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Azamgarh News: आधे अधूरे इंतजाम के बीच अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं आज से
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आजमगढ़। परिषदीय स्कूलों में सोमवार से अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं होनी है। हालांकि अब तक आधा कोर्स भी पूरा नहीं कराया जा सका है और परीक्षा का सारा बोझ स्कूल के प्रधानाचार्यों पर डाल दिया गया है।
परिषदीय विद्यालयों में वार्षिक और अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं कराने को लेकर विभाग की तरफ से बजट जारी होता था लेकिन दो सालों से शासन स्तर से बजट ही नहीं मिल रहा है। इस बार भी छह नवंबर से विद्यालयों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं शुरू होंगी। सोमवार को मौखिक परीक्षाएं होंगी। इसके बाद से लिखित परीक्षाएं होंगी। परीक्षा के लिए बजट नहीं मिलने से प्रधानाचार्यों में रोष है। उनका कहना है कि जब विभाग बजट ही मुहैया नहीं करा रहा है, तो परीक्षाएं क्यों करा रहा है। पहले परीक्षाओं के लिए पांच रुपये प्रति बच्चा प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल में पंजीकृत बच्चों के लिए 15 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से बजट दिया जाता था। अब अपने स्तर से प्रश्नपत्र तैयार कराकर परीक्षाएं कराने को कहा गया है। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह ने बताया कि परीक्षाओं में खर्च होने वाली धनराशि का इंतजाम करना विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर प्रधानाचार्य अपनी जेब से रुपये खर्च करने को मजबूर हैं।अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं 10 नवंबर तक चलेंगी।
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न कॉपी न पेपर, कैसे होंगी परीक्षाएं
परिषदीय विद्यालयों में होने वाली परीक्षाओं को लेकर प्रधानाचार्यों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही हैं। विद्यालयों में न तो परीक्षा के लिए कॉपियां उपलब्ध हैं और न ही पेपर बनाए गए हैं। ऐसे में परीक्षाएं किस तरह से होंगी यह भगवान भरोसे है। जिले में करीब चार लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। विभागीय अधिकारी भी अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं को लेकर सजग नहीं दिखाई दे रहे हैं।
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अर्द्धवार्षिक परीक्षा कराने के लिए शिक्षा महानिदेशक का आदेश आया है। अभी बजट नहीं मिला है, इसकी मांग की जाएगी ताकि प्रधानाध्यापकों को अपनी जेब से न भरना पड़े।
समीर, बीएसए आजमगढ़
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परिषदीय विद्यालयों में वार्षिक और अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं कराने को लेकर विभाग की तरफ से बजट जारी होता था लेकिन दो सालों से शासन स्तर से बजट ही नहीं मिल रहा है। इस बार भी छह नवंबर से विद्यालयों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं शुरू होंगी। सोमवार को मौखिक परीक्षाएं होंगी। इसके बाद से लिखित परीक्षाएं होंगी। परीक्षा के लिए बजट नहीं मिलने से प्रधानाचार्यों में रोष है। उनका कहना है कि जब विभाग बजट ही मुहैया नहीं करा रहा है, तो परीक्षाएं क्यों करा रहा है। पहले परीक्षाओं के लिए पांच रुपये प्रति बच्चा प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल में पंजीकृत बच्चों के लिए 15 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से बजट दिया जाता था। अब अपने स्तर से प्रश्नपत्र तैयार कराकर परीक्षाएं कराने को कहा गया है। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह ने बताया कि परीक्षाओं में खर्च होने वाली धनराशि का इंतजाम करना विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर प्रधानाचार्य अपनी जेब से रुपये खर्च करने को मजबूर हैं।अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं 10 नवंबर तक चलेंगी।
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न कॉपी न पेपर, कैसे होंगी परीक्षाएं
परिषदीय विद्यालयों में होने वाली परीक्षाओं को लेकर प्रधानाचार्यों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही हैं। विद्यालयों में न तो परीक्षा के लिए कॉपियां उपलब्ध हैं और न ही पेपर बनाए गए हैं। ऐसे में परीक्षाएं किस तरह से होंगी यह भगवान भरोसे है। जिले में करीब चार लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। विभागीय अधिकारी भी अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं को लेकर सजग नहीं दिखाई दे रहे हैं।
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अर्द्धवार्षिक परीक्षा कराने के लिए शिक्षा महानिदेशक का आदेश आया है। अभी बजट नहीं मिला है, इसकी मांग की जाएगी ताकि प्रधानाध्यापकों को अपनी जेब से न भरना पड़े।
समीर, बीएसए आजमगढ़