं उनके द्वारा लिखे साहित्य आज भी लोगों को प्रेरणा देने का काम करते हैं। महापंडित राहुल सांकृत्यायन और कवि सम्राट अयोध्या सिंह उपाध्याय की गिनती ऐसे ही साहित्यकारों में होती है।
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घुमक्कड़ी साहित्य को लिखने वाले महापंडित राहुल सांकृत्यायन को हर कोई जानता है। जहानागंज विकास खंड के कनैला गांव निवासी राहुल सांकृत्यायन के बारे में जानने के लिए दूर-दूर से लोग इनके बारे में जानकारी हासिल करने के लिए आते हैं। लेकिन हिंदी को मजबूत प्रदान करने वाले महापंडित के घर की डगर बहुत कठिन है। गांव में जाने वाले मुख्य मार्ग पर पानी और कीचड़ जमा रहता है, जिसे देख लोगों को आश्चर्य होता है। उनके नाम पर परिवार के लोगों द्वारा एक लाइब्रेरी स्थापित की गई है। इस लाइब्रेरी में उनके द्वारा लिखे साहित्य रखे हुए हैं। लोग इन किताबों को पढ़ने के लिए भी पहुंचते हैं।
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नगर पंचायत निजामाबाद में जन्मे हिंदी के पुरोधा कवि सम्राट पंडित अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध ने जन्म से लेकर राष्ट्रभाषा को अपनी कृतियों से सींचने का काम किया। आज उनकी जन्मस्थली खंडहर में तब्दील हो चुकी है। कोई सुधि लेने वाला भी नजर नहीं आ रहा है हिंदी के पुरोधा कवि सम्राट पंडित अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध ने जन्म से लेकर राष्ट्रभाषा को अपनी कृतियों से सींचने का काम किया। उनकी अपनी ही जन्मस्थली ने उन्हें भुला दिया है। केवल जन्म दिवस के समय पर ही उन्हें कुछ साहित्य प्रेमियों द्वारा याद किया जाता है। उसके बाद उन्हें किताबों में बंद कर फिर रख दिया जाता है हिंदी को समृद्ध करने वाला ही उपेक्षा का शिकार हो गया है उनका पैतृक आवास को लोग काफी दिनों से पुस्तकालय बनाने की मांग कई वर्षों से करते आ रहे हैं। लेकिन मांग केवल कागजों में ही सिमट कर रह जा रही है। कस्बे में हरिऔध की एकमात्र निशानी उनकी एक आदमकद प्रतिमा निजामाबाद रानी की सराय बाईपास चौराहे पर कस्बे में लगाई गई है। वह प्रतिमा भी जहां लगाई गई है वहां की हालत भी काफी खराब हो गई है। बाउंड्रीवॉल टूट चुकी है, बाउंड्रीवॉल पर लोग कपड़ा सुखाने का काम कर रहे हैं।
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