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Azamgarh News: शिब्ली इंटर कॉलेज सामने आया बड़ा फीस घोटाला, पूर्व प्रधानाचार्य और प्रबंधक पर मुकदमा

Fri, 19 Aug 2022 10:22 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़ Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 19 Aug 2022 10:22 PM IST
सार

धन गबन करने के आरोप में शिबली इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य व पूर्व प्रबंधक के खिलाफ प्रबंधक मिर्जा महफूजुर्रहमान ने शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। 

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big fee scam in Shibli Inter College azamgarh police case against former principal and manager
शिबली इंटर कॉलेज - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

आजमगढ़ जिले के प्रतिष्ठित विद्यालयों में शुमार शिबली इंटर कॉलेज में बड़ा फीस घोटाला सामने आया है। डीएम से हुई शिकायत के बाद डीआईओएस के नेतृत्व में गठित कमेटी की जांच में आरोप की पुष्टि हुई है। कॉलेज प्रबंधक ने तत्कालीन प्रधानाचार्य व प्रबंधक के खिलाफ शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। मामला 1.22 करोड़ रुपए के गबन का है।

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शहर कोतवाली में वर्तमान प्रबंधक मिर्जा महफूजुर्रहमान ने दी तहरीर में बताया कि संस्थागत अंग्रेजी माध्यम के छात्रों को बिना किसी मान्यता के ही वित्तविहीन का छात्र बनाकर अवैधानिक तरीके से 1.22 करोड़ रुपये वर्तमान प्रबंधक अब्दुल कयूम व प्रधानाचार्य निसार अहमद ने अतिरिक्त वसूली की।

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तीन दिन के अंदर पैसे जमा कराने के निर्देश

इतना ही नहीं वसूल की गई धनराशि विद्यालय के खाते में भी नहीं जमा कराया गया।  डीआईओएस उमेश कुमार त्रिपाठी के निर्देश पर वर्तमान प्रबंधक ने मुकदमा दर्ज कराया है। वहीं डीआइओएस उमेश कुमार त्रिपाठी ने पूर्व प्रबंधक को तीन दिन के अंदर गबन किये गए धनराशि को विद्यालय के खाते में जमा कराने का निर्देश दिया है। 

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दर्ज मुकदमे के मुताबिक शुमार शिबली इंटर कॉलेज को हिंदी व अंग्रेजी माध्यम से मान्यता प्राप्त है। छात्रों का निर्धारित शुल्क क्रमश: कक्षा छह से आठ तक का शून्य, कक्षा नौ के लिए 469, 10 के लिए 895 , 11 के लिए 542 और इंटर के लिए 1053 रुपये प्रति छात्र वार्षिक है।

आरोप है कि विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य व पूर्व प्रबंधक ने एक अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2021 तक बिना वित्तविहीन मान्यता के ही संस्थागत विद्यालय कोड संख्या-1049 अंग्रेजी माध्यम के छात्रों को वित्तविहीन का बनाकर कक्षा छह से आठ तक के छात्रों से 8800 रुपये, कक्षा नौ से 10 तक के छात्रों से 10500 रुपये और कक्षा 11 से 12 तक के छात्रों से 11700 रुपये प्रति छात्र वार्षिक वसूल किया गया। 

डीआईओएस उमेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि जिलाधिकारी के निर्देश पर की गई जांच में आरोप की पुष्टि हुई। जिस पर विद्यालय के वर्तमान प्रबंधक के माध्यम से तत्कालीन प्रधानाचार्य व प्रबंधक के खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज कराया गया है। 

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