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हत्यारोपी गिरफ्तार, सिर बरामद
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Sun, 12 Apr 2015 11:50 PM IST
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शहर कोतवाली क्षेत्र के बांधा बाईपास पर जिला पंचायत की बाउंड्री के पास हत्या कर फेंकी मिली युवक की सिर कटी लाश की शिनाख्त होने के 24 घंटे के भीतर पुलिस ने मामले की गुत्थी सुलझा दी। इस दौरान पुलिस टीम ने बद्दोपुर गांव निवासी अखिलेश और उसकी महिला मित्र दुलारी भारती को गिरफ्तार कर लिया।
हत्यारोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने पुराने पुल हरबंशपुर से युवक का सिर और मोबाइल बरामद कर लिया। कोतवाली में प्रेसवार्ता का आयोजन कर एएसपी नगर विनोद ने मामले का खुलासा किया। इस दौरान उन्होंने खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 15 हजार रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की। पुलिस ने बरामद सिर को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
एएसपी नगर के अनुसार, गिरफ्तार हत्यारोपी अखिलेश राम पुत्र रामनरेश शहर कोतवाली क्षेत्र के बद्दोपुर गांव का निवासी है। साथ ही मारा गया युवक योगेश कुमार का पड़ोसी है। घटना को अंजाम देने के लिए अखिलेश ने अपनी महिला मित्र दुलारी भारती पत्नी स्व. किसुन दयाल का सहारा लिया।
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दुलारी सिधारी थाने के सुंदरपुर (राहुल प्रेक्षागृह के पीछे मौजूद) गांव की रहने वाली है। एएसपी ने बताया कि योगेश कुमार पुत्र स्व. मुन्नर राम का हत्यारोपी की छोटी बहन से संबंध था। इस बात की जानकारी होने पर अखिलेश ने अपनी बहन की शादी कर दी लेकिन योगेश कुमार शादी होने के बाद भी उसकी बहन का पीछा नहीं छोड़ रहा था। अखिलेश की बहन को योगेश ब्लैकमेल करने लगा था।
इसकी जानकारी होने पर अखिलेश बहन की गृहस्थी बचाने के लिए अपनी महिला मित्र दुलारी भारती का सहयोग लिया। इस दौरान वह एक सिम कार्ड खरीदकर दुलारी को चार माह पूर्व दिया था। जिसके जरिए दुलारी योगेश कुमार से बात करने लगी थी। यही पर अखिलेश के बिछाए जाल में योगेश फंस गया।
योगेश दुलारी से मिलने के लिए आतुर था। इसी क्रम में तयशुदा समय और स्थान के हिसाब से दुलारी ने योगेश को 10 अप्रैल की रात बांधा बाईपास पर जिला पंचायत की बाउंड्रीवाल के पास बुलाया। यहां अखिलेश पहले से बांका लेकर छुपा था। जैसे ही योगेश वहां पहुंचा, दुलारी उसे लेकर नीचे उतर गई।
यहां पहले से छिपे अखिलेश ने योगेश पर प्रहार कर दिया। योगेश की मौत होने पर वह उसका सिर धड़ से अलग कर उसे बैग में रख लिया। इसके पीछे अखिलेश का मकसद था कि युवक के शव की शिनाख्त न हो लेकिन उसका ध्यान उसकी बाइक की तरफ नहीं गया। जिसमें युवक का ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य सामान थे। एएसपी ने बताया कि शव की शिनाख्त होने पर पुलिस युवक के गायब मोबाइल की तलाश में जुटी। इस दौरान सीडीआर निकालने पर पुलिस को एक ऐसा नंबर मिला, जिस पर योगेश 3000 सेकेंड लगातार बात किया था।
उस नंबर को ट्रेस करने पर पुलिस दुलारी तक, फिर इसके बाद अखिलेश तक पहुंची। इस मामले में मृत युवक के परिवार के नन्हेलाल ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें अज्ञात बदमाशों को आरोपित किया गया था।
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हत्यारोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने पुराने पुल हरबंशपुर से युवक का सिर और मोबाइल बरामद कर लिया। कोतवाली में प्रेसवार्ता का आयोजन कर एएसपी नगर विनोद ने मामले का खुलासा किया। इस दौरान उन्होंने खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 15 हजार रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की। पुलिस ने बरामद सिर को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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एएसपी नगर के अनुसार, गिरफ्तार हत्यारोपी अखिलेश राम पुत्र रामनरेश शहर कोतवाली क्षेत्र के बद्दोपुर गांव का निवासी है। साथ ही मारा गया युवक योगेश कुमार का पड़ोसी है। घटना को अंजाम देने के लिए अखिलेश ने अपनी महिला मित्र दुलारी भारती पत्नी स्व. किसुन दयाल का सहारा लिया।
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दुलारी सिधारी थाने के सुंदरपुर (राहुल प्रेक्षागृह के पीछे मौजूद) गांव की रहने वाली है। एएसपी ने बताया कि योगेश कुमार पुत्र स्व. मुन्नर राम का हत्यारोपी की छोटी बहन से संबंध था। इस बात की जानकारी होने पर अखिलेश ने अपनी बहन की शादी कर दी लेकिन योगेश कुमार शादी होने के बाद भी उसकी बहन का पीछा नहीं छोड़ रहा था। अखिलेश की बहन को योगेश ब्लैकमेल करने लगा था।
इसकी जानकारी होने पर अखिलेश बहन की गृहस्थी बचाने के लिए अपनी महिला मित्र दुलारी भारती का सहयोग लिया। इस दौरान वह एक सिम कार्ड खरीदकर दुलारी को चार माह पूर्व दिया था। जिसके जरिए दुलारी योगेश कुमार से बात करने लगी थी। यही पर अखिलेश के बिछाए जाल में योगेश फंस गया।
योगेश दुलारी से मिलने के लिए आतुर था। इसी क्रम में तयशुदा समय और स्थान के हिसाब से दुलारी ने योगेश को 10 अप्रैल की रात बांधा बाईपास पर जिला पंचायत की बाउंड्रीवाल के पास बुलाया। यहां अखिलेश पहले से बांका लेकर छुपा था। जैसे ही योगेश वहां पहुंचा, दुलारी उसे लेकर नीचे उतर गई।
यहां पहले से छिपे अखिलेश ने योगेश पर प्रहार कर दिया। योगेश की मौत होने पर वह उसका सिर धड़ से अलग कर उसे बैग में रख लिया। इसके पीछे अखिलेश का मकसद था कि युवक के शव की शिनाख्त न हो लेकिन उसका ध्यान उसकी बाइक की तरफ नहीं गया। जिसमें युवक का ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य सामान थे। एएसपी ने बताया कि शव की शिनाख्त होने पर पुलिस युवक के गायब मोबाइल की तलाश में जुटी। इस दौरान सीडीआर निकालने पर पुलिस को एक ऐसा नंबर मिला, जिस पर योगेश 3000 सेकेंड लगातार बात किया था।
उस नंबर को ट्रेस करने पर पुलिस दुलारी तक, फिर इसके बाद अखिलेश तक पहुंची। इस मामले में मृत युवक के परिवार के नन्हेलाल ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें अज्ञात बदमाशों को आरोपित किया गया था।