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पूर्वांचल के कई नेता और प्रधान पुलिस के रडार पर
Updated Tue, 31 Oct 2017 11:38 PM IST
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आजमगढ़। सरायमीर थाना क्षेत्र के छित्तुपट्टी गांव में सोमवार की दोपहर भारी मात्रा में बिहार निर्मित पिस्टल और रिवाल्वर के साथ गिरफ्तार चार आरोपियों से हुई पूछताछ के बाद पुलिस को कई नेता, विधायक और प्रधानों के नाम की जानकारी हुई है। प्रधान और अध्यापक ग्राहक तलाशते थे, वहीं पकड़े जाने पर नेता इन सभी को बचाते थे। इसके बदले में तस्करों से उन्हें हिस्सा मिलता था। पूर्वांचल के कई लोगों का नामों की जानकारी होने के बाद पुलिस उनका रिकार्ड खंगाल रही है।
किसी जमाने में मुबारकपुर थाना क्षेत्र का बम्हौर गांव अवैध हथियार बनाने और बेचने के लिए मशहूर था। टी-सीरिज कैसेट्स के मालिक गुलशन कुमार की हत्या में प्रयुक्त तमंचा बम्हौर में ही बनाया गया था। हालांकि इसके बाद पुलिस ने यहां के असलहे निर्माताओं की कमर तोड़ दी। इसके बाद बिहार का मुंगेर जिला अवैध असलहे के निर्माण का गढ़ बन गया। वहां से तस्कर बड़े पैमाने पर तमंचा, पिस्टल, रिवाल्वर आदि खरीदकर लाते हैं और यहां अधिक रुपये में बेच देते हैं। बिहार से असलहा लाने के लिए तस्करों को नेता और प्रधान अपना वाहन उपलब्ध कराते हैं। गाड़ी के आगे पदनाम लिखा होने की वजह से इन पर जल्दी कोई ध्यान नहीं देता, जिसका यह लोग फायदा उठाते हैं। इसके अलावा अध्यापकों को महीने में अच्छीखासी तनख्वाह मिलती है। इसलिए एक अध्यापक दूसरे को असलहे खरीदने के लिए प्रेरित करता है। अध्यापक, प्रधान आदि पर जल्दी कोई शक नहीं करता। जिसका यह लोग फायदा उठाते हैं। इसके अलावा कई विधायक और नेता से भी इनके संबंध हैं। यह लोग रुपये के बदले में इन तस्करों की मदद करते थे।
तस्करों से हुई पूछताछ के दौरान पूर्वांचल के कई जिलों के ग्राम प्रधान, नेता, अध्यापकों के नाम और पते की जानकारी हुई है। एसओ सरायमीर रामरनेश यादव और उनकी टीम को इसकी जांच पड़ताल के लिए लगाया गया है।
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-अजय कुमार साहनी, एसपी
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किसी जमाने में मुबारकपुर थाना क्षेत्र का बम्हौर गांव अवैध हथियार बनाने और बेचने के लिए मशहूर था। टी-सीरिज कैसेट्स के मालिक गुलशन कुमार की हत्या में प्रयुक्त तमंचा बम्हौर में ही बनाया गया था। हालांकि इसके बाद पुलिस ने यहां के असलहे निर्माताओं की कमर तोड़ दी। इसके बाद बिहार का मुंगेर जिला अवैध असलहे के निर्माण का गढ़ बन गया। वहां से तस्कर बड़े पैमाने पर तमंचा, पिस्टल, रिवाल्वर आदि खरीदकर लाते हैं और यहां अधिक रुपये में बेच देते हैं। बिहार से असलहा लाने के लिए तस्करों को नेता और प्रधान अपना वाहन उपलब्ध कराते हैं। गाड़ी के आगे पदनाम लिखा होने की वजह से इन पर जल्दी कोई ध्यान नहीं देता, जिसका यह लोग फायदा उठाते हैं। इसके अलावा अध्यापकों को महीने में अच्छीखासी तनख्वाह मिलती है। इसलिए एक अध्यापक दूसरे को असलहे खरीदने के लिए प्रेरित करता है। अध्यापक, प्रधान आदि पर जल्दी कोई शक नहीं करता। जिसका यह लोग फायदा उठाते हैं। इसके अलावा कई विधायक और नेता से भी इनके संबंध हैं। यह लोग रुपये के बदले में इन तस्करों की मदद करते थे।
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तस्करों से हुई पूछताछ के दौरान पूर्वांचल के कई जिलों के ग्राम प्रधान, नेता, अध्यापकों के नाम और पते की जानकारी हुई है। एसओ सरायमीर रामरनेश यादव और उनकी टीम को इसकी जांच पड़ताल के लिए लगाया गया है।
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-अजय कुमार साहनी, एसपी