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पूरा होगा कलाप्रेमियों-रंगकर्मियों का सपना, मिले 2.57 करोड़
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निर्माणाधीन हरिऔध कलाकेंद्र।- प्लान की खबर का फोटो
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। लगता है जनपद के कलाप्रेमियों एवं रंगकर्मियों का सपना जल्द पूरा हो सकता है। बजट के अभाव में रुके हरिऔध कलाभवन के निर्माण के लिए शासन की ओर से 2.57 करोड़ की धनराशि और जारी की गई है। इससे निर्माण कार्य के गति पकड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। बजट की कमी का मुद्दा पिछले माह हुई सीएम की समीक्षा बैठक में उठाया गया था। इस पर बजट की व्यवस्था कराने का आश्वासन मिला था।
साहित्य सम्राट अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध के नाम पर स्थापित हरिऔध कला भवन का निर्माण सपा सरकार में शुरु हुआ था। सरकार ने इसके लिए 17.17 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया था। सीएनडीएस को कार्यदायी संस्था नामित किया गया था। वर्ष 2013-14 में हरिऔध कला भवन के निर्माण को शुरू किया। इस कार्य को पूरा तो दो सालों में ही हो जाना चाहिए थी, लेकिन बजट देर से मिलने के कारण सात वर्ष बीत गए, अभी तक इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका है। स्वीकृति मिलने के बाद शासन ने आठ करोड़ रुपये जारी किए थे। तीन अगस्त 2016 को शासन से मात्र एक करोड़ रुपये की स्वीकृति हुई, जो ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई। भाजपा की सरकार बनी तो वित्तीय वर्ष 2017-18 में एक करोड़ रुपये और अवमुक्त किए गए। कुल 10 करोड़ रुपये में अभी लगभग 70 फीसद कार्य ही हो पाया है। बजट न मिलने से काम प्रभावित होने का मुद्दा पिछले माह मुख्यमंत्री की मंडलीय समीक्षा बैठक में उठा था। इस पर जल्द बजट जारी करने की बात कही गई थी। अब शासन की ओर से वित्तीय वर्ष 2020-21 में प्रावधानित तीन करोड़ के सापेक्ष 2.57 करोड़ की धनराशि दी गई है। इससे निर्माण कार्य को गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री की मंडलीय समीक्षा बैठक में धन की कमी का मुद्दा रखा गया था। उन्होंने जल्द धन आवंटन की बात कही थी। धन का आवंटन होने से कार्य में तेजी जाएगी। जल्द कार्यपूरा करा लिया जाएगा।
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राजेश कुमार, डीएम
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साहित्य सम्राट अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध के नाम पर स्थापित हरिऔध कला भवन का निर्माण सपा सरकार में शुरु हुआ था। सरकार ने इसके लिए 17.17 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया था। सीएनडीएस को कार्यदायी संस्था नामित किया गया था। वर्ष 2013-14 में हरिऔध कला भवन के निर्माण को शुरू किया। इस कार्य को पूरा तो दो सालों में ही हो जाना चाहिए थी, लेकिन बजट देर से मिलने के कारण सात वर्ष बीत गए, अभी तक इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका है। स्वीकृति मिलने के बाद शासन ने आठ करोड़ रुपये जारी किए थे। तीन अगस्त 2016 को शासन से मात्र एक करोड़ रुपये की स्वीकृति हुई, जो ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई। भाजपा की सरकार बनी तो वित्तीय वर्ष 2017-18 में एक करोड़ रुपये और अवमुक्त किए गए। कुल 10 करोड़ रुपये में अभी लगभग 70 फीसद कार्य ही हो पाया है। बजट न मिलने से काम प्रभावित होने का मुद्दा पिछले माह मुख्यमंत्री की मंडलीय समीक्षा बैठक में उठा था। इस पर जल्द बजट जारी करने की बात कही गई थी। अब शासन की ओर से वित्तीय वर्ष 2020-21 में प्रावधानित तीन करोड़ के सापेक्ष 2.57 करोड़ की धनराशि दी गई है। इससे निर्माण कार्य को गति मिलेगी।
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मुख्यमंत्री की मंडलीय समीक्षा बैठक में धन की कमी का मुद्दा रखा गया था। उन्होंने जल्द धन आवंटन की बात कही थी। धन का आवंटन होने से कार्य में तेजी जाएगी। जल्द कार्यपूरा करा लिया जाएगा।
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राजेश कुमार, डीएम