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मेहरबानी से घूम रहे थाने पर हमला करने के आरोपी
Updated Mon, 07 May 2018 11:08 PM IST
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आजमगढ़। आज से तीन वर्ष पूर्व गंभीरपुर थाने पर हमलाकर लाकअप में बंद लकड़ी तस्कर को छुड़ा ले जाने वाले आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। अधिकारियों की मेहरबानी से खुलेआम घूम रहे आरोपी कानून को मुंह चिढ़ा रहे हैं। वहीं, हमले में घायल पुलिसवाले मन मसोसकर रह जा रहे हैं। मिलीभगत का आलम यह है कि आरोपियों की शिकायत पर तात्कालीन एसपी ने विवेचना दूसरे थाने को ट्रांसफर कर दी। सात अलग-अलग थानाध्यक्षों ने घटना की जांच पड़ताल कर मुकदमे से करीब 100 आरोपियों का नाम निकाल दिया। शेष नौ नामजद आरोपियों के खिलाफ बगैर गिरफ्तारी के ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई।
तीन मई 2015 को गंभीरपुर थाना क्षेत्र के मंगरावा गांव निवासी लकड़ी तस्कर मुकिम पुत्र शमीम बगैर किसी सक्षम अधिकारी से परमिशन लिए बिना ही प्रतिबंधित पेड़ कटवा रहा था। इसकी सूचना मिलने पर तात्कालीन एसओ अनिल प्रकाश सिंह गांव पहुंचे। पुलिस को देख अन्य आरोपी फरार हो गए, लेकिन पुलिस ने मुकिन को हिरासत में लेकर थाने लाई और उसे लाकअप में बंद कर अन्य आरोपियों को पकडने के लिए गांव चली गई। इसी दिन शाम करीब छह बजे थाने का स्टाफ अपने-अपने काम में व्यस्त था। तभी भारी संख्या में ग्रामीण हाथ में लाठी, डंडा, कुल्हाड़ी सहित अन्य धारदार हथियार से लैस होकर थाने पर हमला बोलते हुए तोड़फोड़ करने लगे। साथ ही मौजूद पुलिसवालों को मारपीटकर घायल करते हुए लाकअप में बंद मुकिम को छुड़ा ले गए। बता दें कि वर्ष 2011 में इसी थाना क्षेत्र में लकड़ी तस्करों ने सिपाही नित्यानंद सिंह की गोली मारकर हत्या भी कर चुके हैं। घटना के संबंध में गांव के हाशिम, अकमल, गुफरान, आजम, फैजान, सऊफ, मुकिम, अमान और असलम के विरुद्ध नामजद और 100 अज्ञात के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मामला पुलिस की साख से जुड़ा होने की वजह से पुलिस अपनी जांच पड़ताल तेज की और चार मई को 43 अन्य आरोपियों के नाम और पांच मई को 11 और आरोपियों का नाम प्रकाश में ला दी। इस प्रकार कुल 63 अज्ञात का नाम ज्ञात हो गया। इसीबीच दवाब के चलते एसओ बदल गए और दूसरे एसओ हुए सुरेंद्र वर्मा। इन्हें ने दो आरोपियों अब्दुल रहमान और नायब अली को गिरफ्तार किया। पुलिस की सख्ती होने पर पीड़ितों ने तात्कालीन एसपी को शिकायती पत्र दिया। जून 2015 को विवेचना एसओ सरायमीर को ट्रांसफर कर दी गई और मिथिलेश मिश्रा ने जांच शुरू की, लेकिन मामला अधूरा रह गया। इसके बाद अश्वनी पांडेय, रंजीत सिंह, योगेंद्र बहादुर सिंह ने अपने-अपने स्तर से जांच की, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। चार जनवरी 2016 को सरायमीर थाने के तात्कालीन प्रभारी निरीक्षक ज्ञानेश्वर मिश्रा ने अन्य 100 आरोपियों का नाम हटाकर शेष नामजद किए गए नौ आरोपियों की बगैर गिरफ्तारी किए ही रिपोर्ट न्यायालय में सौंप दी।
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लापरवाही पर दो दरोगाओं को मिल चुकी है बैडइंट्री
आजमगढ़। गंभीरपुर थाने पर हमलाकर लकड़ी तस्कर को छुड़ा ले जाने की घटना से भले ही पुलिस की साख पर बट्टा लग गया। लेकिन चाटुकारिता के चलते पुलिस विभाग के दरोगाओं ने ही आरोपियों को लाभ पहुंचाया। मामला संज्ञान में आने पर पूर्व डीजीपी ने दोनों दरोगाओं को बैड इंट्री दे दी थी। हालांकि राजनीतिक लाभ के चलते उसे समाप्त कर दिया गया। जिन दरोगा को बैडइंट्री दी गई थी। उसमें सरायमीर थाने के पूर्व थानाध्यक्ष अश्वनी पांडेय और रंजीत सिंह का नाम शामिल है। विवेचना में लापरवाही बरतने के बाद भी रंजीत सिंह को जहां प्रमोशन देकर इंस्पेक्टर बना दिया गया। वहीं अश्वनी पांडेय वर्तमान समय में महराजगंज थाना प्रभारी हैं।
