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अनुसूचित जाति के वोटों में बिखराव से बसपा ने गंवाई सारी सीटें
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अनुसूचित जाति के वोटों में बिखराव से बसपा ने गंवाई सारी सीटें
मुबारकपुर विधानसभा सीट पर समाप्त हो गया बसपा का वर्चस्व
संवाद न्यूज एजेंसी
आजमगढ़। इस बार के विधानसभा चुनाव में बसपा के शीर्ष नेतृत्व की ओर से मजबूती के साथ नहीं लड़ने और अनुसूचित जाति के मतों में बिखराव से जिले में पार्टी को काफी नुकसान पहुंचा है। इस चुनाव में जिले में बसपा का सफाया हो गया। जबकि सपा और भाजपा के पक्ष में मतों बढ़ोत्तरी हुई है जबकि बसपा प्रत्याशियों के मतों में कमी दर्ज की गई। जो यह दर्शाता है कि इस बार बसपा के परंपरागत वोटरों में बिखराव हुआ है। यहां तक कि मुबारकपुर विधानसभा सीट पर बसपा का वर्चस्व कायम रहा है लेकिन इस सीट को भी बसपा ने गंवा दिया।
आजमगढ़ को सपा के साथ बसपा का भी गढ़ कहा जाता है। क्योंकि बसपा ही एक ऐसी पार्टी है जिसने इससे पहले कभी सपा को आजमगढ़ में 10 सीटें नहीं जीतने दी थी। 2012 में जब सपा की लहर चल रही थी तब भी मुबारकपुर विधानसभा सीट पर पार्टी के प्रत्याशी को जीत मिली थी। यह पहला अवसर है जब बसपा का जिले में सफाया हो गया। इसका मुख्य कारण पार्टी के परंपरागत वोटरों में बिखराव रहा। मतगणना के बाद प्रत्याशियों को मिले मतों की स्थिति देखें तो जहां सपा और भाजपा के मतों में बढ़ोतरी हुई है। वहीं बसपा के वोटों में बिखराव देखने को मिला है। बहुत से दलित वोटरों ने इस बार भाजपा को वोट किया। यह कोरोना काल में भाजपा सरकार द्वारा किए गए कार्यों को देखते हुआ। भाजपा सरकार ने जहां गरीबों को कोरोना काल में फ्री में राशन दिया वहीं उनके खातों में पैसे भी भेजे। जिसका परिणाम रहा कि इस बार बहुत से दलित भाजपा के पक्ष में वोटिंग करते नजर आए। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती की पूर्वांचल और जनपद में कम सक्रियता भी वोटों के बिखराव का कारण बनी। कई बार उनके द्वारा सार्वजनिक मंच से सपा को हराने के लिए भाजपा को वोट देने की भी बात कही गई थी। इस बात का असर बसपा के परंपरागत वोटरों पर पड़ा। बसपा सुप्रीमो द्वारा जनपद में मात्र एक जनसभा की गई वह जनसभा भी मंडलीय थी। इसके बाद ब्राह्मणों को लुभाने के लिए सतीश चंद्र मिश्रा जनपद में दो बार आए और उन्होंने जनसभा भी की। ब्राह्मणों की बात दूर वह अपने परंपरागत वोटरों को सहेजने में कामयाब नहीं हो सके। जिसका परिणाम रहा कि बसपा प्रत्याशियों को 2017 की तुलना में कम मत मिले।
0
विधानसभा बसपा प्रत्याशी पिछले और इस चुनाव में मिले मत
विधानसभा 2017 में मिले मत 2022 में मिले मत
अतरौलिया 56536 51293
गोपालपुर 54271 45211
सगड़ी 62203 41006
मुबारकपुर 70705 48754
आजमगढ़ 58185 39281
निजामाबाद 48745 44657
फूलपुर पवई 61140 49495
दीदारगंज 62125 47094
लालगंज 72715 57809
मेंहनगर 60198 50173
0
सबसे अधिक मुबारकपुर में घटा बसपा का वोट
आजमगढ़। मतगणना के बाद बसपा को मिले वोटों की स्थिति देखें तो हर विधानसभा में बसपा के वोट बैंक खिसका है। सबसे बड़ी बात तो यह रही कि जिस मुबारकपुर सीट पर पार्टी हर लहर में कब्जा जमाती रही उस विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा वोट उसके खिसके।
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विधानसभा घटे बसपा के वोट
अतरौलिया 5243
गोपालपुर 9060
सगड़ी 21197
मुबारकपुर 21951
आजमगढ़ 18904
निजामाबाद 4088
फूलपुर पवई 11645
