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बालिकाओं के बीच विवाद ने लिया जातिवाद का रूप, दौड़े अधिकारी
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मेंहनगर। समाज कल्याण विभाग से संचालित आश्रम पद्धति विद्यालय में बालिकाओं के बीच हुए विवाद ने विकराल रूप ले लिया। दलित वर्ग की छात्राओं ने प्राचार्य और एक शिक्षक पर जातिगत भेदभाव करने और प्रताड़ित करने का आरोप लगा दिया। बुधवार शाम को मामला फंसा तो समाज कल्याण विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। लिखित समझौता कराया गया। गुरुवार को एक बार फिर मामला भड़क गया। सोशल मीडिया पर भी इसे वायरल किया जाने लगा तो फिर अधिकारी मौके पर दौड़े और दोनों पक्षों में समझौता कराया।
क्षेत्र के गौरा स्थित मंडलेश्वर महादेव मंदिर के पास राजकीय आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय में बुधवार को 10वीं और नौवीं की छात्राओं के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। इसी बीच कुछ दलित छात्राओं ने प्राचार्य डॉ. रागनी सिंह की भतीजी से भिड़ गईं। दोनों के बीच हाथापाई होने लगी। प्राचार्य ने बीचबचाव किया तो दलित छात्राओं ने फोन पर परिजनों से शिकायत कर दी। देखते ही देखते मामला गरम हो गया। किसी के परिजन ने अनुसूचित जाति आयोग में भी फोन कर दिया। समाज कल्याण अधिकारी और उप निदेशक सुरेश चंद्र पाल एसएचओ के साथ मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों से वार्ता कर समझौता कराया। गुरुवार सुबह दलित छात्राओं ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। इसमें प्राचार्य डॉ. रागनी सिंह और सहायक अध्यापक शशिभूषण सिंह पर जातिसूचक शब्दों के प्रयोग और खाने में भेदभाव करने का आरोप लगाया। अभिभावकों के साथ कुछ स्थानीय लोगों ने मामले को तूल दे दिया। विद्यालय के सामने एकत्र हो गए और हंगामा करने लगे। विद्यालय प्रशासन ने इसकी जानकारी अधिकारियों को दी। एसडीएम मेंहनगर दुष्यंत कुमार मौर्य, सीओ अवधेश यादव मातहतों के साथ मौके पर पहुंचे। मामले को शांत कराया। डीडी समाज कल्याण सुरेशचंद्र पाल ने बताया कि छात्राओं के बीच ग़लतफहमी को लेकर विवाद हुआ था। हल करा दिया गया है। जांच के दौरान किसी को दोषी पाया जाएगा तो उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्राचार्य डॉ. रागनी सिंह ने बताया कि यह प्रायोजित मामला है। विद्यालय में किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता है। आरोप किसी भी तरह की सच्चाई नहीं है। कुछ बाहरी लोगों की ओर से अफवाह फैलाई जा रही है। विद्यालय को बदनाम किया जा रहा है।
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क्षेत्र के गौरा स्थित मंडलेश्वर महादेव मंदिर के पास राजकीय आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय में बुधवार को 10वीं और नौवीं की छात्राओं के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। इसी बीच कुछ दलित छात्राओं ने प्राचार्य डॉ. रागनी सिंह की भतीजी से भिड़ गईं। दोनों के बीच हाथापाई होने लगी। प्राचार्य ने बीचबचाव किया तो दलित छात्राओं ने फोन पर परिजनों से शिकायत कर दी। देखते ही देखते मामला गरम हो गया। किसी के परिजन ने अनुसूचित जाति आयोग में भी फोन कर दिया। समाज कल्याण अधिकारी और उप निदेशक सुरेश चंद्र पाल एसएचओ के साथ मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों से वार्ता कर समझौता कराया। गुरुवार सुबह दलित छात्राओं ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। इसमें प्राचार्य डॉ. रागनी सिंह और सहायक अध्यापक शशिभूषण सिंह पर जातिसूचक शब्दों के प्रयोग और खाने में भेदभाव करने का आरोप लगाया। अभिभावकों के साथ कुछ स्थानीय लोगों ने मामले को तूल दे दिया। विद्यालय के सामने एकत्र हो गए और हंगामा करने लगे। विद्यालय प्रशासन ने इसकी जानकारी अधिकारियों को दी। एसडीएम मेंहनगर दुष्यंत कुमार मौर्य, सीओ अवधेश यादव मातहतों के साथ मौके पर पहुंचे। मामले को शांत कराया। डीडी समाज कल्याण सुरेशचंद्र पाल ने बताया कि छात्राओं के बीच ग़लतफहमी को लेकर विवाद हुआ था। हल करा दिया गया है। जांच के दौरान किसी को दोषी पाया जाएगा तो उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्राचार्य डॉ. रागनी सिंह ने बताया कि यह प्रायोजित मामला है। विद्यालय में किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता है। आरोप किसी भी तरह की सच्चाई नहीं है। कुछ बाहरी लोगों की ओर से अफवाह फैलाई जा रही है। विद्यालय को बदनाम किया जा रहा है।
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