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जमीन बैनामा कराने के बाद दाखिल खारिज नहीं करा सका बाढ़खंड
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आजमगढ़। सगड़ी तहसील पर बाढ़ खंड आजमगढ़ के सिंच पर्यवेक्षक ने बाढ़ खंड की भूमि पर कब्जा करने व बैनामा करने का आरोप लगाया है। उक्त भूमि के खारिज दाखिल कराने के लिए सिंच पर्यवेक्षक आज भी तहसील का चक्कर लगा रहे हैं। वहीं जिन किसानों ने जमीन का बैनाम ब़ाढ़ खंड को किया था उन्होंने उसी जमीन को दूसरों को बिक्री कर दिया है।
घाघरा नदी के किनारे महुला गढ़वल बांध पर वर्ष 2003 में घाघरा नदी की विभीषिका में सगड़ी तहसील के हैदराबाद में तटबंध टूट गया। जिसके बाद वर्ष 2004 में हैदराबाद के दर्जनों किसानों की भूमि को तटबंध बनाने के लिए बाढ़ खंड के द्वारा बैनामा कराया गया। जिसके बाद सगड़ी तहसील पर किसानों की भूमि खारिज दाखिल के लिए बाढ़ खंड विभाग के द्वारा न्यायालय में वाद दाखिल किया गया। बाढ़ खंड द्वारा पूर्व में कई बार प्रार्थना पत्र दिया जा चुका है अभी भी उक्त भूमि राम दरस व मुरलीधर पुत्रगण राम अवध व उमेश पुत्रगण रामाश्रय, रुंधवति पत्नी रामबली, कृष्ण मुरारी पुत्र रामसमुझ, शारदा पुत्र रामसूरत, अरविंद पुत्र जगदीश, रामाश्रय पुत्र सत्यनारायण, अवधेश पुत्र भूभपति,परशुराम व रामचंद्र पुत्र गण अवधेश, सुधाकर पुत्र राम सूरत, और दिवाकर पुत्र राम सूरत के नाम रह गई। जमीन अपने नाम होने पर उक्त किसानों ने भूमि को दूसरों को बेच दिया है। जिन लोगों ने भूमि को खरीदा है उनके द्वारा भूमि पर बाढ़ खंड द्वारा कार्य किए जाने पर रोका जा रहा है। जिसको लेकर बाढ़ खंड के सिंच पर्यवेक्षक शिवनाथ यादव तहसील का चक्कर काट रहे हैं। एसडीएम सगड़ी राजीव रतन सिंह ने कहा कि यह मामला हमारे संज्ञान में आया है। हम इसकी जांच करेंगे जो भी दोषी होगी उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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घाघरा नदी के किनारे महुला गढ़वल बांध पर वर्ष 2003 में घाघरा नदी की विभीषिका में सगड़ी तहसील के हैदराबाद में तटबंध टूट गया। जिसके बाद वर्ष 2004 में हैदराबाद के दर्जनों किसानों की भूमि को तटबंध बनाने के लिए बाढ़ खंड के द्वारा बैनामा कराया गया। जिसके बाद सगड़ी तहसील पर किसानों की भूमि खारिज दाखिल के लिए बाढ़ खंड विभाग के द्वारा न्यायालय में वाद दाखिल किया गया। बाढ़ खंड द्वारा पूर्व में कई बार प्रार्थना पत्र दिया जा चुका है अभी भी उक्त भूमि राम दरस व मुरलीधर पुत्रगण राम अवध व उमेश पुत्रगण रामाश्रय, रुंधवति पत्नी रामबली, कृष्ण मुरारी पुत्र रामसमुझ, शारदा पुत्र रामसूरत, अरविंद पुत्र जगदीश, रामाश्रय पुत्र सत्यनारायण, अवधेश पुत्र भूभपति,परशुराम व रामचंद्र पुत्र गण अवधेश, सुधाकर पुत्र राम सूरत, और दिवाकर पुत्र राम सूरत के नाम रह गई। जमीन अपने नाम होने पर उक्त किसानों ने भूमि को दूसरों को बेच दिया है। जिन लोगों ने भूमि को खरीदा है उनके द्वारा भूमि पर बाढ़ खंड द्वारा कार्य किए जाने पर रोका जा रहा है। जिसको लेकर बाढ़ खंड के सिंच पर्यवेक्षक शिवनाथ यादव तहसील का चक्कर काट रहे हैं। एसडीएम सगड़ी राजीव रतन सिंह ने कहा कि यह मामला हमारे संज्ञान में आया है। हम इसकी जांच करेंगे जो भी दोषी होगी उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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