दीदारगंज 15031
लालगंज 14906
मेंहनगर 10025
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मुबारकपुर विधानसभा सीट पर समाप्त हो गया बसपा का वर्चस्व
संवाद न्यूज एजेंसी
आजमगढ़। इस बार के विधानसभा चुनाव में बसपा के शीर्ष नेतृत्व की ओर से मजबूती के साथ नहीं लड़ने और अनुसूचित जाति के मतों में बिखराव से जिले में पार्टी को काफी नुकसान पहुंचा है। इस चुनाव में जिले में बसपा का सफाया हो गया। जबकि सपा और भाजपा के पक्ष में मतों बढ़ोत्तरी हुई है जबकि बसपा प्रत्याशियों के मतों में कमी दर्ज की गई। जो यह दर्शाता है कि इस बार बसपा के परंपरागत वोटरों में बिखराव हुआ है। यहां तक कि मुबारकपुर विधानसभा सीट पर बसपा का वर्चस्व कायम रहा है लेकिन इस सीट को भी बसपा ने गंवा दिया।
आजमगढ़ को सपा के साथ बसपा का भी गढ़ कहा जाता है। क्योंकि बसपा ही एक ऐसी पार्टी है जिसने इससे पहले कभी सपा को आजमगढ़ में 10 सीटें नहीं जीतने दी थी। 2012 में जब सपा की लहर चल रही थी तब भी मुबारकपुर विधानसभा सीट पर पार्टी के प्रत्याशी को जीत मिली थी। यह पहला अवसर है जब बसपा का जिले में सफाया हो गया। इसका मुख्य कारण पार्टी के परंपरागत वोटरों में बिखराव रहा। मतगणना के बाद प्रत्याशियों को मिले मतों की स्थिति देखें तो जहां सपा और भाजपा के मतों में बढ़ोतरी हुई है। वहीं बसपा के वोटों में बिखराव देखने को मिला है। बहुत से दलित वोटरों ने इस बार भाजपा को वोट किया। यह कोरोना काल में भाजपा सरकार द्वारा किए गए कार्यों को देखते हुआ। भाजपा सरकार ने जहां गरीबों को कोरोना काल में फ्री में राशन दिया वहीं उनके खातों में पैसे भी भेजे। जिसका परिणाम रहा कि इस बार बहुत से दलित भाजपा के पक्ष में वोटिंग करते नजर आए। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती की पूर्वांचल और जनपद में कम सक्रियता भी वोटों के बिखराव का कारण बनी। कई बार उनके द्वारा सार्वजनिक मंच से सपा को हराने के लिए भाजपा को वोट देने की भी बात कही गई थी। इस बात का असर बसपा के परंपरागत वोटरों पर पड़ा। बसपा सुप्रीमो द्वारा जनपद में मात्र एक जनसभा की गई वह जनसभा भी मंडलीय थी। इसके बाद ब्राह्मणों को लुभाने के लिए सतीश चंद्र मिश्रा जनपद में दो बार आए और उन्होंने जनसभा भी की। ब्राह्मणों की बात दूर वह अपने परंपरागत वोटरों को सहेजने में कामयाब नहीं हो सके। जिसका परिणाम रहा कि बसपा प्रत्याशियों को 2017 की तुलना में कम मत मिले।
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विधानसभा बसपा प्रत्याशी पिछले और इस चुनाव में मिले मत
विधानसभा 2017 में मिले मत 2022 में मिले मत
अतरौलिया 56536 51293
गोपालपुर 54271 45211
सगड़ी 62203 41006
मुबारकपुर 70705 48754
आजमगढ़ 58185 39281
निजामाबाद 48745 44657
फूलपुर पवई 61140 49495
दीदारगंज 62125 47094
लालगंज 72715 57809
मेंहनगर 60198 50173
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सबसे अधिक मुबारकपुर में घटा बसपा का वोट
आजमगढ़। मतगणना के बाद बसपा को मिले वोटों की स्थिति देखें तो हर विधानसभा में बसपा के वोट बैंक खिसका है। सबसे बड़ी बात तो यह रही कि जिस मुबारकपुर सीट पर पार्टी हर लहर में कब्जा जमाती रही उस विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा वोट उसके खिसके।
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विधानसभा घटे बसपा के वोट
अतरौलिया 5243
गोपालपुर 9060
सगड़ी 21197
मुबारकपुर 21951
आजमगढ़ 18904
निजामाबाद 4088
फूलपुर पवई 11645
दीदारगंज 15031
लालगंज 14906
मेंहनगर 10025