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कर्ज के बोझ से दबे किसान ने फांसी लगाकर दी जान
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Tue, 29 Nov 2016 11:51 PM IST
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गंभीरपुर थाना क्षेत्र के मईखरगपुर गांव निवासी कर्ज के बोझ तले दबे एक किसान ने फांसी लगाकर जान दे दी। उसकी लाश मंगलवार की दोपहर गांव के एक इंटर कालेज के पीछे बबूल के पेड़ से लटकती मिली। लाश देख कालेज की छात्राओं ने शोर किया तो गांव के लोगों को इसकी जानकारी हुई। पुलिस ने किसान की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
मईखरगपुर गांव निवासी रामयश यादव (45) पुत्र मंशी चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था। वह दो पुत्री और दो पुत्रों का पिता था। रामयश घर पर रहकर खेतीबारी करता था। रामयश यादव मंगलवार की सुबह घर से निकला था। परिवार के लोगों ने समझा कि वह कहीं गए होंगे। गांव में स्थित इंटर कालेज के पीछे पोखरे के टीले पर बबूल के पेड़ से फांसी से लटकती रामयश की लाश देखी गई। दिन में करीब 11 बजे स्कूल की छात्राएं उस तरफ गई तो उनकी नजर लटकती लाश पर पड़ी।
छात्राओं ने बगल में भैंस चरा रहे रामयश के भाई रामपलट को इसकी जानकारी दी। रामपलट ने अपने भाई की लाश को पहचाना और घर वालों को जानकारी दी। कुछ ही देर में वहां गंभीरपुर थाने की पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजवा दिया। रामयश के बेटे प्रदीप ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई और खेती के लिए उनके पिता रामयश ने गांव के कई लोगों से उधार लिया था लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से उधार नहीं चुका पा रहे थे। इसलिए आए दिन तगादा करने वाले घर पहुंच रहे थे। हम भाई बहनों के पढ़ाई के लिए वह एक लाख रुपये से अधिक कर्ज ले चुके थे। आर्थिक तंगी के चलते ही उन्होंने यह कदम उठाया है। घटना के बाद परिवार का रो-रोकर हाल बेहाल है।
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मईखरगपुर गांव निवासी रामयश यादव (45) पुत्र मंशी चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था। वह दो पुत्री और दो पुत्रों का पिता था। रामयश घर पर रहकर खेतीबारी करता था। रामयश यादव मंगलवार की सुबह घर से निकला था। परिवार के लोगों ने समझा कि वह कहीं गए होंगे। गांव में स्थित इंटर कालेज के पीछे पोखरे के टीले पर बबूल के पेड़ से फांसी से लटकती रामयश की लाश देखी गई। दिन में करीब 11 बजे स्कूल की छात्राएं उस तरफ गई तो उनकी नजर लटकती लाश पर पड़ी।
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छात्राओं ने बगल में भैंस चरा रहे रामयश के भाई रामपलट को इसकी जानकारी दी। रामपलट ने अपने भाई की लाश को पहचाना और घर वालों को जानकारी दी। कुछ ही देर में वहां गंभीरपुर थाने की पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजवा दिया। रामयश के बेटे प्रदीप ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई और खेती के लिए उनके पिता रामयश ने गांव के कई लोगों से उधार लिया था लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से उधार नहीं चुका पा रहे थे। इसलिए आए दिन तगादा करने वाले घर पहुंच रहे थे। हम भाई बहनों के पढ़ाई के लिए वह एक लाख रुपये से अधिक कर्ज ले चुके थे। आर्थिक तंगी के चलते ही उन्होंने यह कदम उठाया है। घटना के बाद परिवार का रो-रोकर हाल बेहाल है।
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