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मौसम की मार : 48 घंटे से कटाई बाधित, काले पड़ने लगे गेहूं के दाने
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अतरौलिया में आंधी के बाद बिखरी फसल को सुरक्षित करता किसान।
आजमगढ़। जिले में मात्र 12 घंटे के भीतर दो बार हुई 1.6 मिमी बारिश का असर अब फसल के दानों पर भी दिखने लगा है। लगातार 48 घंटे से गेहूं की कटाई और मड़ाई बाधित चल रही है।
गेहूं के डंठल नम होने से कंबाइन खेतों में नहीं चल रही है। बृहस्पतिवार को मौसम तो खुला रहा पर रह-रहकर धूप-छांव का दौर चलता रहा।
जिले में सवा दो लाख हेक्टेयर खेतों में गेहूं की बोवाई की गई थी। इसमें अभी तक करीब 45 फीसदी फसल की कटाई हो चुकी है, तो 55 फीसदी फसल खेतों में फंसी पड़ी है। मंगलवार की देर रात और बुधवार की सुबह हल्की बारिश होने से खेतों में खड़ी व काटकर छोड़ी गई फसलें नम हो गईं। इसी के चलते फसल की कटाई बंद हो गई। उधर, खेतों में काटकर बोझ बंधी फसल पर भी किसानों को मेहनत करनी पड़ रही है।
किसानों को उसे पलटना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने बृहस्पतिवार से मौसम खुलने की संभावना जताई थी, मौसम खुला भी रहा पर हल्की धूप के बीच चल रही ठंडी हवाएं गर्माहट न ला सकीं। रह-रहकर बादल आ जा रहे थे। गेहूं के डंठल नम होने से दानों की चमक पर असर पड़ रहा है। दाने मटमैले होने लगे हैं। राज्य मौसम प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि अब मौसम साफ हो जाएगा। धीरे-धीरे तापमान में बढ़ोतरी होगी।
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अतरौलिया : मौसम का रुख बदलते ही किसान फसल को सुरक्षित करने में जुट गए। कई किसान खेतों में ही गेहूं की बालियों को बांधकर इकट्ठा कर रहे हैं, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके। स्थानीय किसान ललित मौर्य, गिरीश मौर्य, किशोर और जगदीश ने बताया कि अचानक बदले मौसम ने डर का माहौल पैदा कर दिया है। उनका कहना है कि गनीमत रही कि हल्की बारिश हुई, अगर यह तेज हो गई होती तो भारी नुकसान उठाना पड़ सकता था।
मौसम खुलते ही करें कटाई, नहीं तो फूटने लगेंगी बालियां
जिला कृषि अधिकारी डॉ. गगनदीप सिंह ने बताया कि फसल के नम होने के बाद मौसम खुलते ही सर्वप्रथम किसान फसल को कटवाएं। अन्यथा नम फसल के सूखने पर खेतों में ही बालियां फूटने लगती हैं। इसके सबसे बड़ा कारण होता है कि बालियां भींगने के बाद कमजोर पड़ जाती है और इसे जैसे ही कड़ी धूप मिलते है कि यह चटकने लगती हैं।
बदले मौसम ने डर का माहौल पैदा कर दिया है। तैयार खड़ी गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। अब फसल बचाने की कोशिश की जा रही है।-वंशराज।
किसान फसल सुरक्षित करने की कोशिश में हैं। कोई कटाई तेज कर रहा है तो कोई उसे जल्द से जल्द घर पहुंचाने में जुटा है। ताकि नुकसान कम हो सके। - शीतला यादव।
मौसम जल्द सामान्य नहीं हुआ तो गेहूं की फसल को बड़ा नुकसान हो सकता है। प्रशासन किसानों को मौसम की सटीक जानकारी और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराए।-पोल्हावन यादव।
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गेहूं के डंठल नम होने से कंबाइन खेतों में नहीं चल रही है। बृहस्पतिवार को मौसम तो खुला रहा पर रह-रहकर धूप-छांव का दौर चलता रहा।
जिले में सवा दो लाख हेक्टेयर खेतों में गेहूं की बोवाई की गई थी। इसमें अभी तक करीब 45 फीसदी फसल की कटाई हो चुकी है, तो 55 फीसदी फसल खेतों में फंसी पड़ी है। मंगलवार की देर रात और बुधवार की सुबह हल्की बारिश होने से खेतों में खड़ी व काटकर छोड़ी गई फसलें नम हो गईं। इसी के चलते फसल की कटाई बंद हो गई। उधर, खेतों में काटकर बोझ बंधी फसल पर भी किसानों को मेहनत करनी पड़ रही है।
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किसानों को उसे पलटना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने बृहस्पतिवार से मौसम खुलने की संभावना जताई थी, मौसम खुला भी रहा पर हल्की धूप के बीच चल रही ठंडी हवाएं गर्माहट न ला सकीं। रह-रहकर बादल आ जा रहे थे। गेहूं के डंठल नम होने से दानों की चमक पर असर पड़ रहा है। दाने मटमैले होने लगे हैं। राज्य मौसम प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि अब मौसम साफ हो जाएगा। धीरे-धीरे तापमान में बढ़ोतरी होगी।
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अतरौलिया : मौसम का रुख बदलते ही किसान फसल को सुरक्षित करने में जुट गए। कई किसान खेतों में ही गेहूं की बालियों को बांधकर इकट्ठा कर रहे हैं, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके। स्थानीय किसान ललित मौर्य, गिरीश मौर्य, किशोर और जगदीश ने बताया कि अचानक बदले मौसम ने डर का माहौल पैदा कर दिया है। उनका कहना है कि गनीमत रही कि हल्की बारिश हुई, अगर यह तेज हो गई होती तो भारी नुकसान उठाना पड़ सकता था।
मौसम खुलते ही करें कटाई, नहीं तो फूटने लगेंगी बालियां
जिला कृषि अधिकारी डॉ. गगनदीप सिंह ने बताया कि फसल के नम होने के बाद मौसम खुलते ही सर्वप्रथम किसान फसल को कटवाएं। अन्यथा नम फसल के सूखने पर खेतों में ही बालियां फूटने लगती हैं। इसके सबसे बड़ा कारण होता है कि बालियां भींगने के बाद कमजोर पड़ जाती है और इसे जैसे ही कड़ी धूप मिलते है कि यह चटकने लगती हैं।
बदले मौसम ने डर का माहौल पैदा कर दिया है। तैयार खड़ी गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। अब फसल बचाने की कोशिश की जा रही है।-वंशराज।
किसान फसल सुरक्षित करने की कोशिश में हैं। कोई कटाई तेज कर रहा है तो कोई उसे जल्द से जल्द घर पहुंचाने में जुटा है। ताकि नुकसान कम हो सके। - शीतला यादव।
मौसम जल्द सामान्य नहीं हुआ तो गेहूं की फसल को बड़ा नुकसान हो सकता है। प्रशासन किसानों को मौसम की सटीक जानकारी और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराए।-पोल्हावन यादव।