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चेन पीवीआर और मेजवां वेलफेयर सोसायटी ने मिलाया हाथ
आजमगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Apr 2018 11:52 PM IST
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शबाना आजमी
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मेजवां। जल्द ही देश के सिनेमाघरों में राष्ट्रगान से पूर्व मिजवां की कहानी दिखाई जाएगा। इसके लिए देश के जाने-माने थियेटर चेन पीवीआर और मिजवां वेलफेयर सोसायटी ने हाथ मिलाया है। इसमें इस छोटे से गांव के प्रगति की कहानी को प्रदर्शित किया जाएगा।
देश की जानी-मानी अभिनेत्री शबाना आजमी के एनजीओ मिजवां वेलफेयर सोसायटी और डिजाइनर मनीष मल्होत्रा जल्द ही अपने 9वें सालाना फंडरेजिंग फैशन शो की मेजबानी मुंबई में करने जा रहे हैं। इसका मकसद शबाना आजमी के पिता मशहूर शायर और समाजसेवी कैफी आजमी के गांव मिजवां की महिलाओं एवं लड़कियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है।
आज कैफी साहब का वह सपना एक हकीकत बन चुका है। मिजवां आज न केवल भारत के एक छोटे से गांव के प्रगति की कहानी है, बल्कि यह उन महिलाओं की कहानी है जिन्होंने समाज की पितृसत्तात्मक सोच को ताक पर रखकर अपनी पहचान बनाई है और अपना भविष्य बनाया है।
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इस साल देश की जानी-मानी थिएटर चेन पीवीआर ने मिजवां वेलफेयर सोसायटी के साथ हाथ मिलाया है। वे मिजवां पर बनी 60 सेकेंड की प्रेरणात्मक कहानी को देश के सभी पीवीआर थियेटर्स में राष्ट्रीय गान से पहले दिखाएंगे। वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि यह कहानी अधिकाधिक दर्शकों तक पहुंचे।
शबाना आजमी कहती हैं मेरे अब्बा का मानना था कि भारत की आर्थिक प्रगति केवल ग्रामीण भारत तक पहुंचकर ही हो सकती है, जहां 80 प्रतिशत लोग रहते हैं लेकिन उन तक अवसर पहुंचते नहीं हैं। उनके ये शब्द मेरे लिए मंत्र जैसे काम करते हैं। जब कैफी साब ने अकेले यह यात्रा शुरू की थी तब मिजवां को भारत के नक्शे पर कोई जानता नहीं था और आज मिजवां दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
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देश की जानी-मानी अभिनेत्री शबाना आजमी के एनजीओ मिजवां वेलफेयर सोसायटी और डिजाइनर मनीष मल्होत्रा जल्द ही अपने 9वें सालाना फंडरेजिंग फैशन शो की मेजबानी मुंबई में करने जा रहे हैं। इसका मकसद शबाना आजमी के पिता मशहूर शायर और समाजसेवी कैफी आजमी के गांव मिजवां की महिलाओं एवं लड़कियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है।
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आज कैफी साहब का वह सपना एक हकीकत बन चुका है। मिजवां आज न केवल भारत के एक छोटे से गांव के प्रगति की कहानी है, बल्कि यह उन महिलाओं की कहानी है जिन्होंने समाज की पितृसत्तात्मक सोच को ताक पर रखकर अपनी पहचान बनाई है और अपना भविष्य बनाया है।
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इस साल देश की जानी-मानी थिएटर चेन पीवीआर ने मिजवां वेलफेयर सोसायटी के साथ हाथ मिलाया है। वे मिजवां पर बनी 60 सेकेंड की प्रेरणात्मक कहानी को देश के सभी पीवीआर थियेटर्स में राष्ट्रीय गान से पहले दिखाएंगे। वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि यह कहानी अधिकाधिक दर्शकों तक पहुंचे।
शबाना आजमी कहती हैं मेरे अब्बा का मानना था कि भारत की आर्थिक प्रगति केवल ग्रामीण भारत तक पहुंचकर ही हो सकती है, जहां 80 प्रतिशत लोग रहते हैं लेकिन उन तक अवसर पहुंचते नहीं हैं। उनके ये शब्द मेरे लिए मंत्र जैसे काम करते हैं। जब कैफी साब ने अकेले यह यात्रा शुरू की थी तब मिजवां को भारत के नक्शे पर कोई जानता नहीं था और आज मिजवां दुनिया भर में प्रसिद्ध है।