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मेहनत-मजदूरी कर महिला ने पाया न्याय, छह को पहुंचाया सलाखों के पीछे

Tue, 20 Feb 2018 12:24 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़ Updated Tue, 20 Feb 2018 12:24 AM IST
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Court gave Life imprisonment to six murderer
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दोहरे हत्या के गवाह की हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार की अदालत ने छह को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही अड़तीस-अड़तीस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
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रौनापार थाना के जोकहरा गांव निवासी अच्छे लाल की चार अप्रैल 2011 की रात सोते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आंधी देवी पत्नी स्व. माकूल चंद ने स्थानीय थाने में गांव के सात लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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उसका आरोप था कि 17 अप्रैल 2010 को उसके पति माकूल चंद्र और पुत्री छाया की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसका विचारण सत्र न्यायाधीश की अदालत में चल रहा था। मुकदमे में हत्यारोपियों प्रमोद गोड़, मनोज श्रीवास्तव, विजेंद्र राय की तरफ से मुकदमे में सुलह न करने पर पीड़ितों को जान मारने की धमकियां दी जाती थीं।
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सुलह न होते पर मड़ई में सोते समय हत्याभियुक्तों ने अच्छेलाल की गोली मार हत्या कर दी । इस मामले में पुलिस ने चंदन बढ़ई, मनोज श्रीवास्तव, पिंटू राय, दुद्धू राय, सुबाष राय, विजेंद्र राय, प्रमोद गोंड़ के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।

अदालत ने सुनवाई के बाद हत्याभियुक्त चंदन, प्रदुम्र, मनोज, पिंटू, दूद्धू और सुबाष को हत्या का दोषी पाते हुए उक्त सजा सुनाई। जुर्माने की रकम में से एक लाख रुपये तीन-तीन हत्याओं की लड़ाई लगने वाली पीड़िता आंधी देवी को मिलेंगे।

रौनापार थाना क्षेत्र के जोकहरा गांव निवासी आंधी देवी के पति माकूल चंद्र और पुत्री छाया की हत्या हो गई थी। इसमें गांव के ही चार लोग पकड़े गए थे। आंधी देवी ने बताया कि गवाही में ससुर अच्छेलाल को तारीख को जाना था।

दो दिन पहले ही उनकी हत्या कर दी गई। पति और बेटी की हत्या में आरोपियों को सजा तो हो गई लेकिन ससुर की हत्या की मुकदमा चल रहा था। छह आरोपियों को आज सजा मिलने के बाद न्याय मिल गया है। आंधी का कहना है कि किसी तरह से चार बच्चों का पालन-पोषण करती रही।


मजदूरी कर कोर्ट में लड़ाई लड़ती रही। प्राथमिक विद्यालय जोकहरा में एमडीएम बनाने का काम मिला। उसमें भी लोगों ने नहीं रहने दिया। श्री रामानंद सरस्वती पुस्तकालय जोकहरा में खाना पकाती हूं। मुकदमे की पैरवी के लिए आजमगढ़ से इलाहाबाद तक पेट काट कर सजा दिलाने के लिए मेहनत की थी। अभी भी  धमकी दी जा रही है।
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