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पशुपालन विभाग और दो बाबुओं के बीच घूम रही सात करोड़ के बंदरबांट की कहानी

Thu, 20 Feb 2020 11:15 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 20 Feb 2020 11:15 PM IST
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Investigation in payment of debarred land proceeded, action expected
आजमगढ़। सदर तहसील के गंभीरवन में निष्प्रयोज्य भूमि का सात करोड़ रुपये भुगतान करने के मामले में पूरी कहानी सीवीओ और दो बाबुओ के बीच घूम रही है। जिलाधिकारी की ओर से दावा किया जा रहा है कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है। एस-दो दिन में पूरे मामले से पर्दा उठा दिया जाएगा। एक बाबू को पहले ही चार्जशीट जारी की जा चुकी है।
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जनपद में सपा शासनकाल में पशु चिकित्सा महाविद्यालय बनाने की घोषणा की गई थी। लगभग 259 करोड़ की लागत से बनने वाले इस महाविद्यालय के लिए सदर तहसील के गंभीरवन में जमीन भी चिह्नित हुई थी। शासन से लगभग 20 करोड़ रुपये जमीन खरीद के लिए आए थे। काफी जमीनों का किसानों से बैनामा भी कराया गया था। जमीन के विवादित होने के कारण तत्कालीन जिलाधिकारी सुहाष एलवाई ने भुगतान पर रोक लगा दी थी। बाद में महाविद्यालय के जमीन विवादित होने के कारण जनपद से स्थानांतरित कर दिया गया है। पिछले छह-सात माह के दौरान इस विवादित भूमि का मिलीभगत कर बिना डीएम की अनुमति से लगभग सात करोड़ का भुगतान कर दिया गया। एक माह पहले मामला संज्ञान में आने पर डीएम एनपी सिंह ने इस पर जांच बिठाई थी। जांच अधिकारी सीडीओ आनंद कुमार शुल्क बनाए गए थे। तभी से मामले की जांच चल रही है। मामले के अमर उजाला ने उठाया तो प्रकरण के मुख्य आरोपी विशेष भूमि अध्यप्ति कार्यालय के लि पिक आनंद मिश्र को जार्जशीट जारी कर इसकी जांच एडीएम वित्त एवं राजस्व को दे दी गई। अभी ये जांच भी पूरी नहीं हुई है।
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पूछे जाने पर डीएम एनपी सिंह ने बताया कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है। सीडीओ ने एक-दो दिन में रिपोर्ट सौंपने की बात कही है। उन्होंने बताया कि विशेष भूमि अध्यप्ति अधिकारी एवं सीआरओ हरिशंकर को रोक और विवाद संबंधी जानकारी नहीं थी। विभाग के बाबुओं ने उन्हें धोखे में रखकर भुगतान की फाइल पर साइन कराए थे। इस तथ्य की भी जांच की जा रही है कि भुगतान के लिए सीवीओ की ओर से संतुति की गई थी कि नहीं? क्योंकि वर्तमान सीवीओ को प्रकरण की पूरी जानकारी थी। वहीं, मामले में भुगतान की गई धनराशि वापस लेने पर हाईकोर्ट की ओर से रोक भी लगा दी गई है।
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