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ईको टूरिज्म : पर्यटन सर्किट के रूप में डेवलप होंगे ताल और पोखरे
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आजमगढ़। पर्यटन के लिहाज से जनपद में धार्मिक और एतिहासिक के साथ वेटलैंड के रूप में विकसित होने के लिए तालों और बड़े पोखरों की भरमार है, लेकिन इनका विकास नहीं होने से ये अब अपना आकार भी खोने लगे हैं। जिलाधिकारी एनपी सिंह ने इन तालों और पोखरों को ईको टूरिज्म के रूप में विकसित करने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्रस्ताव के अनुसार इन तालों और पोखरों को पर्यटन सर्किट के रूप में डेवलप करने के लिए वन विभाग की ओर से वेटलैंड डेवलपमेंट बोर्ड को भेजा जाएगा। इसके साथ ही धार्मिक और एतिहासिक स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का कार्य पर्यटन विभाग की ओर से किया जाएगा। दोनों को आपस में जोड़ जनपद को पर्यटन के मानचित्र पर लाने की कोशिश की जाएगी।
जनपद में सगड़ी तहसील का ताल सलोना, ठेकमा ब्लाक जमुआवा या फिर रानी की सराय ब्लाक का बड़ैला ताल, ये ऐसे नाम है जो किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। सीजन में यहां विदेशी पक्षियों का आगमन भी होता है। इसे देखने के लिए लोग भी पहुंचते हैं। शिकारियों की भी चांदी आ जाती है। इन तालों की खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए कुछ प्रयास भी हुए, लेकिन सभी नाकाफी साबित हुए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जनपद में 10 से 25 हेक्येर के 62 तालाब, 25 से 50 हेक्टयर के 16 तालाब, 50 से 75 हेक्टेयर के नौ तालाब, 75 से 100 हेक्टेयर तक 100 तालाब हैं। 100 हेक्टेयर से ऊपर के चार तालाब हैं। जनपद में कुल 191 तालाब ऐसे हैं जिन्हें पर्यटन सर्किट के रूप में डेपलप कर दिया जाए तो ये हजारों लोगों के अजीविका के साधन भी बन सकते हैं। तालों के अलावा उक्त तालाबों में भी विदेशी पक्षियों का आगमन होता है।
जिलाधिकारी एनपी सिंह ने इन्हें पर्यटन सर्किट के रूप में डेवलप कराने की योजना बनाई है। येजना के तहत इसका प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी वन विभाग को दी गई है। ये प्रस्ताव मंजूरी के लिए वेटलैंड डेवलपमेंट बोर्ड को भेजा जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार जनपद में ईको पर्यटन के हब के रूप में डेवलप करने के लिए उक्त जल श्रोतों पर वॉच टावर, पर्यटकों को बैठने के लिए व्यवस्था, नेचर ट्रेल, कैन्टीन, मोटरबोट, व्याख्यान केन्द्र, एप्रोच रोड, शौचालय, रैन बसेरा, पौधरोपण और गेट का निर्माण कराया जाएगा। वन विभाग को कार्ययोजना बनाकर शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया है।
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जनपद में सगड़ी तहसील का ताल सलोना, ठेकमा ब्लाक जमुआवा या फिर रानी की सराय ब्लाक का बड़ैला ताल, ये ऐसे नाम है जो किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। सीजन में यहां विदेशी पक्षियों का आगमन भी होता है। इसे देखने के लिए लोग भी पहुंचते हैं। शिकारियों की भी चांदी आ जाती है। इन तालों की खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए कुछ प्रयास भी हुए, लेकिन सभी नाकाफी साबित हुए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जनपद में 10 से 25 हेक्येर के 62 तालाब, 25 से 50 हेक्टयर के 16 तालाब, 50 से 75 हेक्टेयर के नौ तालाब, 75 से 100 हेक्टेयर तक 100 तालाब हैं। 100 हेक्टेयर से ऊपर के चार तालाब हैं। जनपद में कुल 191 तालाब ऐसे हैं जिन्हें पर्यटन सर्किट के रूप में डेपलप कर दिया जाए तो ये हजारों लोगों के अजीविका के साधन भी बन सकते हैं। तालों के अलावा उक्त तालाबों में भी विदेशी पक्षियों का आगमन होता है।
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जिलाधिकारी एनपी सिंह ने इन्हें पर्यटन सर्किट के रूप में डेवलप कराने की योजना बनाई है। येजना के तहत इसका प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी वन विभाग को दी गई है। ये प्रस्ताव मंजूरी के लिए वेटलैंड डेवलपमेंट बोर्ड को भेजा जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार जनपद में ईको पर्यटन के हब के रूप में डेवलप करने के लिए उक्त जल श्रोतों पर वॉच टावर, पर्यटकों को बैठने के लिए व्यवस्था, नेचर ट्रेल, कैन्टीन, मोटरबोट, व्याख्यान केन्द्र, एप्रोच रोड, शौचालय, रैन बसेरा, पौधरोपण और गेट का निर्माण कराया जाएगा। वन विभाग को कार्ययोजना बनाकर शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया है।
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