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लौकी भात खाकर शुरू किया अनुष्ठान
अमर उफजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Fri, 04 Nov 2016 11:48 PM IST
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छठ पूजा
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नहाय खाय के साथ शुक्रवार से छठ पूजा का महापर्व शुरू हो गया। पहले दिन शुक्रवार को घरों की सफाई कर महिलाओं ने पवित्रता के साथ लौकी की सब्जी और भात बनाकर उसे ग्रहण किया। छठ पर्व का अनुष्ठान शुरू किया। परिवार के लोगों ने इस भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।
छठ पूजा का आरंभ कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होता है और कार्तिक शुक्ल सप्तमी को इसका समापन होता है। पंचमी को दिनभर खरना का व्रत रखने वाले व्रती शाम के समय गुड़ से बनी खीर, रोटी और फल का सेवन प्रसाद रूप में करते हैं। शुक्रवार को कार्तिक शुक्ल चतुर्थी पर व्रतियों ने लौकी भात खाकर व्रत की शुरुआत की। इसके बाद, दूसरे दिन खरना से महिलाएं व्रत धारण करती हैं। यह व्रत 36 घंटे का निराजल होता है। खरना पूजन से ही घर में देवी षष्ठी का आगमन हो जाता है।
इस प्रकार भगवान सूर्य के इस पावन पर्व में शक्ति और ब्रह्मा दोनों की उपासना का फल एक साथ प्राप्त होता है। षष्ठी के दिन नदी या जलाशय के किनारे पर व्रती एकत्रित होकर पर अस्ताचलगामी और दूसरे दिन उदीयमान सूर्य को अर्ध्य देकर व्रत को समाप्त करते हैं। सगड़ी संवाददाता के अनुसार, तहसील क्षेत्र के कठैचा, कुदारन तिवारी, रजादेपुर सहित अन्य जगहों पर नहरों और पोखरों के किनारे झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है। कठैचा गांव के पास तो नहर में पानी ही नहीं है।
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लोग नहर पर वेदी बनाने के साथ ही नलकूप चलाकर पानी भरने में लगे हुए हैं। कुदारन तिवारी गांव के लोग शारदा सहायक खंड 32 नहर के किनारे पूजा वेदी बना रहे हैं। लेकिन साफ सफाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। स्वयं सफाई भी कर रहे हैं। ऐसे में गंदगी में पूजा करनी पड़ेगी।
रजादेपुर स्थित सड़क के किनारे तालाब में भी गंदगी का अंबार लगा हुआ है। लोग स्वयं वेदी बनाकर साफ-सफाई कर रहे हैं। तालाब में गंदगी और झाड़ियों के बीच पूजा करनी पड़ेगी। सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
फलों पर महंगाई के रंग
सेब 80 से 90 रु. किलो
केला 40 से 50 रुपये दर्जन,
अनार 120 से 140 रु.किलो
संतरा 80 रुपये किलो
अनान्नास 30 से 40 रुपये किलो
नाशपाती 100 रुपये किलो
मुसम्मी 80 रुपये किलो
नारियल 20 से 25 रुपये प्रति
अंगूर 200 रुपये किलो
आम 500 रुपये किलो
तरबूज 60 से 80 रु. (प्रति)
खरबूज 50 रुपये (प्रति)
बड़ा नीबू 20 से 30 रु. (प्रति)
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छठ पूजा का आरंभ कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होता है और कार्तिक शुक्ल सप्तमी को इसका समापन होता है। पंचमी को दिनभर खरना का व्रत रखने वाले व्रती शाम के समय गुड़ से बनी खीर, रोटी और फल का सेवन प्रसाद रूप में करते हैं। शुक्रवार को कार्तिक शुक्ल चतुर्थी पर व्रतियों ने लौकी भात खाकर व्रत की शुरुआत की। इसके बाद, दूसरे दिन खरना से महिलाएं व्रत धारण करती हैं। यह व्रत 36 घंटे का निराजल होता है। खरना पूजन से ही घर में देवी षष्ठी का आगमन हो जाता है।
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इस प्रकार भगवान सूर्य के इस पावन पर्व में शक्ति और ब्रह्मा दोनों की उपासना का फल एक साथ प्राप्त होता है। षष्ठी के दिन नदी या जलाशय के किनारे पर व्रती एकत्रित होकर पर अस्ताचलगामी और दूसरे दिन उदीयमान सूर्य को अर्ध्य देकर व्रत को समाप्त करते हैं। सगड़ी संवाददाता के अनुसार, तहसील क्षेत्र के कठैचा, कुदारन तिवारी, रजादेपुर सहित अन्य जगहों पर नहरों और पोखरों के किनारे झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है। कठैचा गांव के पास तो नहर में पानी ही नहीं है।
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लोग नहर पर वेदी बनाने के साथ ही नलकूप चलाकर पानी भरने में लगे हुए हैं। कुदारन तिवारी गांव के लोग शारदा सहायक खंड 32 नहर के किनारे पूजा वेदी बना रहे हैं। लेकिन साफ सफाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। स्वयं सफाई भी कर रहे हैं। ऐसे में गंदगी में पूजा करनी पड़ेगी।
रजादेपुर स्थित सड़क के किनारे तालाब में भी गंदगी का अंबार लगा हुआ है। लोग स्वयं वेदी बनाकर साफ-सफाई कर रहे हैं। तालाब में गंदगी और झाड़ियों के बीच पूजा करनी पड़ेगी। सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
फलों पर महंगाई के रंग
सेब 80 से 90 रु. किलो
केला 40 से 50 रुपये दर्जन,
अनार 120 से 140 रु.किलो
संतरा 80 रुपये किलो
अनान्नास 30 से 40 रुपये किलो
नाशपाती 100 रुपये किलो
मुसम्मी 80 रुपये किलो
नारियल 20 से 25 रुपये प्रति
अंगूर 200 रुपये किलो
आम 500 रुपये किलो
तरबूज 60 से 80 रु. (प्रति)
खरबूज 50 रुपये (प्रति)
बड़ा नीबू 20 से 30 रु. (प्रति)