{"_id":"66f70fbafb427e4f8407d4f7","slug":"bhojpuri-will-survive-only-if-the-language-is-in-flux-dr-shiv-azamgarh-news-c-258-1-svns1001-121176-2024-09-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाषा प्रवाह में है तो ही बचेगी भोजपुरी : डॉ. शिव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाषा प्रवाह में है तो ही बचेगी भोजपुरी : डॉ. शिव
विज्ञापन
आजमगढ़। भारतीय लोक संस्कृति और भोजपुरी भाषा, साहित्य, कला एवं संस्कृति के सर्वांगीण विकास के लिए आयोजित अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी संगम के दूसरे दिन शुक्रवार को संवाद सत्रों का आयोजन किया गया। जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में भोजपुरी भाषा, साहित्य, कला एवं भारतीय लोक संस्कृति की दशा एवं दिशा पर मंथन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. गीता सिंह, डॉक्टर द्विजराम यादव, डॉक्टर शिव कुमार निगम और डॉक्टर शशि भूषण प्रशांत ने संयुक्त रूप से की।
मुख्य वक्ता भारतीय उच्च आयोग त्रिनिदाद एवं टोबैगो के भाषा एवं संस्कृति सचिव द्वितीय डॉक्टर शिव कुमार निगम ने कहा कि भाषा अगर प्रवाह में है तो वह बनी और बची रहती है। भोजपुरी भाषा का विकास इसलिए हो रहा है क्योंकि इसका प्रवाह निरंतर है। त्रिनिदाद में भारतीय सिनेमा के गाने बहुत रुचि से सुने जाते हैं और चटनी म्यूजिक, जो भोजपुरी और अंग्रेजी की लाइनों को मिलाकर बनाया गया है, वहां अत्यंत लोकप्रिय हो रहा है।
हिंदी विद्वान डॉक्टर द्विजराम यादव ने भोजपुरी भाषा के विकास पर अपने विचार रखे। अंतररष्ट्रीय साहित्यकार मॉरीशस से आए लीलाधर हीरालाल ने कहा कि मॉरीशस में युवाओं का भोजपुरी भाषा की ओर रुझान कम हो रहा है, जो चिंताजनक है।
विज्ञापन
अंडमान निकोबार से आए अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि 2019 में वहां भोजपुरी समाज का गठन किया गया ताकि नई पीढ़ी को भोजपुरी संस्कृति से जोड़ा जा सके। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर दिग्विजय सिंह राठौर ने स्थानीय लोक कलाओं को संरक्षित करने के संगठित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रोफेसर जगदंबा प्रसाद दुबे ने भारतीय लोक संस्कृति की महत्ता पर प्रकाश डाला। डॉक्टर प्रवेश सिंह ने नई शिक्षा नीति के संदर्भ में भाषा और संस्कृति के पहलुओं पर विचार व्यक्त किए। वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. शशि भूषण प्रशांत ने भाषा को नदी के प्रवाह की तरह निरंतर बहने वाला बताया। नेपाल की साहित्यकार पूजा पवार ने लोक संस्कृति के विविध आयामों पर अपने विचार रखे।
राष्ट्रीय कला संस्था के अध्यक्ष डॉ. निर्मल श्रीवास्तव ने भोजपुरी भाषा की मिठास और भावना पर चर्चा की, और अंडमान निकोबार की साहित्यकार उषा शर्मा ने भोजपुरी कविता के माध्यम से अपनी बात रखी। अध्यक्षता प्रो. गीता सिंह और संचालन जनार्दन सिंह ने किया।
विज्ञापन
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. गीता सिंह, डॉक्टर द्विजराम यादव, डॉक्टर शिव कुमार निगम और डॉक्टर शशि भूषण प्रशांत ने संयुक्त रूप से की।
मुख्य वक्ता भारतीय उच्च आयोग त्रिनिदाद एवं टोबैगो के भाषा एवं संस्कृति सचिव द्वितीय डॉक्टर शिव कुमार निगम ने कहा कि भाषा अगर प्रवाह में है तो वह बनी और बची रहती है। भोजपुरी भाषा का विकास इसलिए हो रहा है क्योंकि इसका प्रवाह निरंतर है। त्रिनिदाद में भारतीय सिनेमा के गाने बहुत रुचि से सुने जाते हैं और चटनी म्यूजिक, जो भोजपुरी और अंग्रेजी की लाइनों को मिलाकर बनाया गया है, वहां अत्यंत लोकप्रिय हो रहा है।
विज्ञापन
हिंदी विद्वान डॉक्टर द्विजराम यादव ने भोजपुरी भाषा के विकास पर अपने विचार रखे। अंतररष्ट्रीय साहित्यकार मॉरीशस से आए लीलाधर हीरालाल ने कहा कि मॉरीशस में युवाओं का भोजपुरी भाषा की ओर रुझान कम हो रहा है, जो चिंताजनक है।
विज्ञापन
अंडमान निकोबार से आए अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि 2019 में वहां भोजपुरी समाज का गठन किया गया ताकि नई पीढ़ी को भोजपुरी संस्कृति से जोड़ा जा सके। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर दिग्विजय सिंह राठौर ने स्थानीय लोक कलाओं को संरक्षित करने के संगठित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रोफेसर जगदंबा प्रसाद दुबे ने भारतीय लोक संस्कृति की महत्ता पर प्रकाश डाला। डॉक्टर प्रवेश सिंह ने नई शिक्षा नीति के संदर्भ में भाषा और संस्कृति के पहलुओं पर विचार व्यक्त किए। वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. शशि भूषण प्रशांत ने भाषा को नदी के प्रवाह की तरह निरंतर बहने वाला बताया। नेपाल की साहित्यकार पूजा पवार ने लोक संस्कृति के विविध आयामों पर अपने विचार रखे।
राष्ट्रीय कला संस्था के अध्यक्ष डॉ. निर्मल श्रीवास्तव ने भोजपुरी भाषा की मिठास और भावना पर चर्चा की, और अंडमान निकोबार की साहित्यकार उषा शर्मा ने भोजपुरी कविता के माध्यम से अपनी बात रखी। अध्यक्षता प्रो. गीता सिंह और संचालन जनार्दन सिंह ने किया।