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Azamgarh News: खतौनी में मदरसे के नाम भूमि दर्ज नहीं, फिर भी दे दी मान्यता

Sat, 22 Aug 2026 01:08 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 22 Aug 2026 01:08 AM IST
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Land not recorded in the name of the madrasa in the revenue records, yet recognition was granted.
मदरसा जामिया नूरूल उलूम मुबारकपुर की मान्यता निलंबित हो चुकी है लेकिन, जांच रिपोर्ट को अगर देखें तो यह कई सवाल खड़े कर रही है। जैसे, मदरसे की स्थापना 1996 में हुई और उसके प्रबंधक के नाम पर 1997 में दानपत्र पर जमीन ली गई।
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दानपत्र के जरिए जमीन लेने के बाद भी उसे अभिलेखों में दर्ज नहीं कराया गया। खतौनी में नाम नहीं होने के बाद भी मदरसे को मान्यता दे दी गई। इन तथ्यों को देखते हुए रजिस्ट्रार ने दानपत्र की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े किए और मान्यता को निलंबित कर दिया।
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उक्त मदरसे की स्थापना तत्कालीन प्रबंधक ने 1996 में अपनी पत्नी के नाम स्थित जमीन दिखाकर की थी। इसके बाद 1997 में तत्कालीन प्रबंधक की पत्नी ने दूसरे प्रबंधक के नाम पर जमीन दान की। यह दानपत्र रजिस्टर्ड नहीं कराया गया।
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इसके कारण खतौनी में प्रबंधक का नाम नहीं चढ़ा। इसके बाद मदरसे को वर्ष 1998 में मुंशी और मौलवी स्तर की मान्यता मिल गई। 2009 में आलिम और कामिल की मान्यता मिली।
तब तक मदरसे का नाम खतौनी में दर्ज नहीं था। 2013 में फिर मदरसे के नाम पर रजिस्टर्ड बैनामा लिया गया और 2018 में जमीन पर मदरसे का नाम खतौनी में दर्ज हुआ।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में रजिस्ट्रार ने मदरसे के दानपत्र में तहसील मोहम्मदाबाद गोहना, जनपद आजमगढ़ के उल्लेख को टंकण त्रुटि बताने के प्रबंधक के स्पष्टीकरण को अस्वीकार किया। रिपोर्ट में रजिस्ट्रार ने कहा कि वर्ष 1988 में ही मऊ जनपद का सृजन हो चुका था।
उस समय मोहम्मदाबाद गोहना मऊ जनपद की एक सुस्थापित तहसील थी। ऐसे में वर्ष 1997 के दस्तावेज में आजमगढ़ का उल्लेख प्रथम दृष्टया ही असंगत है।
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गृहकर, नगरपालिका के अभिलेखों को भी रजिस्ट्रार ने नकारा
जांच रिपोर्ट में रजिस्ट्रार ने कहा कि गृहकर, नगरपालिका अथवा स्थानीय निकाय के अभिलेखों के आधार पर स्वामित्व अथवा कब्जाधिकार सिद्ध करने का प्रयास विधिक दृष्टि से पर्याप्त प्रमाण नहीं माना जाता। क्योंकि, ऐसे अभिलेख केवल प्रशासनिक एवं कर-निर्धारण के प्रयोजन के लिए सृजित होते हैं। मदरसे ने इसके उत्तर में शासनादेश का उद्धरण दिया है, जिसमें स्थानीय निकायों के अभिलेखों को विधिमान्य साक्ष्य माना गया है। यह उत्तर भी भ्रामक है।

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अभी तक हमारे पास शासन की ओर से कोई आदेश नहीं आया है। अगर फर्जीवाड़े के आरोप में प्रबंधक पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश मिलता है, तो उसे दर्ज कराकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। -वर्षा अग्रवाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।
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