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Azamgarh News: छुट्टा गोवंश की रोकथाम के लिए ठोस योजना का अभाव, लग रहा जाम
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जिले की सड़कों पर घूम रहे छुट्टा गोवंश को हटाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आदेश शहर में बेअसर रहा है। इस बारे में दी गई मियाद खत्म हो गई। सड़कों पर गोवंश छुट्टा घूम रहे हैं। नगर पालिका और पशुपालन विभाग के पास छुट्टा गोवंश की रोकथाम के लिए ठोस योजना नहीं बन सकी है। इसका नतीजा शहर की सड़कों पर छुट्टा पशु जाम का कारण बन रहे। हादसे की भी हमेशा आशंका बनी रहती है।
राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर, जिला मार्ग और शहर की सड़कों व किसानों के खेतों में छुट्टा गोवंश घूम रहा है। जहां-जहां कचरे के ढरे लगे हैं, वहां भी निराश्रित गोवंश मुंह मारता दिख जाएगा। दो बार समय सीमा खत्म होने के बाद भी पशु पालन विभाग और नगर पालिका सड़कों को छुट्टा गोवंश मुक्त नहीं कर सके। पहले 31 मार्च तक की मियाद थी, फिर इसे पांच अप्रैल किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताई, लेकिन धरातल पर हकीकत नहीं बदली। शहर की बात की जाए तो आज भी छुट्टा मवेशियों की भरमार है। शहर के मुख्य चौक, पुरानी सब्जीमंडी, कटरा, बदरका, कालीनगंज, रैदोपुर, कलेक्ट्रेट, नरौली, सिधारी क्षेत्र में आज भी सड़कों पर छुट्टा मवेशी लावारिस हाल में घूम रहे है। चौक क्षेत्र में तो दो-तीन ऐसे मवेशी अक्सर ही देखे जाते है, जो देखने में ही काफी खतरनाक लगते है और अब तक कई लोगों को अपना शिकार भी बना चुके है। एक सांड तो रिक्शा, ई-रिक्शा व आटो को अपनी सिंग में फंसा कर पलटने की क्षमता भी रखता है और खुले आम घूम रहा है।
चार स्थाई व 77 अस्थाई गौशाला
आजमगढ़। जिले में कुल 81 गौ आश्रय स्थल है। जिसमें चार स्थाई तो 77 अस्थाई गौ आश्रय स्थल शामिल है। स्थाई गौ आश्रयस्थल मियापुर बासदेवा, सुरहन, गदनपुर हिच्छनपट्टी व मकरहा में बने है। वर्तमान में इन गौ आश्रय स्थलों पर 8757 छुट्टा मवेशियों को संरक्षित किया गया है। जिसमें 2693 मवेशी पशुपालकों को संरक्षण के लिए सौंप दिया गया है। लगभग 1400 लोगों ने इन मवेशियों को पालने के लिए गौ आश्रय स्थलों से लिया है।
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बेसहारा पशुओं को लगातार पकड़ आश्रय स्थल भेजा जा रहा है। लगभग दो हजार पशु आश्रय स्थल भेजे गए। इसके बाद भी यदि कहीं सड़क पर मवेशी घूम रहे है तो सूचना मिलने पर टीम भेज कर उन्हें पकड़वाया जाता है और गो आश्रय स्थल भेजा जाता है। लगातार यह कवायद विभाग की ओर से चल रही है। - डॉ. धर्मेंद्र पांडेय, सीवीओ, आजमगढ़।
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राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर, जिला मार्ग और शहर की सड़कों व किसानों के खेतों में छुट्टा गोवंश घूम रहा है। जहां-जहां कचरे के ढरे लगे हैं, वहां भी निराश्रित गोवंश मुंह मारता दिख जाएगा। दो बार समय सीमा खत्म होने के बाद भी पशु पालन विभाग और नगर पालिका सड़कों को छुट्टा गोवंश मुक्त नहीं कर सके। पहले 31 मार्च तक की मियाद थी, फिर इसे पांच अप्रैल किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताई, लेकिन धरातल पर हकीकत नहीं बदली। शहर की बात की जाए तो आज भी छुट्टा मवेशियों की भरमार है। शहर के मुख्य चौक, पुरानी सब्जीमंडी, कटरा, बदरका, कालीनगंज, रैदोपुर, कलेक्ट्रेट, नरौली, सिधारी क्षेत्र में आज भी सड़कों पर छुट्टा मवेशी लावारिस हाल में घूम रहे है। चौक क्षेत्र में तो दो-तीन ऐसे मवेशी अक्सर ही देखे जाते है, जो देखने में ही काफी खतरनाक लगते है और अब तक कई लोगों को अपना शिकार भी बना चुके है। एक सांड तो रिक्शा, ई-रिक्शा व आटो को अपनी सिंग में फंसा कर पलटने की क्षमता भी रखता है और खुले आम घूम रहा है।
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चार स्थाई व 77 अस्थाई गौशाला
आजमगढ़। जिले में कुल 81 गौ आश्रय स्थल है। जिसमें चार स्थाई तो 77 अस्थाई गौ आश्रय स्थल शामिल है। स्थाई गौ आश्रयस्थल मियापुर बासदेवा, सुरहन, गदनपुर हिच्छनपट्टी व मकरहा में बने है। वर्तमान में इन गौ आश्रय स्थलों पर 8757 छुट्टा मवेशियों को संरक्षित किया गया है। जिसमें 2693 मवेशी पशुपालकों को संरक्षण के लिए सौंप दिया गया है। लगभग 1400 लोगों ने इन मवेशियों को पालने के लिए गौ आश्रय स्थलों से लिया है।
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बेसहारा पशुओं को लगातार पकड़ आश्रय स्थल भेजा जा रहा है। लगभग दो हजार पशु आश्रय स्थल भेजे गए। इसके बाद भी यदि कहीं सड़क पर मवेशी घूम रहे है तो सूचना मिलने पर टीम भेज कर उन्हें पकड़वाया जाता है और गो आश्रय स्थल भेजा जाता है। लगातार यह कवायद विभाग की ओर से चल रही है। - डॉ. धर्मेंद्र पांडेय, सीवीओ, आजमगढ़।