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बजट का अभाव, ठेकेदार की लापरवाही से ‘विकास’ थमा
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आजमगढ़। जिले में 50 लाख से अधिक की कई परियोजनाएं अधूरी हैं। कारण कहीं बजट का अभाव तो कहीं ठेकेदारों और अधिकारियों की लापरवाही। अधिकारियों की सुस्ती ने कई परियोजनाओं पर ग्रहण लगा दिया। कई ऐसी हैं जो पिछले आठ से दस साल से चल रही लेकिन अभी तक पूरा नहीं हो सकीं। डीएम व कमिश्नर के स्तर पर हर माह समीक्षा होने के बाद भी विकास कार्यों को गति नहीं मिल पा रही है। विधानसभा चुनाव से पूर्व एक जुनून के साथ परियोजनाओं को पूर्ण कराने के लिए शासन और प्रशासन जुटा हुआ था लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद सब बैकफुट पर चला गया। परियोजनाओं के निर्माण कार्यों की न तो मानीटरिंग हो रही है, न ही इन कार्यों में तेजी लाने के कोई फरमान जारी हो रहे हैं। नतीजा कार्यदायी एजेंसी भी सुस्त हैं। चाहे वह गोला-हाजीपुर पुल हो, मंदुरी एयरपोर्ट, पैरा मेडिकल कालेज, संभागीय परिवहन कार्यालय एवं सारथी भवन या फिर हरिऔध कलाभवन हो। जिले में समाज कल्याण व परिवहन विभाग समेत कुल 13 विभागों के कुल 35 परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। कुछ बजट के अभाव में अभी तक पूरे नहीं हुए कुछ विभागीय लापरवाही के कारण अभी तक पूरे नहीं हुए। उक्त सभी परियोजनाएं 50 लाख से ऊपर तक की हैं। स्वास्थ्य विभाग की परियोजनाओं पर नजर डाला जाए तो मुख्यमंत्री की घोषणा के अंतर्गत सामुदायिक स्वा. केंद्र फूलपुर को उच्चीकृत कर 100 शैयायुक्त चिकित्सालय भवन का निर्माण 31 दिसंबर वर्ष 2022 तक पूर्ण कराए जाने का निर्देश था। बावजूद अभी करीब 70 फीसद ही कार्य हो सके हैं। कारण कि 27.96 करोड़ रुपये लागत से इसे बनना था लेकिन अभी तक मात्र 19.17 करोड़ रुपये ही अवमुक्त हो सके। जिससे निर्माण अभी भी अधूरा है।
देवारांचल को गोरखपुर से जोड़ने के लिए हाजीपुर-गोला पुल पांच साल में नहीं बन पाया है। इसके 25 खंभों में से महज 13 ही बन पाए। पुल निर्माण 2017 से शुरू हुआ था। 40 प्रतिशत काम बाकी है। निर्माण दो से तीन वर्ष में पूरा होने की उम्मीद है।
चल रहा है।
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देवारांचल को गोरखपुर से जोड़ने के लिए हाजीपुर-गोला पुल पांच साल में नहीं बन पाया है। इसके 25 खंभों में से महज 13 ही बन पाए। पुल निर्माण 2017 से शुरू हुआ था। 40 प्रतिशत काम बाकी है। निर्माण दो से तीन वर्ष में पूरा होने की उम्मीद है।
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