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किन परिस्थितियों में निकाला गया नाम
आजमगढ़। गंभीरपुर थाने पर हमलाकर आरोपी को छुड़ा ले जाने वाले अज्ञात बदमाशों का नाम और पता पुलिस ने बड़ी मुश्किल से पता लगाते हुए 63 लोगों का नाम प्रकाश में लाई थी। राजनीतिक दबाव के चलते जब आरोपियों की शिकायत पर इस मामले की विवेचना सरायमीर थाने को सौंप दी गई तो विवेचक ने अपने ही विभाग के अधिकारियों की रिपोर्ट को झूठा बताते हुए 63 प्रकाश में आने वालों के अलावा अन्य के नामों को खारिज करते हुए सिर्फ नौ नामजद आरोपियों के खिलाफ ही चार्जशीट तैयार की। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किन परिस्थिति में एक दरोगा ने अपने ही विभाग के दूसरे दरोगा की रिपोर्ट को झूठा बताते हुए उनका नाम निकाल दिया। यह समझ में नहीं आ रहा।
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लापरवाही के चलते सरायमीर में हुई घटना
आजमगढ़। गंभीरपुर और सरायमीर थाने की सीमाएं सटी हुई हैं। गंभीरपुर थाने पर हमला करने वालों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई न होने का परिणाम रहा कि मनबढ़ों का हौसला बढ़ा हुआ था और इन सभी ने 28 अप्रैल 2018 को ना केवल सरायमीर थाने पर हमलाकर तोडफ़ोड़, पथराव किया। बल्कि पुलिस बूथ को भी फूंक दिया। क्योंकि अपराधी यह जान रहते थे कि जिस प्रकार से गंभीरपुर थाने पर हमला करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की बजाय पुलिस ने लिपापोती कर दिया। उसी तरह से इस मामले में भी कोई खास कार्रवाई नहीं होगी। इसी का परिणाम रहा कि सरायमीर में यह घटना हुई।
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मामला संज्ञान में नहीं है, इसकी समीक्षात्मक जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने पर दोषी पुलिसवालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
- विजय भूषण, डीआईजी, आजमगढ़ परिक्षेत्र
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तीन मई 2015 को गंभीरपुर थाना क्षेत्र के मंगरावा गांव निवासी लकड़ी तस्कर मुकिम पुत्र शमीम बगैर किसी सक्षम अधिकारी से परमिशन लिए बिना ही प्रतिबंधित पेड़ कटवा रहा था। इसकी सूचना मिलने पर तात्कालीन एसओ अनिल प्रकाश सिंह गांव पहुंचे। पुलिस को देख अन्य आरोपी फरार हो गए, लेकिन पुलिस ने मुकिन को हिरासत में लेकर थाने लाई और उसे लाकअप में बंद कर अन्य आरोपियों को पकडने के लिए गांव चली गई। इसी दिन शाम करीब छह बजे थाने का स्टाफ अपने-अपने काम में व्यस्त था। तभी भारी संख्या में ग्रामीण हाथ में लाठी, डंडा, कुल्हाड़ी सहित अन्य धारदार हथियार से लैस होकर थाने पर हमला बोलते हुए तोड़फोड़ करने लगे। साथ ही मौजूद पुलिसवालों को मारपीटकर घायल करते हुए लाकअप में बंद मुकिम को छुड़ा ले गए। बता दें कि वर्ष 2011 में इसी थाना क्षेत्र में लकड़ी तस्करों ने सिपाही नित्यानंद सिंह की गोली मारकर हत्या भी कर चुके हैं। घटना के संबंध में गांव के हाशिम, अकमल, गुफरान, आजम, फैजान, सऊफ, मुकिम, अमान और असलम के विरुद्ध नामजद और 100 अज्ञात के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मामला पुलिस की साख से जुड़ा होने की वजह से पुलिस अपनी जांच पड़ताल तेज की और चार मई को 43 अन्य आरोपियों के नाम और पांच मई को 11 और आरोपियों का नाम