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जंगल और बंजर की जमीन पर हेराफेरी कर जमाया कब्जा
Updated Thu, 02 Nov 2017 11:22 PM IST
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आजमगढ़। सदर तहसील के खेमऊपुर गांव में जंगल और बंजर की जमीन पर कब्जे के वाद में जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने जमीन को ग्राम समाज के खाते में दर्ज करते हुए कब्जेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया है।
खेमऊपुर गांव में दो लोगों संतोष कुमार और संजय कुमार ने बाद दाखिल किया था कि ग्राम समाज के पुरानी आराजी नंबर 802/1, 811/1 और 791 जिनका नया नंबर 64, 66 और 85 हो गया है, अभिलेखों में जंगल और बंजर के खाते में दर्ज है। गांव के ही रामबदन सिंह पुत्र राजा और गुनराजी बेवा रामअधार के नाम अभिलेखों में हेराफेरी कर दर्ज कर दिया गया है। जबकि उक्त भूमि को भूमिधर घोषित करने अधिकार चकबंदी अधिकारी को प्राप्त नहीं है। गुरुवार को शासकीय अधिवक्ता राजस्व ओमप्रकाश राजभर ने वाद की सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी के समक्ष सारे साक्ष्य के साथ तर्कों को रखा। उन्होंने बताया कि इस मामले में चकबंदी अधिकारी के फर्जी आदेश से राम बदन सिंह और गुनराजी बेवा रामअधार द्वारा 600 कड़ी भूमि में अपना नाम दर्ज करा लिया गया है। वर्तमान में उक्त इंद्राज विधिचंद्र पुत्र रामबदन और चंद्रपाल, रविंद्र पाल पुत्रगण गोरखनाथ के नाम अंकित है। वाद की सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने इस मामले में उच्च न्यायालय के आदेशों का भी हवाला दिया। सारे तर्कों और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद जिलाधिकारी ने उक्त भूखंड को ग्राम समाज के खाते में दर्ज करते हुए कब्जेदारों के विरुद्घ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया है।
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खेमऊपुर गांव में दो लोगों संतोष कुमार और संजय कुमार ने बाद दाखिल किया था कि ग्राम समाज के पुरानी आराजी नंबर 802/1, 811/1 और 791 जिनका नया नंबर 64, 66 और 85 हो गया है, अभिलेखों में जंगल और बंजर के खाते में दर्ज है। गांव के ही रामबदन सिंह पुत्र राजा और गुनराजी बेवा रामअधार के नाम अभिलेखों में हेराफेरी कर दर्ज कर दिया गया है। जबकि उक्त भूमि को भूमिधर घोषित करने अधिकार चकबंदी अधिकारी को प्राप्त नहीं है। गुरुवार को शासकीय अधिवक्ता राजस्व ओमप्रकाश राजभर ने वाद की सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी के समक्ष सारे साक्ष्य के साथ तर्कों को रखा। उन्होंने बताया कि इस मामले में चकबंदी अधिकारी के फर्जी आदेश से राम बदन सिंह और गुनराजी बेवा रामअधार द्वारा 600 कड़ी भूमि में अपना नाम दर्ज करा लिया गया है। वर्तमान में उक्त इंद्राज विधिचंद्र पुत्र रामबदन और चंद्रपाल, रविंद्र पाल पुत्रगण गोरखनाथ के नाम अंकित है। वाद की सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने इस मामले में उच्च न्यायालय के आदेशों का भी हवाला दिया। सारे तर्कों और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद जिलाधिकारी ने उक्त भूखंड को ग्राम समाज के खाते में दर्ज करते हुए कब्जेदारों के विरुद्घ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया है।
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