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रिश्वतखोरी के चलते मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट
Updated Fri, 27 Oct 2017 11:59 PM IST
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आजमगढ़। देवगांव कोतवाली में दर्ज चोरी और लूटपाट के मामले में रिश्वतखोरी के चलते विवेचक ने मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दिया। जबकि पीड़ित साक्ष्य और सबूत देने के लिए थाना, सीओ आफिस और एसपी दफ्तर का चक्कर लगाते रहा। गुरुवार को पीड़ित ने न्याय के लिए डीआईजी आजमगढ़ परिक्षेत्र से मिलकर न्याय की गुहार लगाई। डीआईजी ने एसपी से जांच कर रिपोर्ट मांगी है।
पीड़ित सभाजीत जायसवाल देवगांव कोतवाली क्षेत्र के कंजहित गांव का निवासी है। उसका आरोप है कि गांव के कुछ लोग उसके हाते में घूसकर हरे पेड़ों को काटकर गिरा दिया। साथ ही भीतर रखा गया कई बोरा नमक चुरा लिया। घटना के बाद देवगांव कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तहरीर दी गई। लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो मजबूरन कार्रवाई के लिए एसपी और डीआईजी से गुहार लगाई गई। अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और विवेचना थाने के एक दरोगा को सौंपी गई। सभाजीत ने बताया कि विपक्षी रसूखदार और पैसे वाले हैं। इसके चलते उनके विरुद्ध कार्रवाई की कोई हिम्मत नहीं करता। जो कोई साहस दिखाता है तो उसे किसी न किसी तरह से विपक्षी अपने पक्ष में कर लेते हैं। विपक्षियों के प्रभाव के चलते ही मुकदमे के विवेचक ने उसका साक्ष्य, सबूत नहीं लिया और मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दिया। इस बात की जानकारी होने पर वह अपना सबूत आदि लेकर विवेचक के पास पहुंचा तो वे लेने से इंकार कर दिए। इसके बाद 13 अक्तूबर को एसपी से मिलकर सारी बात बताई तो एसपी ने सीओ लालगंज के यहां भेजे। लेकिन सीओ कोई रुची न लेते हुए पहले तो टरकाते रहे। बाद में कार्रवाई करने से पल्ला झाड़ लिया। थाना और सीओ दफ्तर से दुत्कार मिलने पर 16 अक्तूबर को सभाजीत पुन: एसपी से मिले। लेकिन उसका कोई फायदा न होने पर गुरुवार को डीआईजी आजमगढ़ परीक्षेत्र से मिलकर गुहार लगाई। डीआईजी विजय भूषण ने एसपी को जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का निर्देश दिया है।
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पीड़ित सभाजीत जायसवाल देवगांव कोतवाली क्षेत्र के कंजहित गांव का निवासी है। उसका आरोप है कि गांव के कुछ लोग उसके हाते में घूसकर हरे पेड़ों को काटकर गिरा दिया। साथ ही भीतर रखा गया कई बोरा नमक चुरा लिया। घटना के बाद देवगांव कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तहरीर दी गई। लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो मजबूरन कार्रवाई के लिए एसपी और डीआईजी से गुहार लगाई गई। अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और विवेचना थाने के एक दरोगा को सौंपी गई। सभाजीत ने बताया कि विपक्षी रसूखदार और पैसे वाले हैं। इसके चलते उनके विरुद्ध कार्रवाई की कोई हिम्मत नहीं करता। जो कोई साहस दिखाता है तो उसे किसी न किसी तरह से विपक्षी अपने पक्ष में कर लेते हैं। विपक्षियों के प्रभाव के चलते ही मुकदमे के विवेचक ने उसका साक्ष्य, सबूत नहीं लिया और मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दिया। इस बात की जानकारी होने पर वह अपना सबूत आदि लेकर विवेचक के पास पहुंचा तो वे लेने से इंकार कर दिए। इसके बाद 13 अक्तूबर को एसपी से मिलकर सारी बात बताई तो एसपी ने सीओ लालगंज के यहां भेजे। लेकिन सीओ कोई रुची न लेते हुए पहले तो टरकाते रहे। बाद में कार्रवाई करने से पल्ला झाड़ लिया। थाना और सीओ दफ्तर से दुत्कार मिलने पर 16 अक्तूबर को सभाजीत पुन: एसपी से मिले। लेकिन उसका कोई फायदा न होने पर गुरुवार को डीआईजी आजमगढ़ परीक्षेत्र से मिलकर गुहार लगाई। डीआईजी विजय भूषण ने एसपी को जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का निर्देश दिया है।
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