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किताबों के इंतजार में बच्चे, कैसे करें पढ़ाई
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आजमगढ़। कोरोना के कारण जिले के परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले सवा चार लाख बच्चों की पढ़ाई बाधित हो गई है। 24 मार्च से स्कूलों को संक्रमण के चलते बंद रखा गया है। कई छात्र प्रोन्नत होकर दूसरी कक्षाओं में जा चुके हैं, लेकिन अभी तक बच्चों को न तो नए सत्र की किताबें मिली हैं और न तो उन्हें पुरानी किताबें मिल पा रही हैं।
कोरोना महामारी के चलते पिछले शिक्षा सत्र में कक्षाएं नहीं चल सकी थीं। इस बार भी कोविड की दूसरी लहर ने सभी को हिलाकर रख दिया। यही वजह है कि सत्र 2021-22 में भी ऑनलाइन पढ़ाई ही चल रही है। फिलहाल कक्षाओं के शुरू होने की कोई संभावना नहीं दिख रही है। सभी परिषदीय स्कूलों में वाट्सएप के जरिए कक्षाएं शुरू भी हो चुकी हैं। कुछ कक्षाएं स्वयं प्रभा चैनल के जरिए भी चलाई जा रही हैं। इन सब के बीच अब तक विद्यार्थियों को पुस्तकें नहीं मिल सकी हैं। विभाग को करीब 80 फीसद ही किताबें मिल सकी हैं। जिले में करीब चार लाख से ज्यादा बच्चे परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत हैं। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के पास ऐसे संसाधन नहीं हैं, जिसके माध्यम से वे ई-पाठशाला का लाभ उठा सकें।
अभी तक पूरी किताबें नहीं आई हैं। करीब 80 फीसदी किताबें जिले में आ चुकी हैं। बाकी किताब आने के बाद बच्चों को उपलब्ध कराया जाएगा।
आरसी चौहान, जिला समन्वयक आजमगढ़।
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कोरोना महामारी के चलते पिछले शिक्षा सत्र में कक्षाएं नहीं चल सकी थीं। इस बार भी कोविड की दूसरी लहर ने सभी को हिलाकर रख दिया। यही वजह है कि सत्र 2021-22 में भी ऑनलाइन पढ़ाई ही चल रही है। फिलहाल कक्षाओं के शुरू होने की कोई संभावना नहीं दिख रही है। सभी परिषदीय स्कूलों में वाट्सएप के जरिए कक्षाएं शुरू भी हो चुकी हैं। कुछ कक्षाएं स्वयं प्रभा चैनल के जरिए भी चलाई जा रही हैं। इन सब के बीच अब तक विद्यार्थियों को पुस्तकें नहीं मिल सकी हैं। विभाग को करीब 80 फीसद ही किताबें मिल सकी हैं। जिले में करीब चार लाख से ज्यादा बच्चे परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत हैं। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के पास ऐसे संसाधन नहीं हैं, जिसके माध्यम से वे ई-पाठशाला का लाभ उठा सकें।
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अभी तक पूरी किताबें नहीं आई हैं। करीब 80 फीसदी किताबें जिले में आ चुकी हैं। बाकी किताब आने के बाद बच्चों को उपलब्ध कराया जाएगा।
आरसी चौहान, जिला समन्वयक आजमगढ़।