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Azamgarh News: आजमगढ़ मंडल में एक फीसदी मनरेगा श्रमिकों को नहीं मिला 100 दिन का काम

Mon, 15 Dec 2025 12:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 15 Dec 2025 12:00 AM IST
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In Azamgarh division, one percent of MNREGA workers did not get 100 days of work.
आजमगढ़। मनरेगा में जॉबकार्ड धारकों को 100 दिन का काम देने में अभी तक आजमगढ़ मंडल फिसड्डी साबित हो रहा है। ग्राम विकास विभाग की ओर से जॉबकार्ड धारक मनरेगा श्रमिकों को रोजगार देने के नाम पर करीब 295 करोड़ रुपये तो भुगतान किया गया। मनरेगा वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार मंडल की 3396 ग्राम पंचायतों में सक्रिय 6,53,283 में से महज 6012 श्रमिक परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिल सका। एक फीसदी मनरेगा मजदूरों को रोजगार नहीं मिला।
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क्षेत्र के पांच किमी के दायरे में जॉबकार्ड धारकों को 100 दिन का रोजगार देने का प्रावधान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना देती है। इन्हें गांव में रोजगार देने के नाम पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च तो होते हैं। लेकिन कुछ को ही लाभ मिल पाता है। वित्त वर्ष 2025-26 में आठ महीने बीत चुके हैं, नौवां माह बीतने वाला है। मंडल में कच्चे काम तो धड़ल्ले से कराए जा रहे हैं पर गरीबों को रोजगार देने में इजाफा नहीं हो रहा है। मनरेगा के लिए अप्रैल, मई, जून को पीक महीना माना जाता है। इसके बावजूद श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
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बलिया के दुबहड़ में एक तो पांच ब्लॉक में दहाई तक नहीं पहुंचे
आजमगढ़ मंडल में बलिया गरीबों को रोजगार देने के मामले में पिछड़ता दिख रहा है। 59 ग्राम पंचायतों वाली दुबहड़ ब्लॉक में अभी तक मात्र एक श्रमिक को ही 100 दिन का रोजगार मिल पाया है। तो वहीं जिले के पांच ब्लाक ऐसे हैं जो इस मामले में अभी तक दहाई का आंकड़ा भी छू नहीं सके हैं। बलिया के बैरिया ब्लॉक में मात्र पांच तो हनुमानगंज में दो मनरेगा श्रमिक को ही 100 दिन का काम किसी तरह मिल पाया है। वहीं, बेलहरी में दो, बेरुआरबारी में चार, मुरली छपरा में तीन श्रमिकों को ही किसी तरह 100 दिन का काम मिल पाया है।
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पीएमएवाई (जी) ने खोल दी रोजगार देने की पोल
गांव के गरीब ओर कच्चे मकानों मेें रहने वाले केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई जी) की तरफ से आवास दिया जाता है। इसमें हर लाभार्थी को उनके ही आवास पर 90 दिन की मनरेगा की तरफ से मजदूरी भी दी जाती है। हर वर्ष बड़ी संख्या में आवास का निर्माण होता था। इसमें आवास पर हर को 90 दिन का काम ही मिल जाता था। उधर ब्लॉक की तरफ से 10 दिनों का काम देकर उन्हें 100 दिन का काम दे दिया जाता था। इस वर्ष आवास योजना में नई सूची का निर्धारण हो रहा है। इसको लेकर कहीं भी अभी तक आवास का काम शुरू ही नहीं हो पाया। इससे मनरेगा श्रमिकों को काम देने की पोल खुलने लगी है।

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मंडल में 100 दिन के रोजगार का हाल-- (आंकड़े मनरेगा साइट पर 26 नवंबर तक के)
जिला - ग्रापं - जाॅबकार्ड - सक्रिय जॉबकार्ड - रोजगार - भुगतान (करोड़ में)
1- आजमगढ़ - 1811 - 618041 - 305637 - 4049 - 140.76
2- बलिया - 940 - 400638 - 183093 - 1118 - 74.78
3- मऊ - 645 - 354373 - 164553 - 845 - 79.59
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आजमगढ़ मंडल में जॉबकार्ड -13,73,052
सक्रिय जॉबकार्ड - 6,53,283
कुल ग्राम पंचायतें - 3396
रोजगार पाने वालों की संख्या - 6012
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मनरेगा श्रमिकों को 100 दिन का रोजगार देने के मामले की समीक्षा की गई है। हर विकास खंड को निर्देश दिए गए हैं कि अधिक से अधिक श्रमिकों को रोजगार दें। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
रविशंकर राय, संयुक्त आयुक्त विकास, आजमगढ़ मंडल।
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