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सपा-बसपा के गढ़ में पहली बार चुनौती देने की तैयारी में भाजपा
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आजमगढ़। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में अब तक समाजवादी पाटी और बहुजन समाज पार्टी में ही भिड़ंत होती रही है। पहली बार भारतीय जनता पार्टी भी खम ठोंकने को तैयार है। अभी पार्टी ने प्रत्याशी के नाम की घोषणा तो नहीं की है लेकिन सदस्यों का समर्थन जुटाने की कवायद शुरू कर दी गई है।
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की घोषणा के साथ ही पार्टियों ने मोर्चाबंदी तेज कर दी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बलराम यादव, पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव के साथ एक अंतराल के बाद अबकी पूर्व सांसद रमाकांत यादव भी आ गए हैं। सभी दिग्गज मिलकर इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने की जुगत में लग गए हैं। पार्टी के समर्थित 14 जिला पंचायत सदस्यों को इस बार जीत मिली है। भाजपा 11 सदस्यों के साथ दूसरे और बसपा 10 सदस्यों के साथ तीसरे स्थान पर है। कांग्रेस, आप, एआईएमआईएम, राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल के एक-एक सदस्य और आजाद समाज पार्टी के दो सदस्य जीत कर सदन में पहुंचे हैं। इसके अलावा 43 निर्दलीय जीते हैं। कुल 84 सीटों हैं। जीत के लिए किसी भी दल को 43 सीट की जरूरत होगी लेकिन इस जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए हर किसी को निर्दलियों का समर्थन चाहिए।
समाजवादी पार्टी ने पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव के पुत्र विजय यादव को प्रत्याशी बनाया है। भारतीय जनता पार्टी भी इस बार पूरे दमखम से चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है लेकिन अभी प्रत्याशी के नाम की घषणा नहीं की गई है। अतरौलिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके कन्हैया निषाद के पुत्र संजय निषाद की उम्मीदवारी की चर्चा जोरों पर हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष ध्रुव सिंह का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व उम्मीदवार के नाम पर विचार कर रहा है और एक-दो दिन में नाम घोषित हो जाएगा।
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जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की घोषणा के साथ ही पार्टियों ने मोर्चाबंदी तेज कर दी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बलराम यादव, पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव के साथ एक अंतराल के बाद अबकी पूर्व सांसद रमाकांत यादव भी आ गए हैं। सभी दिग्गज मिलकर इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने की जुगत में लग गए हैं। पार्टी के समर्थित 14 जिला पंचायत सदस्यों को इस बार जीत मिली है। भाजपा 11 सदस्यों के साथ दूसरे और बसपा 10 सदस्यों के साथ तीसरे स्थान पर है। कांग्रेस, आप, एआईएमआईएम, राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल के एक-एक सदस्य और आजाद समाज पार्टी के दो सदस्य जीत कर सदन में पहुंचे हैं। इसके अलावा 43 निर्दलीय जीते हैं। कुल 84 सीटों हैं। जीत के लिए किसी भी दल को 43 सीट की जरूरत होगी लेकिन इस जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए हर किसी को निर्दलियों का समर्थन चाहिए।
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समाजवादी पार्टी ने पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव के पुत्र विजय यादव को प्रत्याशी बनाया है। भारतीय जनता पार्टी भी इस बार पूरे दमखम से चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है लेकिन अभी प्रत्याशी के नाम की घषणा नहीं की गई है। अतरौलिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके कन्हैया निषाद के पुत्र संजय निषाद की उम्मीदवारी की चर्चा जोरों पर हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष ध्रुव सिंह का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व उम्मीदवार के नाम पर विचार कर रहा है और एक-दो दिन में नाम घोषित हो जाएगा।
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