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इंदिरा के इंतजार में कड़कड़ाती ठंड में गुजरी वो रात

Wed, 18 Nov 2015 12:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़ Updated Wed, 18 Nov 2015 12:39 AM IST
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He passed the night in the freezing cold waiting for Indira
1977 में सत्ता छीनने के बाद कांग्रेसजनों में जान फूंकने के लिए 1989 में पूर्वांचल दौरे पर निकली इंदिरा गांधी को तब जनता ने हाथों हाथ लिया था।
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घने कोहरा और कड़ाके की सर्दी के बावजूद कार्यकर्ता कांपते हुए भोर में तीन बजे तक इंदिरा जी के आने का इंतजार करते रहे। देवरिया के देवरहवा बाबा से आशीर्वाद लेकर मऊ (तब आजमगढ़ का हिस्सा था)

पहुंची तो जिंदाबाद के जोशीले नारे ने कार्यकर्ताओं में उत्साह भर दिया। इंदिरा गांधी के कार्यक्रम के गवाह रहे दोनों कांग्रेसी नेताओं की आंखें पुराने दिनों को याद करते हुए हो आई थीं।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजकुमार पांडेय बताते हैं कि 1989 की बात है उस समय मैं जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष था। दिसंबर माह में कड़ाके की ठंड पड़ रही थी।
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इंदिरा गांधी ने गोरखपुर से पूर्वांचल का दौरा शुरू किया। वहां से वह देवरिया के लिए निकलीं। देवरहवा बाबा की कुटी पर पहुंची और उनसे आशीर्वाद लेने के बाद उनका काफिला मऊ के लिए चला, जहां तीन बजे उन्हें जनसभा को संबोधित करना था।

रास्ते में हालत यह थी वे जहां भी जाती थीं जनता उन्हें घेर लेती थी। वे भी गाड़ी से उतर कर उनका अभिवादन स्वीकार करती चल रही थी। इस दौरान ठंड भी उफान पर थी।

घने कोहरे के चलते दिन में तीन बजे की जगह वे सभा स्थल पर भोर के तीन बजे पर पहुंची। बावजूद इसके जनता मैदान में डटी रही। लोग उनका इंतजार कर रहे थे।

जैसे ही इंदिरा जी वहां पहुंची तो लोग बेकाबू हो गए हर व्यक्ति उनके करीब जाना चाह रहा था। सुरक्षा कर्मी रोक रहे थे पर वे आगे बढ़ कर लोगों मिल रही थी।

माइक संभालते हुए गांधी ने कहा था कि उन्होंने देश और समाज के लिए काम करती आई हैं। उन्हें सत्ता से बेदखल किया गया तो देश की हालत बद से बदतर हो गई। सभा के बाद वे बनारस के लिए निकल गईं।

पूर्व सांसद डा. संतोष सिंह कहते  हैं उस समय वह यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष थे। केंद्र और प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार बनी तो लोग इंदिरा जी बरगलाने लगे ताकि वह हार की समीक्षा न कर सके और जनता से भी उनकी दूरी बनी रहे।

उस समय संजय गांधी के निर्देश पर लखनऊ में यूथ कांग्रेस का अधिवेशन हुआ। इसमें इंदिरा गांधी को बुलाया गया। अधिवेशन में शामिल होने के बाद वह दिल्ली लौट गई।


इसके बाद उनके पूर्वांचल दौरे का कार्यक्रम बना। डा. सिंह कहते हैं कि जनता पार्टी से नाराज जनता से इंदिरा गांधी को अपार सहानुभूति मिल रही थी। इसका असर रहा कि अगले चुनाव में कांग्रेस फिर सत्ता में आई।
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