प्रकाश में ला दी। इस प्रकार कुल 63 अज्ञात का नाम ज्ञात हो गया। इसीबीच दवाब के चलते एसओ बदल गए और दूसरे एसओ हुए सुरेंद्र वर्मा। इन्हें ने दो आरोपियों अब्दुल रहमान और नायब अली को गिरफ्तार किया। पुलिस की सख्ती होने पर पीड़ितों ने तात्कालीन एसपी को शिकायती पत्र दिया। जून 2015 को विवेचना एसओ सरायमीर को ट्रांसफर कर दी गई और मिथिलेश मिश्रा ने जांच शुरू की, लेकिन मामला अधूरा रह गया। इसके बाद अश्वनी पांडेय, रंजीत सिंह, योगेंद्र बहादुर सिंह ने अपने-अपने स्तर से जांच की, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। चार जनवरी 2016 को सरायमीर थाने के तात्कालीन प्रभारी निरीक्षक ज्ञानेश्वर मिश्रा ने अन्य 100 आरोपियों का नाम हटाकर शेष नामजद किए गए नौ आरोपियों की बगैर गिरफ्तारी किए ही रिपोर्ट न्यायालय में सौंप दी।
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लापरवाही पर दो दरोगाओं को मिल चुकी है बैडइंट्री
आजमगढ़। गंभीरपुर थाने पर हमलाकर लकड़ी तस्कर को छुड़ा ले जाने की घटना से भले ही पुलिस की साख पर बट्टा लग गया। लेकिन चाटुकारिता के चलते पुलिस विभाग के दरोगाओं ने ही आरोपियों को लाभ पहुंचाया। मामला संज्ञान में आने पर पूर्व डीजीपी ने दोनों दरोगाओं को बैड इंट्री दे दी थी। हालांकि राजनीतिक लाभ के चलते उसे समाप्त कर दिया गया। जिन दरोगा को बैडइंट्री दी गई थी। उसमें सरायमीर थाने के पूर्व थानाध्यक्ष अश्वनी पांडेय और रंजीत सिंह का नाम शामिल है। विवेचना में लापरवाही बरतने के बाद भी रंजीत सिंह को जहां प्रमोशन देकर इंस्पेक्टर बना दिया गया। वहीं अश्वनी पांडेय वर्तमान समय में महराजगंज थाना प्रभारी हैं।
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किन परिस्थितियों में निकाला गया नाम
आजमगढ़। गंभीरपुर थाने पर हमलाकर आरोपी को छुड़ा ले जाने वाले अज्ञात बदमाशों का नाम और पता पुलिस ने बड़ी मुश्किल से पता लगाते हुए 63 लोगों का नाम प्रकाश में लाई थी। राजनीतिक दबाव के चलते जब आरोपियों की शिकायत पर इस मामले की विवेचना सरायमीर थाने को सौंप दी गई तो विवेचक ने अपने ही विभाग के अधिकारियों की रिपोर्ट को झूठा बताते हुए 63 प्रकाश में आने वालों के अलावा अन्य के नामों को खारिज करते हुए सिर्फ नौ नामजद आरोपियों के खिलाफ ही चार्जशीट तैयार की। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किन परिस्थिति में एक दरोगा ने अपने ही विभाग के दूसरे दरोगा की रिपोर्ट को झूठा बताते हुए उनका नाम निकाल दिया। यह समझ में नहीं आ रहा।
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लापरवाही के चलते सरायमीर में हुई घटना
आजमगढ़। गंभीरपुर और सरायमीर थाने की सीमाएं सटी हुई हैं। गंभीरपुर थाने पर हमला करने वालों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई न होने का परिणाम रहा कि मनबढ़ों का हौसला बढ़ा हुआ था और इन सभी ने 28 अप्रैल 2018 को ना केवल सरायमीर थाने पर हमलाकर तोडफ़ोड़, पथराव किया। बल्कि पुलिस बूथ को भी फूंक दिया। क्योंकि अपराधी यह जान रहते थे कि जिस प्रकार से गंभीरपुर थाने पर हमला करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की बजाय पुलिस ने लिपापोती कर दिया। उसी तरह से इस मामले में भी कोई खास कार्रवाई नहीं होगी। इसी का परिणाम रहा कि सरायमीर में यह घटना हुई।
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मामला संज्ञान में नहीं है, इसकी समीक्षात्मक जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने पर दोषी पुलिसवालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
- विजय भूषण, डीआईजी, आजमगढ़ परिक्षेत्र