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जेल में पांच से आठ सौ रुपये में मिलती है बैरक
Updated Mon, 25 Sep 2017 11:31 PM IST
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आजमगढ़। देश और प्रदेश में भले ही भाजपा की सरकार चल रही है, लेकिन जेल के भीतर निरुद्ध कुख्यात अपराधियों की ही सत्ता चलती है। यह लोग अपनी सेवा के लिए नए बंदियों को अपने बैरक में पांच से आठ सौ रुपये चुकाकर रख लेते हैं। वहीं जेल के भीतर बगैर इंटरनेट की मोबाइल चलाने में पांच सौ रुपये तो एनड्राइड सेट के जरिए सोशल साइटों का आनंद लेने वालों से एक हजार रुपये महीने का लिया जाता है। यह खेल कुछ बंदी रक्षकों की मिली भगत से खेला जा रहा है। निरीक्षण के दौरान उजागर हुई इन खामियों की रिपोर्ट अधिकारियों की तरफ से शासन को भेजी जा रही है।
एक अधिकारी की तरफ से भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक जेल में कुल 1142 बंदी वर्तमान समय में निरुद्ध हैं। इसमें 940 विचाराधीन, 216 सजाआफ्ता, 52 महिला बंदी शामिल है। जेल के तन्हाई वाले बैरक में कुख्यात श्यामबाबू पासी और जालौन जिले के उरई थाना क्षेत्र के सुधर सिंह बंद है। जेल के अस्पताल में निरुद्ध बंदियों में ज्यादातर पुलिस की गोली से घायल होने वाले भर्ती हैं। सुरक्षा की दृष्टि से जेल को उपलब्ध कराया गया एक्सरे मशीन और मैटल डिटेक्टर लगा है। लेकिन यह दोनों खराब हैं। ऐसा ही कुछ हाल सीसीटीवी कैमरों का भी है। जेल के बैरक नंबर एक, दो, तीन और पांच में बंदियों की संख्या अधिक होने की वजह से यहां मादक पदार्थों का सेवन अधिक होता है। चेकिंग के दौरान इसी बैरकों से ही गांजा, सिगरेट, तंबाकू, गुटखा आदि बरामद हुआ। अधिकारी की मानें तो कुछ बंदी रक्षकों की मिली भगत से भीतर पांच सौ रुपये में सादा और एक हजार रुपये प्रतिमाह की दर से इंटरनेट की मोबाइल उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा कुख्यात अपराधियों को बैरक नंबर सात और आठ में रखा जाता है। इस बैरक में निरुद्ध अपराधी अपने गिरोह या परिचितों को रखने के लिए बंदी रक्षकों को पांच से आठ सौ रुपये देकर उन्हें अपनी बैरक में शिफ्ट करा लेते हैं। बदले में गुर्गे अपने आका की सेवा करते हैं। निरीक्षण के दौरान जेल के भीतर की उजागर हुई खामियों की रिपोर्ट अधिकारी शासन को भेज रहे हैं। वहां से5 जो निर्देश मिलेगा। उसके तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि जेल के गतिविधियों की जांच पड़ताल के लिए डीएम चंद्रभूषण सिंह, एसपी अजय कुमार साहनी सहित अन्य अधिकारी बीच-बीच में निरीक्षण कर हालात का जायजा लेते रहते हैं।
सीसीटीवी कैमरे के जरिए एसपी रखेंगे नजर
आजमगढ़ (ब्यूरो)। जेल शहर से काफी दूर होने की वजह से अधिकारियों को गतिविधियों की जानकारी नहीं हो पाती है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए एसपी अजय कुमार साहनी ने जेल के बाहर पुलिस चौकी खोलने का निर्णय लिया है। जहां एक दरोगा और 20 सिपाहियों को तैनात किया जाएगा। जेल चौकी के कर्मचारी जेल से छुटने और बंद होने वालों की प्रतिदिन की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को देंगे। इसके अलावा जेल के सीसीटीवी कैमरों को एसपी आफिस के कैमरे से जोड़ा जा रहा है। इसके जरिए एसपी समेत अन्य अधिकारी दफ्तर में बैठकर ही जेल के बाहर के हालात का जायजा ले सकेंगे।
