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डा. सोनी पांडेय को मिला यशपाल कथा सम्मान
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लखनऊ के हिन्दी भवन के यशपाल सभागार में डा. सोनी पांडेय को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित करते विधान ?
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। मशहूर लेखिका डॉ. सोनी पांडेय को उत्तर प्रदेश हिंदी साहित्य संस्थान की ओर से उनकी कहानी ‘बलमा जी का स्टूडियो’ के लिए यशपाल कथा सम्मान से नवाजा गया है। उन्हें यह पुरस्कार सोमवार को लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने दिया।
मूलरूप से बलिया की रहने वाली डॉ. पांडेय सिधारी स्थित कृष्णा नगर कालोनी में रहती हैं। उनकी अब तक तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्ष 2014 में इनका कविता संग्रह ‘मन की खुलती गिरहें’ प्रकाशित हुई। 2018 में कहानी संग्रह ‘बलमा जी का स्टूडियो’ का प्रकाशन हुआ। जिसके लिए इन्हें इस साल उत्तर प्रदेश हिंदी साहित्य संस्थान द्वारा यशपाल कथा सम्मान के लिए चुना गया। उनको यह सम्मान मिलने से जनपद के साहित्यकारों में हर्ष व्याप्त है। डा. सोनी द्वारा संपादित ‘कथाकार उषा किरण खान की कहानियों के विविध आयाम’ और स्त्री लेखिकाओं के संस्मरणों पर केंद्रित ‘मैं और मेरे बचपन के दिन’ प्रकाशाधीन है। 2019 में वस्तु शिल्प ‘निराला का साहित्य’ प्रकाशित हुआ।
इससे पहले मिले सम्मान
यशपाल कथा सम्मान से पहले भी डा. सोनी पांडेय को कई सम्मान मिल चुके हैं। इसमें इनकी पहली कविता की किताब ‘मन की खुलती गिरहें’ को 2015 का शीला सिद्धांतकर सम्मान मिला। इसके बाद 2016 में सेतु पत्रिका की आनलाइन प्रतियोगिता में इन्हें अंतर्राष्ट्रीय सेतु कविता सम्मान से नवाजा गया। फिर 2018 में इन्हें बलिया की संकल्प संस्था द्वारा संकल्प साहित्य सर्जना सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।
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मूलरूप से बलिया की रहने वाली डॉ. पांडेय सिधारी स्थित कृष्णा नगर कालोनी में रहती हैं। उनकी अब तक तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्ष 2014 में इनका कविता संग्रह ‘मन की खुलती गिरहें’ प्रकाशित हुई। 2018 में कहानी संग्रह ‘बलमा जी का स्टूडियो’ का प्रकाशन हुआ। जिसके लिए इन्हें इस साल उत्तर प्रदेश हिंदी साहित्य संस्थान द्वारा यशपाल कथा सम्मान के लिए चुना गया। उनको यह सम्मान मिलने से जनपद के साहित्यकारों में हर्ष व्याप्त है। डा. सोनी द्वारा संपादित ‘कथाकार उषा किरण खान की कहानियों के विविध आयाम’ और स्त्री लेखिकाओं के संस्मरणों पर केंद्रित ‘मैं और मेरे बचपन के दिन’ प्रकाशाधीन है। 2019 में वस्तु शिल्प ‘निराला का साहित्य’ प्रकाशित हुआ।
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इससे पहले मिले सम्मान
यशपाल कथा सम्मान से पहले भी डा. सोनी पांडेय को कई सम्मान मिल चुके हैं। इसमें इनकी पहली कविता की किताब ‘मन की खुलती गिरहें’ को 2015 का शीला सिद्धांतकर सम्मान मिला। इसके बाद 2016 में सेतु पत्रिका की आनलाइन प्रतियोगिता में इन्हें अंतर्राष्ट्रीय सेतु कविता सम्मान से नवाजा गया। फिर 2018 में इन्हें बलिया की संकल्प संस्था द्वारा संकल्प साहित्य सर्जना सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।
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