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संगठन पदाधिकारियों पर होगी कार्रवाई
Updated Fri, 02 Feb 2018 12:04 AM IST
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आजमगढ़। दीवानी न्यायालय के पास से 18 दिसंबर को पुलिस अभिरक्षा से फरार हुए कुख्यात बदमाश मोहन पासी को हापुड़ जिले में हुए एनकाउंटर में एसटीएफ लखनऊ की टीम ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया। मोहन की फरारी को साजिश करार देते हुए शहर कोतवाली पुलिस उसके बचाव में उतरे संगठन के लोगों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू कर दी है। एसपी के निर्देश पर पुलिस उन लोगों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। पुलिस के इस कार्रवाई से संगठन के लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
वर्ष 2008 में वर्चस्व की जंग के चलते मेंहनगर थाना क्षेत्र का कुख्यात बदमाश श्यामबाबू पासी अपने साथी मोहन पासी, राजन पासी आदि के साथ मिलकर जहानागंज थाना क्षेत्र के डीहां गांव के प्रधान राकेश सिंह पप्पू के काफिले पर हमला बोल दिया। अंधाधुंध चलाई गई गोली में पप्पू समेत उनके दो गनरों सहित तीन लोगों की मौत हो गई। इस मामले में श्यामबाबू और मोहन पासी आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे थे। 18 दिसंबर 2017 को मोहन पासी निजामाबाद थाना क्षेत्र में हुई गोली मारकर लूट के एक मामले में पेशी पर आया हुआ था। अदालत में पेश होने के बाद पुलिसकर्मी मोहन को लेकर न्यायालय के लाकअप में ले जा रहे थे। तभी वह पुलिस की अभिरक्षा से फरार हो गया। मोहन के साथ उसका भाई भी मौजूद था। मोहन की फरारी के बाद कई संगठन के लोग इसे पुलिस की साजिश करार देते हुए एनकाउंटर करने का आरोप लगाए थे। संगठन के लोगों का कहना था कि पुलिस साजिश के तहत मोहन को फरारी दिखाकर किसी गुप्त ठिकाने पर रखे हुए है। उधर 29 जनवरी को एसडीएफ लखनऊ के एसपी अभिषेक सिंह की टीम ने दिल्ली से सटे हापुड़ शहर के पास हुए मुठभेड़ में मोहन पासी को ढेर कर दी। वह किसी लूट की घटना को अंजाम देने जा रहा था। मोहन के एनकाउंटर में मारे जाने के पास पुलिस उन संगठन के लोगों का उसकी फरारी में हाथ बताते हुए साजिश रचने का दोषी करार दे रही है। मोहन के बचाव में उतरे संगठन के लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए एसपी ने शहर कोतवाली पुलिस को निर्देश दिया है।
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मोहन पासी के फरारी में उन संगठन के लोगों का हाथ है जो उसके बचाव में उतरे थे। वे लोग साजिश के तहत मोहन को भगाकर पुलिस पर तरह-तरह का आरोप लगा रहे थे। ऐसे लोगों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए शहर कोतवाल को निर्देश दिया गया है। - अजय कुमार साहनी, एसपी
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वर्ष 2008 में वर्चस्व की जंग के चलते मेंहनगर थाना क्षेत्र का कुख्यात बदमाश श्यामबाबू पासी अपने साथी मोहन पासी, राजन पासी आदि के साथ मिलकर जहानागंज थाना क्षेत्र के डीहां गांव के प्रधान राकेश सिंह पप्पू के काफिले पर हमला बोल दिया। अंधाधुंध चलाई गई गोली में पप्पू समेत उनके दो गनरों सहित तीन लोगों की मौत हो गई। इस मामले में श्यामबाबू और मोहन पासी आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे थे। 18 दिसंबर 2017 को मोहन पासी निजामाबाद थाना क्षेत्र में हुई गोली मारकर लूट के एक मामले में पेशी पर आया हुआ था। अदालत में पेश होने के बाद पुलिसकर्मी मोहन को लेकर न्यायालय के लाकअप में ले जा रहे थे। तभी वह पुलिस की अभिरक्षा से फरार हो गया। मोहन के साथ उसका भाई भी मौजूद था। मोहन की फरारी के बाद कई संगठन के लोग इसे पुलिस की साजिश करार देते हुए एनकाउंटर करने का आरोप लगाए थे। संगठन के लोगों का कहना था कि पुलिस साजिश के तहत मोहन को फरारी दिखाकर किसी गुप्त ठिकाने पर रखे हुए है। उधर 29 जनवरी को एसडीएफ लखनऊ के एसपी अभिषेक सिंह की टीम ने दिल्ली से सटे हापुड़ शहर के पास हुए मुठभेड़ में मोहन पासी को ढेर कर दी। वह किसी लूट की घटना को अंजाम देने जा रहा था। मोहन के एनकाउंटर में मारे जाने के पास पुलिस उन संगठन के लोगों का उसकी फरारी में हाथ बताते हुए साजिश रचने का दोषी करार दे रही है। मोहन के बचाव में उतरे संगठन के लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए एसपी ने शहर कोतवाली पुलिस को निर्देश दिया है।
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मोहन पासी के फरारी में उन संगठन के लोगों का हाथ है जो उसके बचाव में उतरे थे। वे लोग साजिश के तहत मोहन को भगाकर पुलिस पर तरह-तरह का आरोप लगा रहे थे। ऐसे लोगों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए शहर कोतवाल को निर्देश दिया गया है। - अजय कुमार साहनी, एसपी
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