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हाईवे से जुड़ी जमीनों के अ भरोलेख गायब होने में दो पर एफआईआर
Updated Fri, 15 Jun 2018 12:24 AM IST
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आजमगढ़। लालगंज तहसील के गोमाडीह और लखमी उबारपुर गांव के गायब हुए अभिलेखों के मामले में दोनों गांवों के सहायक चकबंदी अधिकारी की ओर से गंभीरपुर थाने में तत्कालीन लेखपालों के ऊपर एफआईआर दर्ज कराई गई है। गांव की काफी जमीन नेशनल हाईवे में आ रही है। इसमें सरकारी जमीन भी है। अभिलेख गायब होने से लोग सरकारी जमीन को भी अपना बता रहे हैं।
गोमाडीह और लखमी उबारपुर गांव के अभिलेख गायब होने का पता उस समय चला जब हाईवे निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान एक ही जमीन पर मुआवजे के लिए दो लोग अपना दावा करने लगे। तत्कालीन जिलाधिकारी सीबी सिंह ने मामले की जांच कराई तो पता चला कि गोमाडीह और लखमी उबारपुर गांव के अभिलेख ही गायब हैं। हाईवे में सरकारी जमीन भी आ रही थी, जिसे ग्रामीण अपना बता रहे थे। इसके बाद दोनों गांवों के किसानों को हाईवे में जा रही जमीनों का मुआवजा देने का मामला अधर में लटक गया। तब तत्कालीन जिलाधिकारी ने एसओसी और सीआरओ को निर्देश दिया कि वह गांवों में जाकर किसानों से उनकी जमीनों के अभिलेख लेकर जमीन का सीमांकन कर मुआवजा वितरित करें। लेकिन इसी बीच उनका स्थानांतरण हो गया और मामला ठंडा हो गया। अब जब गोमाडीह में हाइवे के निर्माण में बाधक बन रहे निर्माणों को हटाने की बात आई तो प्रशासन फिर से हरकत में आ गया है। प्रशासन ने जमीन पर काबिज लोगों को लोगों को मुआवजा देने के लिए दावा और आपत्तियां मांगी हैं ताकि उनका निस्तारण कर मुआवजे का भुगतान किया जा सके और हाइवे के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया जा सके। इसके साथ ही जिलाधिकारी के निर्देश पर लखमी उबारपुर के सहायक चकबंदी अधिकारी बसंत कुमार सिंह ने तत्कालीन लेखपाल फूलचंद यादव और गोमाडीह के सहायक चकबंदी अधिकारी मोहन लाल श्रीवास्तव ने तत्कालीन लेखपाल त्रिभुवन राय के खिलाफ गंभीरपुर थाने में बुधवार को एफआईआर दर्ज कराई हैं।
प्रभावित एसएलओ दफ्तर में करें आपत्ति
आजमगढ़। डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने बताया कि आजमगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-233 के अन्तर्गत गोमाडीह और उबारपुर लखमीपुर, परगना बेलादौलताबाद, तहसील लालगंज के जिन व्यक्तियों की भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग के अन्तर्गत प्रभावित हो रही है। उन्हें कोई आपत्ति हो तो अपनी लिखित आपत्ति साक्ष्यों सहित एक सप्ताह के अन्दर विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय में प्रस्तुत करें। ताकि उसकी जांच सत्यापन चकबन्दी विभाग से कराते हुए आवश्यक कार्रवाई कराई जा सके।
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फूलचंद यादव और त्रिभुवन यादव ही दोनों गांवों के लेखपाल थे। इन लोगों द्वारा अभिलेख गायब होने के बाद भी कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। जिसके कारण इस मामले में इनकी संदिग्धता प्रतीत होती है। जिसे देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर यह एफआईआर दर्ज कराई गई है। आरपी यादव, डीडीसी।
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गोमाडीह और लखमी उबारपुर गांव के अभिलेख गायब होने का पता उस समय चला जब हाईवे निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान एक ही जमीन पर मुआवजे के लिए दो लोग अपना दावा करने लगे। तत्कालीन जिलाधिकारी सीबी सिंह ने मामले की जांच कराई तो पता चला कि गोमाडीह और लखमी उबारपुर गांव के अभिलेख ही गायब हैं। हाईवे में सरकारी जमीन भी आ रही थी, जिसे ग्रामीण अपना बता रहे थे। इसके बाद दोनों गांवों के किसानों को हाईवे में जा रही जमीनों का मुआवजा देने का मामला अधर में लटक गया। तब तत्कालीन जिलाधिकारी ने एसओसी और सीआरओ को निर्देश दिया कि वह गांवों में जाकर किसानों से उनकी जमीनों के अभिलेख लेकर जमीन का सीमांकन कर मुआवजा वितरित करें। लेकिन इसी बीच उनका स्थानांतरण हो गया और मामला ठंडा हो गया। अब जब गोमाडीह में हाइवे के निर्माण में बाधक बन रहे निर्माणों को हटाने की बात आई तो प्रशासन फिर से हरकत में आ गया है। प्रशासन ने जमीन पर काबिज लोगों को लोगों को मुआवजा देने के लिए दावा और आपत्तियां मांगी हैं ताकि उनका निस्तारण कर मुआवजे का भुगतान किया जा सके और हाइवे के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया जा सके। इसके साथ ही जिलाधिकारी के निर्देश पर लखमी उबारपुर के सहायक चकबंदी अधिकारी बसंत कुमार सिंह ने तत्कालीन लेखपाल फूलचंद यादव और गोमाडीह के सहायक चकबंदी अधिकारी मोहन लाल श्रीवास्तव ने तत्कालीन लेखपाल त्रिभुवन राय के खिलाफ गंभीरपुर थाने में बुधवार को एफआईआर दर्ज कराई हैं।
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प्रभावित एसएलओ दफ्तर में करें आपत्ति
आजमगढ़। डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने बताया कि आजमगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-233 के अन्तर्गत गोमाडीह और उबारपुर लखमीपुर, परगना बेलादौलताबाद, तहसील लालगंज के जिन व्यक्तियों की भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग के अन्तर्गत प्रभावित हो रही है। उन्हें कोई आपत्ति हो तो अपनी लिखित आपत्ति साक्ष्यों सहित एक सप्ताह के अन्दर विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय में प्रस्तुत करें। ताकि उसकी जांच सत्यापन चकबन्दी विभाग से कराते हुए आवश्यक कार्रवाई कराई जा सके।
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फूलचंद यादव और त्रिभुवन यादव ही दोनों गांवों के लेखपाल थे। इन लोगों द्वारा अभिलेख गायब होने के बाद भी कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। जिसके कारण इस मामले में इनकी संदिग्धता प्रतीत होती है। जिसे देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर यह एफआईआर दर्ज कराई गई है। आरपी यादव, डीडीसी।