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जेल के भीतर किसी भी प्रकार की मोबाइल का संचालन नहीं हो रहा। रुपये लेकर बैरक एलाट करने की सूचना गलत है। यदि कोई इस तरह की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच की जाएगी।
- अनिल कुमार गौतम, जेल अधीक्षक
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एक अधिकारी की तरफ से भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक जेल में कुल 1142 बंदी वर्तमान समय में निरुद्ध हैं। इसमें 940 विचाराधीन, 216 सजाआफ्ता, 52 महिला बंदी शामिल है। जेल के तन्हाई वाले बैरक में कुख्यात श्यामबाबू पासी और जालौन जिले के उरई थाना क्षेत्र के सुधर सिंह बंद है। जेल के अस्पताल में निरुद्ध बंदियों में ज्यादातर पुलिस की गोली से घायल होने वाले भर्ती हैं। सुरक्षा की दृष्टि से जेल को उपलब्ध कराया गया एक्सरे मशीन और मैटल डिटेक्टर लगा है। लेकिन यह दोनों खराब हैं। ऐसा ही कुछ हाल सीसीटीवी कैमरों का भी है। जेल के बैरक नंबर एक, दो, तीन और पांच में बंदियों की संख्या अधिक होने की वजह से यहां मादक पदार्थों का सेवन अधिक होता है। चेकिंग के दौरान इसी बैरकों से ही गांजा, सिगरेट, तंबाकू, गुटखा आदि बरामद हुआ। अधिकारी की मानें तो कुछ बंदी रक्षकों की मिली भगत से भीतर पांच सौ रुपये में सादा और एक हजार रुपये प्रतिमाह की दर से इंटरनेट की मोबाइल उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा कुख्यात अपराधियों को बैरक नंबर सात और आठ में रखा जाता है। इस बैरक में निरुद्ध अपराधी अपने गिरोह या परिचितों को रखने के लिए बंदी रक्षकों को पांच से आठ सौ रुपये देकर उन्हें अपनी बैरक में शिफ्ट करा लेते हैं। बदले में गुर्गे अपने आका की सेवा करते हैं। निरीक्षण के दौरान जेल के भीतर की उजागर हुई खामियों की रिपोर्ट अधिकारी शासन को भेज रहे हैं। वहां से5 जो निर्देश मिलेगा। उसके तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि जेल के गतिविधियों की जांच पड़ताल के लिए डीएम चंद्रभूषण सिंह, एसपी अजय कुमार साहनी सहित अन्य अधिकारी बीच-बीच में निरीक्षण कर हालात का जायजा लेते रहते हैं।
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सीसीटीवी कैमरे के जरिए एसपी रखेंगे नजर
आजमगढ़ (ब्यूरो)। जेल शहर से काफी दूर होने की वजह से अधिकारियों को गतिविधियों की जानकारी नहीं हो पाती है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए एसपी अजय कुमार साहनी ने जेल के बाहर पुलिस चौकी खोलने का निर्णय लिया है। जहां एक दरोगा और 20 सिपाहियों को तैनात किया जाएगा। जेल चौकी के कर्मचारी जेल से छुटने और बंद होने वालों की प्रतिदिन की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को देंगे। इसके अलावा जेल के सीसीटीवी कैमरों को एसपी आफिस के कैमरे से जोड़ा जा रहा है। इसके जरिए एसपी समेत अन्य अधिकारी दफ्तर में बैठकर ही जेल के बाहर के हालात का जायजा ले सकेंगे।
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जेल के भीतर किसी भी प्रकार की मोबाइल का संचालन नहीं हो रहा। रुपये लेकर बैरक एलाट करने की सूचना गलत है। यदि कोई इस तरह की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच की जाएगी।
- अनिल कुमार गौतम, जेल अधीक्षक