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Azamgarh News: स्क्रीन के निकट रहने वाले बच्चों की आंखों से दूर हो रही रोशनी
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डिजिटल युग में बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम अब उनकी आंखों के लिए खतरा बनता जा रहा है। जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. रजनीश कुमार सेठ ने बताया कि मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर का अधिक उपयोग बच्चों की आंखों पर सीधा असर डाल रहा है। उन्होंने कहा कि 15 साल तक के बच्चों में मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
ओपीडी में प्रतिदिन 80-90 मरीज आ रहे हैं। इसमें से दो- तीन बच्चों में इस तरह की समस्या मिल रही है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में तनाव, सूखापन और रेटिना पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे बच्चों को धुंधला दिखाई देने लगता है। कम उम्र में ही चश्मा लगाना पड़ जाता है।
उन्होंने बताया कि स्क्रीन पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करने से ब्लिंक रेट (पलक झपकाने की दर) कम हो जाती है, जिससे आंखें ड्राई हो जाती हैं और कॉर्निया पर भी असर पड़ने लगता है। यह समस्या पूरे देश में तेजी से फैल रही है। अधिक स्क्रीन टाइम और कम आउटडोर गतिविधियां इस समस्या के मुख्य कारण हैं।
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ओपीडी में प्रतिदिन 80-90 मरीज आ रहे हैं। इसमें से दो- तीन बच्चों में इस तरह की समस्या मिल रही है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में तनाव, सूखापन और रेटिना पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे बच्चों को धुंधला दिखाई देने लगता है। कम उम्र में ही चश्मा लगाना पड़ जाता है।
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उन्होंने बताया कि स्क्रीन पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करने से ब्लिंक रेट (पलक झपकाने की दर) कम हो जाती है, जिससे आंखें ड्राई हो जाती हैं और कॉर्निया पर भी असर पड़ने लगता है। यह समस्या पूरे देश में तेजी से फैल रही है। अधिक स्क्रीन टाइम और कम आउटडोर गतिविधियां इस समस्या के मुख्य कारण हैं।
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