UP Election 2022: आजमगढ़ की मेंहनगर विधानसभा में भाजपा को 1991 में मिली थी जीत, तीन बार सपा तो दो बार बसपा के खाते में आई सीट
इस सीट पर एक बार बीजेपी का कब्जा रहा। जब भाजपा के कल्पनाथ पासवान ने 1991 के चुनाव में सीपीएम के रामजग को हराकर जीत हासिल की।
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आजमगढ़ जिले की दो सीटें मेंहनगर और लालगंज सुरक्षित सीटें हैं। इन सीटों मेंहनर विधानसभा सीट पर पहले जहां कांग्रेस का दबदबा था, वहीं एक बार भाजपा ने भी इस सीट से जीत हासिल की है। इसके बाद सपा और बसपा ने तीन-तीन बार इस सीट पर कब्जा जमाया है।
शुरुआत के दिनों में जब क्षेत्रीय दल नहीं थे तो कांग्रेस का बोलबाला था। लेकिन इस सीट पर दो बार सीपीएम भी अपना झंडा फहराने में कामयाब रही है। 1969 में छांगुर और 1996 में रामजग ने इस सुरक्षित सीट पर सीपीएम को जीत दिलाई। जबकि 1980 में दीपू, 1985 और 1989 में दीपनरायन ने इस सीट पर कांग्रेस का झंडा बुंलद किया। इस सीट पर एक बार बीजेपी का भी कब्जा रहा। जब भाजपा के कल्पनाथ पासवान ने 1991 के चुनाव में सीपीएम के रामजग को हराकर जीत हासिल की।
इसके बाद सपा और बसपा का उदय हुआ और यह दोनों की पार्टियां इस सीट पर हावी होती गई। इस सीट पर दो बार बसपा को और तीन बार सपा को जीत हासिल हुई। बसपा को दो बार मिली जीत में 2002 और 2007 में विद्या चौधरी विधायक बनी। जबकि सपा को 1993 दरोगा प्रसाद सरोज, 2012 में बृजलाल सोनकर और 2017 में कल्पनाथ पासवान ने जीत दिलाई। मेंहनगर विधानसभा सीट पर दो बार एक महिला को क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है।
1969 के बाद मेंहनगर सीट पर जीते लोग और उनकी पार्टी
वर्ष प्रत्याशी पार्टी
1969 छांगुर सीपीएम
1974 जंगबहादुर बीकेडी
1977 बुद्धू जेएनपी
1980 दीपू कांग्रेस
1985, 89 दीपनरायन कांग्रेस
1991 कल्पनाथ भाजपा
1993 दरोगा सरोज सपा
1996 रामजग सीपीएम
2002, 07 विद्या चौधरी बसपा
2012 बृजलाल सोनकर सपा
2017 कल्पनाथ सपा
राजा हरिबंश का किला और मकबरा
जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी दूर मेंहनगर कस्बा स्थित है। यहां कुल मतदाताओं की संख्या चार लाख दो हजार 912 है। जिसमें दो लाख 11 हजार 76 पुरुष मतदाता और एक लाख 91 हजार 814 महिला मतदाता शामिल हैं। मेंहनगर विधानसभा क्षेत्र के पल्हना में मां पाल्हमेश्वरी धाम हैं। जो एक जागृत शक्तिपीठ है। यहां साल भर धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं। दूर-दूर से लोग यहां दर्शन-पूजन करने आते हैं। मेंहनगर कस्बे के समीप ही राजा हरिबंश सिंह का किला और मकबरा है। मकबरा पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किया गया है। किला खंडहर में तब्दील हो चुका है। इस क्षेत्र के किसान मुख्य रूप से धान और गेहूं की खेती करते हैं।
अनुमानित जातिगत आंकड़ा
ब्राहमण 25000, क्षत्रिय 25000, भूमिहार 7000, बनिया 19000, यादव 75000, राजभर 39000, चौहान 37000, दलित 85000, पासी 47000, खटिक 4000, मौर्या 4500, लोहार 3500, प्रजापति 9000, कहार 6500, कुर्मी 9000, गोंड 3000, मुसलमान 25000, धोबी 6000, मुसहर 5200 शेष अन्य जातियों के लोग शामिल हैं।