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मदरसों में अनियमित नियुक्तियों के मामले मेंएसआईटी जल्द सौंप सकती है अपनी रिपोर्ट, कइयों की उड़ी नींद
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आजमगढ़। जनपद के अनुदानित मदरसों अनियमित नियुक्तियों और अन्य खामियों की चल रही एसआईटी जांच जल्द पूरी होने जी उम्मीद जताई है। विवेचक ने मामले में तत्कालीन जांच अधिकारी के भी बयान दर्ज कर लिए हैं। इसके साथ ही कई अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य भी जुटाए गए हैं। नियम विरुद्ध तरीके से जांच में पकड़े गए शिक्षकों औक कर्मचारियों का वेतन पुन: बहाल कर देने का मामले में चल रही जांच की आंच निदेशालय के भी अधिकारियों और कर्मचारियों पर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल जांच के गति पकड़ने से फंसे अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की नींद उड़ी हुई है। जुलाई 2017 में शासन के निर्देश पर जनपद में 20 अनुदानित मदरसों की तीन सदस्यीय टीम ने जांच की थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न मदरसों में मानक समेत अन्य कमियों के साथ 16 शिक्षकों-कर्मचारियों की नियुक्ति को भी अनियमित बताया गया था। डीएम की रिपोर्ट पर इन शिक्षकों-कर्मचारियों के वेतन पर रोक लगा दी गई थी। धीरे-धीर उक्त शिक्षकों और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई न करते हुए सभी के वेतन बहाल कर दिए गए। मामले की जानकारी होने पर शासन में फिर शिकायत की गई। शासन के निर्देश पर मार्च 2020 में उक्त शिक्षकों-कर्मचारियों के वेतन पर फिर रोक लगाने के साथ ही प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। विवेचना की जिम्मेदारी निरीक्षक परशुराम सिंह को सौंपी गई है। पिछले दिनों एसआईटी की टीम ने संबंधित प्रबंधकों और आरोपी शिक्षकों एवं कर्मचारियों के बयान दर्ज किए थे।
अब प्रकरण में एक जांच अधिकारी के भी बयान दर्ज किए गए हैं। इसके साथ ही उ्से वर्ष 2017 में हुई जांच और उसमें मिले तथ्या के साक्ष्य भी तलब किए गए हैं। जनपद से भी कई अन्य महत्वपूर्ण सुराग जुटाए गए हैं। बताया जा रहा है कि उक्त साक्ष्य से जांच में काफी मदद मिलेगी। वहीं, एसआईटी की जांच का दायरा जनपद से लेकर निदेशालय तक पहुंच गया है। इससे निदेशालय के तत्कालीन अधिकारियों की भी परेशानी बढ़ने के आसार हैं। अमर उजाला से बातचीत में विवेचक परशुराम सिंह ने बताया कि जांच में कई तथ्य सामने आए हैं। कई नए साक्ष्य भी जुटाए गए हैं। एक माह के भीतर जांच पूरी कर इसकी रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
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अब प्रकरण में एक जांच अधिकारी के भी बयान दर्ज किए गए हैं। इसके साथ ही उ्से वर्ष 2017 में हुई जांच और उसमें मिले तथ्या के साक्ष्य भी तलब किए गए हैं। जनपद से भी कई अन्य महत्वपूर्ण सुराग जुटाए गए हैं। बताया जा रहा है कि उक्त साक्ष्य से जांच में काफी मदद मिलेगी। वहीं, एसआईटी की जांच का दायरा जनपद से लेकर निदेशालय तक पहुंच गया है। इससे निदेशालय के तत्कालीन अधिकारियों की भी परेशानी बढ़ने के आसार हैं। अमर उजाला से बातचीत में विवेचक परशुराम सिंह ने बताया कि जांच में कई तथ्य सामने आए हैं। कई नए साक्ष्य भी जुटाए गए हैं। एक माह के भीतर जांच पूरी कर इसकी रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
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