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Azamgarh News: शब्बेदारी में गूंजे नौहे, इमाम जैनुल का ताबूत उठते ही नम हुईं आंखें
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बहाउद्दीनपुर गांव में अंजुमन शम शीरे हुसैनी की ओर से शब्बेदारी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी मेजवां (फूलपुर)। फूलपुर तहसील क्षेत्र के बहाउद्दीनपुर गांव में शनिवार की रात अंजुमन शम शीरे हुसैनी की ओर से शब्बेदारी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में देर रात तक विभिन्न अंजुमनों ने नौहा और मातम के जरिए हजरत इमाम हुसैन और शोहदाए करबला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। इस दौरान अठारह बनी हाशिम (ताबूत) की जियारत निकाली गई।
इमाम जैनुल आबदीन का ताबूत उठते ही उपस्थित अकीदतमंद भावुक हो उठे और माहौल गमगीन हो गया। मौलाना जीशान हैदर रिजवी ने अपने बयान में आयत और आदत के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
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वहीं, मौलाना इकरार खान आजमी ने करबला में हुए जुल्म और ज्यादती का मार्मिक वर्णन किया, जिसे सुनकर उपस्थित लोग रो पड़े।
कार्यक्रम की शुरुआत मशहूर शायर जफर आजमी के खिराज-ए-अकीदत से हुई। मोहम्मद सैफ और उनके साथियों ने सोजख्वानी पेश की। नौहा-मातम के क्रम में स्थानीय अंजुमन लश्करे हुसैनी के अलावा मेहमान अंजुमन जीनते इस्लाम, अंजुमन अंसारे हुसैनी कदीम और अंजुमन मखदूमिया ने भी तारीखी नौहे पेश किए।
रातभर चले शब्बेदारी कार्यक्रम में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग गम का प्रतीक काला लिबास पहनकर शामिल हुए।
जियारत के लिए निकाले गए सभी अलम और ताबूतों का परिचय शहनवाज हैदर ने कराया, जबकि कार्यक्रम का संचालन मौलाना इकरार हुसैन चमावां ने किया।
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कार्यक्रम में देर रात तक विभिन्न अंजुमनों ने नौहा और मातम के जरिए हजरत इमाम हुसैन और शोहदाए करबला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। इस दौरान अठारह बनी हाशिम (ताबूत) की जियारत निकाली गई।
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इमाम जैनुल आबदीन का ताबूत उठते ही उपस्थित अकीदतमंद भावुक हो उठे और माहौल गमगीन हो गया। मौलाना जीशान हैदर रिजवी ने अपने बयान में आयत और आदत के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
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वहीं, मौलाना इकरार खान आजमी ने करबला में हुए जुल्म और ज्यादती का मार्मिक वर्णन किया, जिसे सुनकर उपस्थित लोग रो पड़े।
कार्यक्रम की शुरुआत मशहूर शायर जफर आजमी के खिराज-ए-अकीदत से हुई। मोहम्मद सैफ और उनके साथियों ने सोजख्वानी पेश की। नौहा-मातम के क्रम में स्थानीय अंजुमन लश्करे हुसैनी के अलावा मेहमान अंजुमन जीनते इस्लाम, अंजुमन अंसारे हुसैनी कदीम और अंजुमन मखदूमिया ने भी तारीखी नौहे पेश किए।
रातभर चले शब्बेदारी कार्यक्रम में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग गम का प्रतीक काला लिबास पहनकर शामिल हुए।
जियारत के लिए निकाले गए सभी अलम और ताबूतों का परिचय शहनवाज हैदर ने कराया, जबकि कार्यक्रम का संचालन मौलाना इकरार हुसैन चमावां ने किया।