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तीन विभागों में घोटाला, एक विभाग अधिकारी दोषी
Updated Sun, 10 Dec 2017 11:21 PM IST
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50 स्कूल-कालेजों को वर्ष 2007-08 से 2012-13 तक तीन विभागों की ओर से भेजी गई 50 करोड़ से ज्यादा की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के गबन के मामले में जांच टीम को अभिलेख मुहैया न कराने पर वर्तमान समाज कल्याण अधिकारी को दोषी साबित करने के आदेश ने जांच पर ही सवाल उठा दिए हैं।
अभिलेख न तैयार कर ही उक्त समय में अधिकारियों, बाबुओं, स्कूल-कालेजों और बैंकों की मिलीभगत से ये घपला किया गया था। जिस तरह से 10 टीमों की ओर से जांच की गई और कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं, उससे यही लगता है कि जांच को गोलमोल करने की तैयारी कर ली गई है। फिलहाल जिलाधिकारी की ओर से समाज कल्याण अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जिले में 2007-08 से 2012-13 तक समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति और पेंशन आदि के मद में लगभग 150 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। शिकायत के बाद 2014 में तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से सीडीओ की अध्यक्षता नौ सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। जांच के दौरान 2.86 करोड़ के घोटाले के साक्ष्य मिलने पर दो थानों में चार एफआईआर कराई गई थी और तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी, डीआईओएस समेत 34 लोगों को नामजद किया गया था। साथ ही 50 करोड़ के और घोटाले की पुष्टी की बात कही गई थी। इसके बाद डीसीबी समेत सात लोगों के खिलाफ 2.86 करोड़ की रिकवरी नोटिस जारी की गई थी। 50 स्कूल-कालेजों को उक्त समय के छात्रों के सत्यापन के लिए नोटिस जारी किया गया था। इनमें उक्त समय में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के 50 करोड़ से ज्यादा की रकम भेजी गई थी, जबकि सबी स्कूल कालजों की ओर से छात्रों की संख्या काफी बढ़ाकर बता दी गई थी। इसी दौरान कमिश्नर के निर्देश पर जांच जल्द पूरी करने के लिए सीडीओ अभिषेक सिंह की ओर से इन स्कूलों की जांच के लिए सितंबर में 10 कमेटी का गठन कर दिया गया। जल्द से जल्द जांच पूरी करने को कहा गया। डीसीबी के संदिग्ध खातों के साथ सभी सीबीएस बैंक के खातों, जिसमें छात्रवृत्ति भेजी गई थी उसे भी शामिल कर दिया गया। इससे जांच टीमों के लिए मामला और उलझ गया। खातों की संख्या डेढ़ लाख से उपर पहुंच गई। सीडीओ अभिषेक सिंह ने इसके लिए समाज कल्याण अधिकारी राजीव रत्न सिंह को दोषी मानते हुए कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी और कमिश्नर को लिख दिया गया। कमिश्नर की ओर से अब समाज कल्याण अधिकारी के निलंबन की संस्तुति करने की बात कही जा रही है।
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गोपनीय रिपोर्ट कालेज मालिकों तक पहुंची
आजमगढ़। 50 स्कूल-कालजों की जांच के लिए बनाई गई 10 टीमों को जांच को गोपनीय रखने को कहा गया था। रिपोर्ट से मीडिया को भी अवगत नहीं कराया गया। मजे की बात ये है कि जांच टीमों की ये रिपोर्ट कालेज मालिकों तक पहुंच गई और वो मीडिया के पास पहुंच क्लीनचिट मिलने की बात कहने लगे। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि जांच किस स्तर से की गई कि आरोपी को पहले ही पता है कि मुझे क्लीन चिट मिल गई।
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सीडीओ की अनुशंसा पर समाज कल्याण अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब के बाद ही मामले में कुछ कहा जा सकता है कि कौन दोषी है। इसके बाद ही कोई कार्रवाई होगी।
चंद्रभूषण सिंह
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अभिलेख न तैयार कर ही उक्त समय में अधिकारियों, बाबुओं, स्कूल-कालेजों और बैंकों की मिलीभगत से ये घपला किया गया था। जिस तरह से 10 टीमों की ओर से जांच की गई और कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं, उससे यही लगता है कि जांच को गोलमोल करने की तैयारी कर ली गई है। फिलहाल जिलाधिकारी की ओर से समाज कल्याण अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जिले में 2007-08 से 2012-13 तक समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति और पेंशन आदि के मद में लगभग 150 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। शिकायत के बाद 2014 में तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से सीडीओ की अध्यक्षता नौ सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। जांच के दौरान 2.86 करोड़ के घोटाले के साक्ष्य मिलने पर दो थानों में चार एफआईआर कराई गई थी और तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी, डीआईओएस समेत 34 लोगों को नामजद किया गया था। साथ ही 50 करोड़ के और घोटाले की पुष्टी की बात कही गई थी। इसके बाद डीसीबी समेत सात लोगों के खिलाफ 2.86 करोड़ की रिकवरी नोटिस जारी की गई थी। 50 स्कूल-कालेजों को उक्त समय के छात्रों के सत्यापन के लिए नोटिस जारी किया गया था। इनमें उक्त समय में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के 50 करोड़ से ज्यादा की रकम भेजी गई थी, जबकि सबी स्कूल कालजों की ओर से छात्रों की संख्या काफी बढ़ाकर बता दी गई थी। इसी दौरान कमिश्नर के निर्देश पर जांच जल्द पूरी करने के लिए सीडीओ अभिषेक सिंह की ओर से इन स्कूलों की जांच के लिए सितंबर में 10 कमेटी का गठन कर दिया गया। जल्द से जल्द जांच पूरी करने को कहा गया। डीसीबी के संदिग्ध खातों के साथ सभी सीबीएस बैंक के खातों, जिसमें छात्रवृत्ति भेजी गई थी उसे भी शामिल कर दिया गया। इससे जांच टीमों के लिए मामला और उलझ गया। खातों की संख्या डेढ़ लाख से उपर पहुंच गई। सीडीओ अभिषेक सिंह ने इसके लिए समाज कल्याण अधिकारी राजीव रत्न सिंह को दोषी मानते हुए कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी और कमिश्नर को लिख दिया गया। कमिश्नर की ओर से अब समाज कल्याण अधिकारी के निलंबन की संस्तुति करने की बात कही जा रही है।
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गोपनीय रिपोर्ट कालेज मालिकों तक पहुंची
आजमगढ़। 50 स्कूल-कालजों की जांच के लिए बनाई गई 10 टीमों को जांच को गोपनीय रखने को कहा गया था। रिपोर्ट से मीडिया को भी अवगत नहीं कराया गया। मजे की बात ये है कि जांच टीमों की ये रिपोर्ट कालेज मालिकों तक पहुंच गई और वो मीडिया के पास पहुंच क्लीनचिट मिलने की बात कहने लगे। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि जांच किस स्तर से की गई कि आरोपी को पहले ही पता है कि मुझे क्लीन चिट मिल गई।
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सीडीओ की अनुशंसा पर समाज कल्याण अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब के बाद ही मामले में कुछ कहा जा सकता है कि कौन दोषी है। इसके बाद ही कोई कार्रवाई होगी।
चंद्रभूषण सिंह